Seat Ka Samikaran: शाहपुर सीट से बिहार को मिला एक CM; इस 'परिवार' का है दबदबा, 17 में नौ चुनाव जीती तीन पीढ़ी
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज शाहपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। शाहपुर सीट शिवांनद तिवारी की परंपरागत सीट है। मौजूद समय में इस सीट से उनके बेटे राहुल तिवारी दूसरी बार विधायक हैं।
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विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी अमर उजाला की खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात शाहपुर विधानसभा सीट की करेंगे। शाहपुर सीट राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शिवांनद तिवारी की परंपरागत सीट रही है। इस सीट से उनके पिता रामानंद ने पांच बार जीत हासिल की। वहीं, मौजूदा समय में शिवानंद के बेटे राहुल तिवारी यहां से विधायक हैं। इस सीट का गौरवशाली इतिहास यह रहा है कि कभी यहीं से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विंदेश्वरी दुबे विधायक रहे थे।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला भोजपुर भी है। भोजपुर जिला तीन अनुमंडल और 14 ब्लॉक में बंटा है। जिले में सात विधानसभा सीट हैं। इनमें- संदेश, बड़हरा, आरा, अगिआंव (एससी), तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज शाहपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। शाहपुर विधानसभा सीट से 1952 में पहली बार चुनाव हुआ था।
1952: रामानंद तिवारी तीन चुनाव तक जीत दर्ज की
- 1952 के विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से सोशलिस्ट पार्टी के रामानंद तिवारी को जीत मिली। रामानंद का जीत का यह सिलसिला पांच चुनाव तक जारी रहा। हालांकि पार्टियां बदलती रहीं। 1952 के चुनाव में रामानंद ने कांग्रेस के हरिगोविंद मिश्र को मात्र 333 वोट से हराया था। रामानंद तिवारी को कुल 5,755 वोट मिले थे। वहीं, हरिगोविंद मिश्र को 5,422 वोट मिले थे।
- 1957 विधानसभा चुनाव में रामानंद तिवारी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) से चुनावी मैदान में उतरे और जीत हासिल की। उन्होंने इस चुनाव में कांग्रेस के रामाशंकर पांडे को 3,956 वोट से मात दी। रामानंद को कुल 12,452 वोट मिले। वही, रामाशंकर को 8,496 वोट मिले।
- 1962 विधानसभा चुनाव में रामानंद ने एक बार फिर से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने एक बार फिर से कांग्रेस के हरि गोविंद को मात दी। उन्होंने हरिगोविंद को 7,646 वोट से हराया। रामानंद को कुल 21,974 वोट मिले थे। वहीं हरिगोविंद को 14,328 वोट से संतोष करना पड़ा।
- 1967 विधानसभा चुनाव रामानंद ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (संसोपा) से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के आरपी सिंह को 7,766 वोट से हराया। रामानंद को कुल 25,064 और आरपी सिंह को 17,298 वोट मिले थे।
- 1969 के चुनाव में भी संसोपा के रामानंद ने 17,999 वोट से जीत हासिल की। उन्होंने कुल 26,371 मिले। वहीं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस के सरजू प्रसाद उपाध्याय रहे। उन्होंने कुल 8,372 वोट मिले। रामानंद शाहपुर से विधायक रहते हुए बिहार के गृह मंत्री रहे।
1972: कांग्रेस को मिली पहली जीत
1972 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से कांग्रेस को जीत मिली। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सूरज नाथ चौबे ने पांच बार के विधायक रामानंद को 8,779 वोट से मात दी चौबे को कुल 22,868 वोट मिले। वहीं, रामानंद को 14,089 वोट से संतोष करना पड़ा।

1977: जनता पार्टी को मिली जीत
1977 विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार जय नारायण मिश्र ने जीत हासिल की। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राम प्यारे यादव को 9,962 वोट से हराया। जय नारायण को कुल 21,056 वोट मिले। वही, राम प्यारे को 11,094 वोट मिले।
1980: आंनद शर्मा को मिली जीत
1980 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से कांग्रेस (आई) के आंनद शर्मा को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस (यू) के हरिदेव राय को 3,784 वोट से हराया है। आंनद को कुल 15,207 वोट मिले। वहीं हरिदेव को 11,423 वोट मिले।

1985: विंदेश्वरी दुबे को मिली जीत
1985 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से कांग्रेस के विंदेश्वरी दुबे को जीत मिली। इस चुनाव में शाहपुर के पहले विधायक रामानंद तिवारी के बेटे शिवानंद ने जनसंघ से अपनी किस्मत आजामई। विंदेश्वरी ने शिवानंद को 29,680 वोट से मात दी। विंदेश्वरी को कुल 42,766 वोट मिले। वहीं शिवानंद को 13,086 वोट मिले।
विंदेश्वरी शाहपुर से विधायक रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने मार्च 1985 से फरवरी 1988 तक मुख्यमंत्री का पद संभाला। विंदेश्वरी शाहपुर से विधायक बनने से पहले गिरिडीह (अब झारखंड) से सांसद रहे थे। इसके साथ ही विंदेश्वरी ने बिहार सरकार में कई मंत्रालय भी संभाले हैं।
1990: जनता पार्टी को दूसरी जीत मिली
- 1990 विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार धर्मपाल सिंह को जीत मिली। धर्मपाल की यह जीच 1995 के चुनाव में भी जारी रही, लेकिन पार्टी बदल गई। 1990 के चुनाव में धर्मपाल ने निर्दलीय उम्मीदवार शिवानंद तिवारी को मात्र 455 वोट से शिकस्त दी। धर्मपाल को कुल 20,422 वोट मिले। वहीं, शिवानंद को 19,967 वोट मिले।
- 1995 के चुनाव में धर्मपाल की जीत के अंतर में बढ़त हुई। उन्होंने यह चुनाव जनता दल से लड़ा। 1995 के चुनाव में उन्होंने समता पार्टी के शिवानंद तिवारी को 16,895 वोट से मात दी। धर्मपाल को कुल 37,139 वोट मिले। वहीं शिवानंद को 20,444 वोट से संतोष करना पड़ा।
2000: राजद को पहली जीत मिली
लगातार तीन चुनाव में हार का सामना करने वाले शिवानंद तिवारी को साल 2000 में राजद के टिकट पर पहली जीत मिली। शिवानंद ने फरवरी 2005 में भी राजद के टिकट पर ही जीत हासिल की। दोनों चुनाव में उन्होंने धर्मपाल सिंह को हराया था। 2000 के चुनाव में राजद के शिवानंद ने धर्मपाल को 21,632 वोट से हराया। शिवानंद को कुल 60,807 वोट मिले। वहीं, धर्मपाल को मात्र 39,175 वोट मिले। धर्मपाल ने यह चुनाव समता पार्टी से लड़ा था।
2005 फरवरी: धर्मपाल के खिलाफ जीत
बिहार में 2005 में दो बार चुनाव हुए। पहला फरवरी और दूसरा अक्तूबर में। पहले चुनाव में शिवानंद ने 9,982 वोट से जीत हासिल की। वहीं लोजपा के टिकट पर लड़ रहे धर्मपाल दूसरे नंबर पर रहे। शिवानंद को 36,085 वोट मिले। और धर्मपाल को 26,103 वोट मिले।
2005 अक्तूबर: भाजपा का खाता खुला
अक्तूबर 2005 में भाजपा ने शाहपुर से पहली बार जीत दर्ज की और पार्टी की मुन्नी देवी विधायक बनीं। मुन्नी देवी ने दो बार के विधायक शिवानंद को 2,807 वोट से मात दी। मुन्नी देवी को कुल 34,121 और शिवांनद को 31,314 वोट मिले।
2010: भाजपा के पास बरकरार रही सीट
2010 में एक बार फिर भाजपा की मुन्नी देवी ने जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह को 8,211 वोट से हराया। धर्मपाल ने यह चुनाव राजद से लड़ा था। मुन्नी देवी को कुल 44,795 वोट मिले। वहीं, धर्मपाल को 36,584 वोट से संतोष करना पड़ा।
2015: राहुल तिवारी को मिली जीत
2015 के चुनाव में रामानंद तिवारी के पोते और शिवानंद के बेटे राहुल तिवारी को जीत मिली। राहुल ने राजद के टिकट पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में राहुल ने भाजपा के विशेश्वर ओझा को 14,570 वोट से मात दी। राहुल को कुल 69,315 वोट मिले। वहीं, विशेश्वर को 54,745 वोट मिले।

2020: लगातार दूसरी बार सीट पर शिवानंद के बेटे की जीत
इसके बाद उन्होंने 2020 के चुनाव में भी जीत हासिल की। इसमें राहुल ने 22,883 वोट से जीत दर्ज की। वहीं, दूसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार शोभा देवी रहीं। राहुल को कुल 64,393 वोट मिले। वहीं शोभा को 41,510 वोट मिले। इसके साथ ही इस चुनाव में भाजपा तीसरे नंबर पर रही।
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