Seat Ka Samikaran: आठ बार कांग्रेस तो छह बार भाजपा का रहा रक्सौल सीट पर कब्जा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज सिकटा विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में भाजपा के प्रमोद कुमार सिन्हा को जीत मिली थी।
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बिहार की राजनीति में हर विधानसभा की एक अलग खासियत है और एक अलग महत्व है। इस वर्ष के अंत में बिहार में चुनाव होने हैं। इसे लेकर हर बिहार में राजनीति गर्म है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को एक बार फिर बिहार के दौरे पर आए। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। बिहार में आने वाले दिनों में सत्ता किसके पास जाती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इस चुनावी हलचल के बीच बिहार चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में आज हम आपको रक्सौल सीट के बारे में बताने जा रहे हैं। इस सीट पर लंबे समय से भाजपा ने अपना कब्जा जमा रखा है।
पहले जानते है रक्सौल सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। रक्सौल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिमी चंपारण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। 2008 परिसीमन से पहले इसे बेतिया लोकसभा सीट के नाम से जाना जाता था। पश्चिमी चंपारण लोकसभा में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें नौतन, चनपटिया, बेतिया, रक्सौल, सुगौली, नरकटिया शामिल हैं। इस सीट पर लंबे समय से भाजपा जीत रही है। 1952 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे।
पहले तीन चुनाव कांग्रेस नाम
1952 में सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे। उस समय यहां से कांग्रेस के राधा पांडे को जीत मिली थी। उन्होंने राधा कृष्ण राय को 2699 वोट से हरा दिया था।
1957 और 1962 में भी यहां से कांग्रेस के राधा पांडे को ही जीत मिली थी। 1957 में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के विंध्याचल सिंह को 4882 वोट से हरा दिया था। 1962 में एक बार फिर उन्होंने पीएसपी के विंध्याचल सिंह को 1382 वोट से हरा दिया था।

1967 में विंध्याचल सिंह को मिली जीत
कांग्रेस के राधा पांडे को तीन बार लगातार जीत के बाद 1967 में हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के विंध्याचल सिंह को जीत मिली। उन्होंने लगातार तीन बार से जीत रहे कांग्रेस के राधा पांडे को 5489 वोट से हरा दिया था।
1969: राधा पांडे की सीट पर वापसी
1969 में एक बार फिर से रक्सौल सीट पर राधा पांडे ने वापसी की। उनका मुकाबला एक बार फिर विंध्याचल सिंह के साथ ही थी। उन्होंने एसएसपी के विंध्याचल को 6505 वोट से हरा दिया था।
1972:सगीर अहमद ने दर्ज की जीत
1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नए चेहरे सगीर अहमद को उतारा। सगीर अहमद ने इस सीट पर कांग्रेस को कुल चार चुनाव जीताने में मदद की। 1972, 77, 80, 85 चारों चुनावों में कांग्रेस के सगीर अहमद को रक्सौल सीट पर लगातार जीत मिली।
1972 में उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के शंकर यादव को 2197 वोट से हरा दिया था। 1977 में जनता पार्टी के शंकर यादव को 3586 वोट से हरा दिया था। 1980 में सगीर अहमद ने कभी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और अब जनता पार्टी से लड़ रहे राधा पांडे को 11,497 वोट से हरा दिया था। 1985 में लोकदल के राजनंदन प्रसाद राय को 5328 वोट से हरा दिया था।

1990: जनता दल को जीत
1990 के विधानसभा चुनाव में रक्सौल सीट से जनता दल के राजनंदन राय को जीत मिली। उन्होंने चार बार से लगातार जीत रहे कांग्रेस के सगीर अहमद को 13272 वोट से हरा दिया था।
1995 में भी जनता दल के राज नंदन राय को दूसरी बार जीत मिली। उन्होंने भाजपा के अजय कुमार सिंह को 7440 वोट से हरा दिया।
2000: भाजपा की जीत की सिलसिला शुरू
2000 के विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक इस सीट पर भाजपा की जीत का सिलसिला जारी है। दो बार से भाजपा के टिकट पर प्रयास कर रहे अजय कुमार सिंह को 2000 में पहली जीत मिली। इसका बाद वह लगातार 2015 तक जीतते रहे। 2000 में उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता और सीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले सगीर अहमद को 12951 वोट से हरा दिया था।
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। पहले चुनाव में अजय ने निर्दलीय उम्मीदवार और दो बार सीट से विधायक रहे राजनंदन राय को 2826 वोट से हरा दिया था। 2005 के दूसरे चुनाव में भी अजय कुमार का मुकाबला राजनंदन राय से था। इस बार राय लोजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में थे। अजय ने राय को 8449 वोट से हरा दिया था।
2010 में एक बार फिर भाजपा के अजय कुमार का मुकाबला लोजपा के राजनंदन राय से ही रहा था। इस चुनाव में भी अजय को जीत मिली। उन्होंने राजनंदन राय को 10117 वोट से हरा दिया था।
2015 में भाजपा के अजय कुमार ने राजद के सुरेश कुमार को 3169 वोट से हरा दिया।

2020 में भाजपा के प्रमोद को जीत
2020 के चुनाव में भाजपा से लगातार पांच बार जीत दर्ज करने वाले अजय कुमार की जगह प्रमोद कुमार सिन्हा को टिकट दिया। प्रमोद ने कांग्रेस के रामबाबू प्रसाद यादव को 36,923 वोट से हरा दिया। अजय कुमार इस बार बीएसपी से चुनाव लड़कर तीसरे नंबर पर रहे थे।
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