Seat ka Samikaran: भाजपा का गढ़ रही पटना साहिब सीट, 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया नाम
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज पटना साहिब विधानसभा सीट की बात करेंगे। यह सीट बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव का गढ़ रही है।
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विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव चंद महीने दूर हैं। सियासी बिसात पर शह मात का खेल भी शुरू हो चुका है। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में आज हम पटना साहिब विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते है पटना साहिब सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक पटना जिला भी है, जो की बिहार की राजधानी है। पटना साहिब विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पटना साहिब लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट पटना साहिब नाम से 2008 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले सीट पटना पूर्व के नाम से जानी जाती थी। 2008 तक, बिहार की राजधानी पटना के लिए केवल एक लोकसभा सीट थी। उस वर्ष हुए पुनर्गठन में, शहर को दो सीटें मिलीं, पाटलिपुत्र और पटना साहिब। पटना साहिब में 6 विधानसभा सीटें है जिसमें बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब और फतुहा शामिल है। 1957 में सीट पर सबसे पहले चुनाव हुए थे। उस समय सीट पटना पूर्व के नाम से जानी जाती थी।
पहले चुनावों में कांग्रेस को जीत
सबसे पहले पटना पूर्व नाम की सीट पर 1957 में चुनाव हुए थे। तब सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस की जहरा अहमद ने भारतीय जनसंघ के बृज मोहन लाल को 6222 वोट से हरा दिया था।
1962 में एक बार फिर सीट पर चुनाव हुए जिसमें एक बार फिर से कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस की जहरा अहमद ने जनसंघ के संत सिंह को 3381 वोट से हरा दिया था।
रामदेव महतो को मिली जीत
1967 के चुनाव में कांग्रेस को तीन जीत के बाद पहली हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में भारतीय जनसंघ के रामदेव महतो ने कांग्रेस के जमील अहमद को 19951 वोट से हरा दिया था।
1969 में भारतीय जनसंघ के रामदेव महतो को एक बार फिर जीत मिली थी। उन्होंने माकपा के तकी रहीम को 5567 वोट से हरा दिया था।
कांग्रेस को एक बार फिर जीत
1972 में दो चुनाव हारने के बाद एक बार फिर से कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के जमील अहमद ने भारतीय जनसंघ के रामदेव महतो को 407 वोट से हरा दिया था।
रामदेव महतो को तीसरी जीत
1977 में एक बार फिर रामदेव महतो ने कांग्रेस के राम रणविजय सिंह को 31,660 वोट से हरा दिया। यह सीट पर रामदेव महतो की तीसरी जीत रही। हालांकि, इस बार वे जनता पार्टी के टिकट पर मैदान में थे।
1980 में फिर कांग्रेस जीती
1980 में कांग्रेस (आई) के शरद कुमार जैन ने भाजपा के रामदेव महतो को 280 वोट से हरा दिया था। हालांकि, शरद कुमार जैन के लिए यह जीत बहुत बड़ी नहीं थी।
1985 में एक बार फिर सीट पर कांग्रेस के शरद कुमार जैन को जीत मिली। उन्होंने माकपा के रामलखन यादव को 2,767 वोट से हरा दिया था।
1990 में जनता दल के महताब लाल सिंह को जीत मिली। उन्होंने भाजपा के विमलेश सिंह को 6,165 वोट से हरा दिया था।
नंद किशोर यादव का गढ़ बनी सीट
1995 में पहली बार नंद किशोर यादव को इस सीट पर पहली बार जीत मिली थी। उसके बाद कभी नंद किशोर यादव इस सीट से से नहीं हारे। भाजपा के नंद किशोर यादव ने जनता दल के रामलखन सिंह को 6,430 वोट से हरा दिया था। वे अभी बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं।
2000 के चुनाव में एक बार फिर भाजपा के टिकट पर नंद किशोर यादव को जीत मिली थी। उन्होंने राजद के ज्ञानेंद्र कुमार यादव को 31,492 वोट से हरा दिया था।
2005 में बिहार मे दो बार चुनाव हुए। पहला फरवरी में और दूसरा अक्तूबर में। दोनों ही चुनावों में भाजपा के नंद किशोर यादव ने जीत दर्ज की थी। पहले चुनाव में उन्होंने राजद के अनिल कुमार यादव को 32753 वोट से हरा दिया था। उसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया।
अक्तूबर 2005 के दूसरे चुनाव में फिर एक बार नंद किशोर यादव ही जीते। उन्होंने की राजद भारती देवी को 35,970 वोट से हरा दिया था। इसके बाद नंद किशोर को बिहार सरकार में सड़क निर्माण एवं पर्यटन मंत्री बनाया गया।

परिसीमन के बाद भी नंद किशोर यादव को जीत
2008 में बिहार में परिसीमन हुआ। इसके बाद पटना पूर्व विधानसभा सीट को पटना साहिब के नाम से जाना जाने लगा। उसके बाद 2010, 2015 और 2020 के चुनावों में भाजपा के नंदकिशोर यादव को जीत मिली। उन्हें पथ निर्माण मंत्री का दायित्व भी दिया गया। वर्तमान में वह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं।
2010 में उन्होंने परवेज अहमद को 65,337 वोट से हरा दिया था। 2015 में राजद के संतोष मेहता को 2,792 वोट से हरा दिया था। 2020 में कांग्रेस के प्रवीण सिंह को 18,300 वोट से हराया था।
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