सीट का समीकरण: कभी कांग्रेस का गढ़ रही हरसिद्धि सीट पर अभी है भाजपा का कब्जा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज हरसिद्धि विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में भाजपा के कृष्ण नंदन पासवान को जीत मिली थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार की राजनीति में हर विधानसभा की एक अलग महत्व है। बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे लेकर बिहार में राजनीति गर्म है। प्रधानमंत्री नरेंद्र चुनाव के ऐलान से पहलेह ही बिहार के कई दौरे कर चुके हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। बिहार में आने वाले दिनों में सत्ता किसके पास जाती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इस चुनावी हलचल के बीच बिहार चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में आज हम आपको हरसिद्धि सीट के बारे में बताने जा रहे हैं।
पहले जानते है हरसिद्धि के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक पूर्वी चंपारण जिला भी है। जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। हरसिद्धि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पूर्वी चंपारण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। 2008 परिसीमन से पहले लोकसभा सीट के नाम से जाना जाता था। पूर्वी चंपारण लोकसभा में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें हरसिद्धि (एससी), गोविंदगंज, केसरिया, कल्याणपुर, पिपरा, मोतिहारी विधानसभा सीटें शामिल हैं।
1952 में पहली बार हुए चुनाव
सीट पर पहली बार चुनाव 1952 में हुए थे। इसमें कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस के हरिवंश सहाय ने सोशलिस्ट पार्टी के जुगल प्रसाद को 5750 वोट से हरा दिया था। तीसरे नंबर पर जनसंघ के जग नारायण मिश्रा रहे थे।
1957 में एक बार फिर से कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में कांग्रेस की पारबती देवी ने सीएनपीएसपीजेपी के बिंदेश्वरी प्रसाद सिंह को 4070 वोट से हरा दिया था।
1962 के चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के नागेश्वर दत्त पाठक को निर्दलीय उम्मीदवार नयन प्रसाद सिंह को 7571 वोट से हरा दिया था।
भाकपा की पहली और आखिरी जीत
1967 में इस सीट पर भाकपा के उम्मीदवार को जीत मिली थी। भाकपा के एस.एम. अब्दुल्ला ने कांग्रेस के एन.डी. पाठक को 6960 वोट से हरा दिया था।
कांग्रेस की फिर हुई वापसी
1969 में एक बार फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की। कांग्रेस के नागेश्वर दत्ता पाठक ने निर्दलीय उम्मीदवार हिदायतुल्लाह खान को 2337 वोट से हरा दिया था।
1972 में एक बार फिर से कांग्रेस को जीत मिली। पिछली बार निर्दलीय चुनाव हारे और इस बार कांग्रेस के टिकट पर मो. हिदायतुल्लाह खान को जीत मिली। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के युगल किशोर पीडी. सिंह को 5099 वोट से हरा दिया था।
1977 में जनता पार्टी जीती
1977 में सीट पर जनता पार्टी को जीत मिली थी। जनता पार्टी के युगल किशोर प्रसाद सिंह ने वर्तमान विधायक और कांग्रेस के मो. हिदायतुल्लाह खान को 1883 वोट से हरा दिया था।
कांग्रेस के हिदायतुल्लाह खान को लगातार तीन जीत
कांग्रेस के हिदयातुल्लाह इस सीट पर सबसे ज्यादा बार जीतकर वापस आने वाले विधायक थे। 1980 में एक बार फिर से उन्हें जीत मिली थी। उन्होंने भाकपा के दुर्गा दत्त प्रसाद को 11085 वोट से हरा दिया था।
1985 में एक बार फिर कांग्रेस को जीत मिली थी। कांग्रेस के मो. हिदायतुल्लाह खान ने भाकपा के राजाराम प्रसाद को 4141 वोट से हरा दिया था।
1990 में कांग्रेस के मो. हिदायतुल्लाह खान को हरसिद्धि सीट पर चौथी जीत मिली थी। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के विशंभर नाथ को 1803 वोट से हरा दिया था। उन्होंने 27 मार्च 1989 से 19 मार्च 1990 तक बिहार विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

जनता दल को मिली जीत
1995 में तीन बार के कांग्रेस के विधायक मो. हिदायतुल्लाह खान को हार का सामना करना पड़ा। इस बार जनता दल के अवधेश प्रसाद कुशवाहा ने समता पार्टी के महेश्वर सिंह को 31,838 वोट से हरा दिया। 2015 में अवधेश प्रसाद कुशवाहा का एक स्टिंग वीडियो सामने आया जिसमें वरिष्ठ मंत्री कुशवाहा कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए दिखाई दे रहे थे। इसके बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
2000 में समता पार्टी के मिली जीत
2000 में हुए चुनाव में हरसिद्धि सीट पर पिछले चुनावों में हारे समता पार्टी के महेश्वर सिंह को जीत मिली थी। इस चुनाव में वर्तमान विधायक और राजद के अवधेश प्रसाद कुशवाहा को 12,718 वोट से हार का सामना करना पड़ा था।
2005 में दो चुनावों में लोजपा को मिली जीत
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनावों में महेश्वर सिंह और अवधेश प्रसाद कुशवाहा के बीच मुकाबला हुआ था। 2005 के पहले चुनाव में लोजपा के अवधेश प्रसाद कुशवाहा ने जदयू के महेश्वर सिंह को 7964 वोट से हरा दिया था।
वहीं 2005 में दूसरी बार चुनाव अक्तूबर में हुए थे। इस चुनाव में भी पिछली बार वाले दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था। लेकिन इस बार दोनों ने पार्टी बदल ली थी। जीत लोजपा के महेश्वर सिंह को मिली थी। उन्होंने जदयू के अवधेश प्रसाद कुशवाहा को 108 वोट से हरा दिया था।
2010 में भाजपा को मिली जीत
2010 में सीट पर भाजपा को पहली बार जीत मिली थी। इस बार मुकाबला भाजपा और लोजपा के बीच था। इस चुनाव में हरसिद्धि सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हो गई। 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कृष्ण नंदन पासवान ने राजद के सतीश पासवान को 18064 वोट से हरा दिया था।

सीट का समीकरण सीरीज की सभी खबरें यहां पढ़ें
- सीट का समीकरण: ट्रेन के एक सफर के चलते डीएसपी की जगह नेता बने रामविलास, अलौली ने पासवान को ऐसे बनाया ‘पारस’
- सीट का समीकरण: पांच दिन के मुख्यमंत्री से मौजूदा डिप्टी सीएम तक यहां से जीते, ऐसा है परबत्ता सीट का इतिहास
- सीट का समीकरण: लालू यादव परिवार का गढ़ है राघोपुर, पिछले नौ में से सात चुनाव उनके कुनबे के ही नाम रहा
- सीट का समीकरण: पहले चुनाव में अपनों ने हराया, आठ साल बाद मिली पहली जीत; हरनौत में ऐसे बढ़ा नीतीश की वर्चस्व
- सीट का समीकरण: अर्थशास्त्र के प्रोफेसर से सीएम की कुर्सी तक, कैसे झंझारपुर ने बदली जगन्नाथ मिश्र की किस्म
- सीट का समीकरण: पति-पत्नी ने नौतन में 6 बार दिलाई कांग्रेस को जीत, यहीं से जीत मुख्यमंत्री बने थे केदार पांडे
- सीट का समीकरण: बेतिया से पांचवीं बार जीतकर रेणु देवी बनी थीं उपमुख्यमंत्री, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
- कभी लालू के करीबी का गढ़ थी शिवहर, ऐसा है बहुबली आंनद मोहन के बेटे की सीट का समीकरण
- 1977 में मुख्यमंत्री बनने के बाद यहीं से MLA बने थे कर्पूरी ठाकुर, ऐसा है फुलपरास का इतिहास
- सीट का समीकरण: कभी दुष्कर्मी विधायक तो कभी सुशांत की मौत से चर्चा में आई छातापुर सीट, ऐसा है चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: यहां 11 बार जीता तस्लीमुद्दीन परिवार, 2020 में भाइयों की लड़ाई वाली सीट का ऐसा है इतिहास
- सीट का समीकरण: 18 में 14 बार परसा सीट पर जीता तेज प्रताप यादव के ससुर का परिवार, दरोगा प्रसाद रहे मुख्यमंत्री
- सीट का समीकरण: यहां से कर्पूरी ठाकुर और उनके बेटे दोनों विधानसभा पहुंचे, ऐसा है समस्तीपुर सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: सीट बदलकर तेज प्रताप ने रोका था जदयू की हैट्रिक का रास्ता, ऐसा है हसनपुर सीट का इतिहास
- Seat Ka Samikaran: चकाई सीट पर रहा है दो परिवारों का दबदबा, पार्टियां बदलीं पर 15 में से 13 जीत इन्हीं के नाम
- Seat Ka Samikaran: बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम ने कटिहार को बनाया भाजपा का गढ़, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: पिछले सात चुनाव से दो चेहरों की लड़ाई का केंद्र रही है रुपौली, दोनों का है बाहुबल कनेक्शन
- Seat Ka Samikaran: कोढ़ा से जीतकर बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने थे भोला पासवान, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: मुख्यमंत्री-विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं धमदाहा से जीते चेहरे, अब यहां लेशी सिंह का दबदबा
- Seat Ka Samikaran: कभी कांग्रेस के मुख्यमंत्री की सीट रही हाजीपुर, पिछले सात चुनाव से है भाजपा का अभेद्य किला
- Seat Ka Samikaran: यहां से जीते दो चेहरे रहे विधानसभा अध्यक्ष, ऐसा है सीवान सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: यहां से जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं मंत्री विजय चौधरी, ऐसा है सरायरंजन का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: यहां से जो जीता वो एक से ज्यादा बार विधानसभा पहुंचा, ऐसा है भागलपुर सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: दो सीएम और एक डिप्टी सीएम को मिल चुकी सोनपुर से जीत, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: लखीसराय है बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का गढ़, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: इस सीट से जीते दो चेहरे रहे बिहार के मुख्यमंत्री, पिछले आठ चुनाव से है भाजपा का गढ़
- Seat Ka Samikaran: शाहपुर सीट से बिहार को मिला एक CM; इस 'परिवार' का है दबदबा, 17 में नौ चुनाव जीती तीन पीढ़ी
- Seat ka Samikaran: भाजपा का गढ़ रही पटना साहिब सीट, 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया नाम
- Seat Ka Samikaran: इमामगंज से जीत की हैट्रिक लगा चुका मांझी परिवार, JDU नेता के नाम है पांच जीत का रिकॉर्ड
- Seat Ka Samikaran: सहरसा से दो बार चुनाव हारीं लवली आनंद, बिहार के पूर्व वित्त मंत्री यहां से चार बार जीते
- Seat Ka Samikaran: इस सीट पर 2020 में ओलंपियन श्रेयसी ने खोला भाजपा का खाता, ऐसा है जमुई का चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: ओबीसी आरक्षण वाले बीपी मंडल की सीट रही है मधेपुरा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की सीट रही है केवटी, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat ka Samikaran: पिछले तीन में दो चुनाव रहे जदयू के नाम, ऐसा है वाल्मीकि नगर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: पिछले छह चुनाव से रामनगर में भाजपा का परचम, कभी राजपरिवार से जुड़े चेहरों को मिलती थी जीत
- Seat Ka Samikaran: लौरिया में विनय बिहारी लगा चुके हैं जीत की हैट्रिक, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: नरकटियागंज में परिवार के बीच मुकाबला, सीट पर लंबे समय से काबिज है यह राजघराना
- Seat Ka Samikaran: बिहार के 16वें मुख्यमंत्री की सीट रही है झाझा, पिछले छह में से पांच चुनाव रहे जदयू के नाम
- Seat ka samikaran: यहां एक बार जीती तो फिर अब तक नहीं हारी भाजपा, ऐसा है चनपटिया सीट का चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: सिकंदरा विधानसभा सीट पर अब तक नहीं खुला भाजपा-राजद का खाता, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: सिकटा सीट पर लंबे समय तक रहा है दो परिवारों का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: वारिसलीगंज में पिछले 25 साल से दो परिवारों के 'बाहुबल' का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: आठ बार कांग्रेस तो छह बार भाजपा का रहा रक्सौल सीट पर कब्जा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
- Seat Ka Samikaran: यहां 15 में 10 चुनाव रहे एक ही परिवार के नाम, मां-बेटे की लड़ाई का भी गवाह रही गोविंदपुर
- Seat ka Samikaran: सुगौली ने हर चुनाव में बदला विधायक, सिर्फ दो विधायकों को मिला तीन बार मौका
- Seat Ka Samikaran: नवादा विधानसभा सीट पर रहा है दो यादव परिवारों का दबदबा, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास
2015 में राजद को मिली जीत
2015 के चुनाव में मुकाबला फिर से राजद और भाजपा के बीच था। राजद के राजेंद्र कुमार ने भाजपा के कृष्ण नंदन पासवान को 10267 वोट से हरा दिया था।
2020 में कृष्ण नंदन पासवान की वापसी
2020 में एक बार फिर से भाजपा के कृष्ण नंदन पासवान को जीत मिली। मुकाबला राजद के कुमार नागेंद्र बिहारी के साथ था। उन्होंने नागेंद्र बिहारी को 15,685 वोट से हरा दिया था।