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सीट का समीकरण: बेतिया से पांचवीं बार जीतकर रेणु देवी बनी थीं उपमुख्यमंत्री, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
Fri, 16 May 2025 08:52 AM IST
संध्या
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Fri, 16 May 2025 08:52 AM IST
सार
‘सीट का समीकरण’ सीरीज की सातवी कड़ी में आज हम आपको बेतिया विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा पूर्व डिप्टी सीएम रेणु देवी हैं।
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बिहार चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। इस चुनावी साल में अमर उजाला बिहार और बिहार की राजनीति, उससे जुड़ी घटनाओं और चेहरों के बारे में अलग-अलग सीरीज के जरिए बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की सातवीं कड़ी में आज हम आपको बेतिया विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। पिछले चुनाव में यहां से भाजपा की रेणु देवी जीती थीं। जीत के बाद रेणु देवी नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनीं। 2022 में नीतीश के पाला बदलने तक तक वह इस पद पर रहीं।
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पश्चिमी चंपारण जिले का हिस्सा है बेतिया सीट
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। यह जिला तीन अनुमंडल और 18 ब्लाक में विभाजित है। पश्चिमी चंपारण जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें वाल्मीकि नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया और सिकटा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात बेतिया विधानसभा सीट की करेंगे। बेतिया पश्चिमी चंपारण का एक महत्वपूर्ण भाग है। यहां पश्चिमी चंपारण का मुख्यालय भी मौजूद है। पूरे देश के साथ ही 1951-52 में ही यहां पर पहली बार चुनाव हुए थे।
बिहार के 38 जिलों में से एक पश्चिमी चंपारण जिला भी है। यह जिला तीन अनुमंडल और 18 ब्लाक में विभाजित है। पश्चिमी चंपारण जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें वाल्मीकि नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया और सिकटा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात बेतिया विधानसभा सीट की करेंगे। बेतिया पश्चिमी चंपारण का एक महत्वपूर्ण भाग है। यहां पश्चिमी चंपारण का मुख्यालय भी मौजूद है। पूरे देश के साथ ही 1951-52 में ही यहां पर पहली बार चुनाव हुए थे।
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1952 से 1962 तक कांग्रेस को मिली जीत
1951-52 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे। इस चुनाव में बेतिया सीट से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के प्रजापति मिश्रा ने अखिल भारतीय भारतीय जनसंघ के प्रफुल्लो कुमार सान्याल को 14,549 वोट से हरा दिया। 1952 में इस सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें कांग्रेस की केतकी देवी ने जीत दर्ज की थी।
1957 के चुनाव में बेतिया सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। उस चुनाव में इस सीट से दो विधायक चुने गए। तब भी जीतने वाले दोनों उम्मीदवार कांग्रेस से थे। पहले विजेता कांग्रेस के जय नारायण प्रसाद और दूसरे कांग्रेस के ही जगन्नाथ पीडी. स्वतंत्र थे।
1962 में फिर से इस सीट को सामान्य कर दिया गया। इसके साथ ही कुछ सीटों से दो विधायक चुनने वाला नियम भी समाप्त हो गया। 1962 में बेतिया सीट से कांग्रेस के जय नारायण प्रसाद को जीत मिली। प्रसाद ने इस चुनाव में जनसंघ के मदन लाल सिंघानिया को 7,069 वोट से हराया।
1951-52 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे। इस चुनाव में बेतिया सीट से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के प्रजापति मिश्रा ने अखिल भारतीय भारतीय जनसंघ के प्रफुल्लो कुमार सान्याल को 14,549 वोट से हरा दिया। 1952 में इस सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें कांग्रेस की केतकी देवी ने जीत दर्ज की थी।
1957 के चुनाव में बेतिया सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। उस चुनाव में इस सीट से दो विधायक चुने गए। तब भी जीतने वाले दोनों उम्मीदवार कांग्रेस से थे। पहले विजेता कांग्रेस के जय नारायण प्रसाद और दूसरे कांग्रेस के ही जगन्नाथ पीडी. स्वतंत्र थे।
1962 में फिर से इस सीट को सामान्य कर दिया गया। इसके साथ ही कुछ सीटों से दो विधायक चुनने वाला नियम भी समाप्त हो गया। 1962 में बेतिया सीट से कांग्रेस के जय नारायण प्रसाद को जीत मिली। प्रसाद ने इस चुनाव में जनसंघ के मदन लाल सिंघानिया को 7,069 वोट से हराया।
1967 में निर्दलीय उम्मीदवार को जीत
लगातार चार बार यहां से जीत दर्ज कर चुकी कांग्रेस 1967 के विधानसभा चुनाव में बेतिया सीट से हार गई। 1967 में यहां से निर्दलीय एचपी शाही ने कांग्रेस के एसपी वर्मा को 7,297 वोट से हरा दिया। 1969 के विधानसभा चुनाव में बेतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत के साथ वापसी की। इस बार यहां से गौरी शंकर पांडे ने जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनसंघ के गोपाल राय को 7,781 वोट से हरा दिया।
1972 में बेतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस ने कृष्ण मोहन पांडे को उतारा। इस चुनाव में भी कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के कृष्ण मोहन पांडेय ने भारतीय जनसंघ के गोपा जी राय को 1,512 वोट से हरा दिया।
लगातार चार बार यहां से जीत दर्ज कर चुकी कांग्रेस 1967 के विधानसभा चुनाव में बेतिया सीट से हार गई। 1967 में यहां से निर्दलीय एचपी शाही ने कांग्रेस के एसपी वर्मा को 7,297 वोट से हरा दिया। 1969 के विधानसभा चुनाव में बेतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत के साथ वापसी की। इस बार यहां से गौरी शंकर पांडे ने जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनसंघ के गोपाल राय को 7,781 वोट से हरा दिया।
1972 में बेतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस ने कृष्ण मोहन पांडे को उतारा। इस चुनाव में भी कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के कृष्ण मोहन पांडेय ने भारतीय जनसंघ के गोपा जी राय को 1,512 वोट से हरा दिया।
1977, 1980, 1985 में गौरी शंकर पांडे को जीत
कांग्रेस ने फिर एक बार गौरी शंकर पांडे को 1977 में मैदान में उतारा इसके बाद लगातार तीन चुनाव में गौरी शंकर पांडे को जीत मिली। 1977 की जनता लहर में भी उन्होंने जनता पार्टी के मदन लाल सिंहानिया 3,816 वोट से हरा दिया। 1980 में गौरी शंकर पांडे ने कांग्रेस इंदिरा पार्टी से चुनाव लड़ा। इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार शिव शंकर कनोडिया को 8,956 वोट से हरा दिया। 1985 में पांडे ने सीपीआई के अहमद अली को 16,475 वोट से हरा दिया।
कांग्रेस ने फिर एक बार गौरी शंकर पांडे को 1977 में मैदान में उतारा इसके बाद लगातार तीन चुनाव में गौरी शंकर पांडे को जीत मिली। 1977 की जनता लहर में भी उन्होंने जनता पार्टी के मदन लाल सिंहानिया 3,816 वोट से हरा दिया। 1980 में गौरी शंकर पांडे ने कांग्रेस इंदिरा पार्टी से चुनाव लड़ा। इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार शिव शंकर कनोडिया को 8,956 वोट से हरा दिया। 1985 में पांडे ने सीपीआई के अहमद अली को 16,475 वोट से हरा दिया।
1990 में भाजपा की पहली जीत
1990 में बेतिया सीट पर भाजपा को पहली बार जीत मिली। इस चुनाव में भाजपा के मदन प्रसाद जायसवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार नागेश्वर शाही को 6,739 वोट से हरा दिया। 1995 में बेतिया सीट पर जनता दल ने जीत दर्ज की। जनता दल के बीरबल यादव ने भाजपा के तत्कालीन विधायक डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल को महज 505 वोट से हराया।
1990 में बेतिया सीट पर भाजपा को पहली बार जीत मिली। इस चुनाव में भाजपा के मदन प्रसाद जायसवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार नागेश्वर शाही को 6,739 वोट से हरा दिया। 1995 में बेतिया सीट पर जनता दल ने जीत दर्ज की। जनता दल के बीरबल यादव ने भाजपा के तत्कालीन विधायक डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल को महज 505 वोट से हराया।
2000 से रेणु देवी का गढ़ बनी बेतिया सीट
साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से रेणु देवी को अपना उम्मीदवार बनाया। इसके बाद बीते छह चुनाव में पांच बार यहां से भाजपा की रेणु देवी को जीत मिली है। केवल 2015 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2020 में बेतिया सीट पर पांचवीं जीत दर्ज करने के बाद रेणु देवी बिहार की उपमुख्यमंत्री बनाई गईं। साथ ही उन्होंने बिहार सरकार में कई मंत्रालयों को भी संभाला। 2022 में नीतीश कुमार के पाला बदलने पर उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। 2024 में जब नीतीश फिर से भाजपा के साथ आए तब उन्हें दोबारा यह पद नहीं मिला।
साल 2000 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर रेणु देवी ने जीत दर्ज की। रेणु देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार मो. शमीम अख्तर को 10,841 वोट से हराया था। इसके बाद फरवरी 2005 और अक्तूबर 2005 और 2010 में रेणु देवी सीट पर जीतती रहीं। फरवरी 2005 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार शमीम अख्तर को 11,457 वोट से हरा दिया। अक्तूबर 2005 में एक बार फिर रेणु देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार शमीम अख्तर को 16,466 वोट से हराया। 2010 में रेणु देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार अनिल कुमार झा को 28,789 वोट से हराया।
साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से रेणु देवी को अपना उम्मीदवार बनाया। इसके बाद बीते छह चुनाव में पांच बार यहां से भाजपा की रेणु देवी को जीत मिली है। केवल 2015 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2020 में बेतिया सीट पर पांचवीं जीत दर्ज करने के बाद रेणु देवी बिहार की उपमुख्यमंत्री बनाई गईं। साथ ही उन्होंने बिहार सरकार में कई मंत्रालयों को भी संभाला। 2022 में नीतीश कुमार के पाला बदलने पर उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। 2024 में जब नीतीश फिर से भाजपा के साथ आए तब उन्हें दोबारा यह पद नहीं मिला।
साल 2000 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर रेणु देवी ने जीत दर्ज की। रेणु देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार मो. शमीम अख्तर को 10,841 वोट से हराया था। इसके बाद फरवरी 2005 और अक्तूबर 2005 और 2010 में रेणु देवी सीट पर जीतती रहीं। फरवरी 2005 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार शमीम अख्तर को 11,457 वोट से हरा दिया। अक्तूबर 2005 में एक बार फिर रेणु देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार शमीम अख्तर को 16,466 वोट से हराया। 2010 में रेणु देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार अनिल कुमार झा को 28,789 वोट से हराया।
2015 में रेणु देवी को मिली हार
2015 में रेणु देवी कांग्रेस के टिकट पर उतरे मदन मोहन तिवारी से हार गईं। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं रेणु देवी को मदन मोहन तिवारी ने 2,320 वोट से हराया था। 2020 में रेणु देवी ने बेतिया सीट पर बड़े अंतर से जीत की। उन्होंने कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी को 18,079 वोट से हराया।
2015 में रेणु देवी कांग्रेस के टिकट पर उतरे मदन मोहन तिवारी से हार गईं। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं रेणु देवी को मदन मोहन तिवारी ने 2,320 वोट से हराया था। 2020 में रेणु देवी ने बेतिया सीट पर बड़े अंतर से जीत की। उन्होंने कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी को 18,079 वोट से हराया।