फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   Rules are being flouted in private school buses, children are made to sit ahead of the driver

Una News: निजी स्कूल बसों में नियमों की उड़ रही धज्जियां, ड्राइवर से भी आगे बैठाए जाते हैं बच्चे

Sat, 24 Aug 2024 02:35 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sat, 24 Aug 2024 02:35 AM IST
विज्ञापन
Rules are being flouted in private school buses, children are made to sit ahead of the driver
ऊना में नन्हे बच्चों से भरी निजी स्कूल की बस बस में बैठने के लिए सीट न होने के चलते बोन्ट पर बै
ऊना। स्कूल वाहनों के हादसों का शिकार होने के मामले बीते कुछ वर्षों में काफी बढ़ गए हैं। जब ऐसे दुखद हादसे होते हैं, तो उसके बाद अकसर नियमों की दुहाई दी जाती है और चर्चाएं होती है कि अगर समय रहते नियमों का पालन किया गया होता तो ऐसा न होता। लेकिन सड़कों पर सुबह और शाम के समय सरपट दौड़ते स्कूल वाहनों की निगरानी करने वाला कोई नजर नहीं आता। दुखद हादसों के बाद अधिकारी कुछ दिन चालान पर जोर देते हैं और फिर पुरानी स्थिति लौट आती है। ऐसी ही स्थिति ऊना में नजर आती है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार शहर से सटे बड़े निजी स्कूलों के वाहनों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। टक्का सड़क मार्ग पर स्थित क्षेत्र के प्रसिद्ध स्कूल के वाहन में विद्यार्थी अपनी मर्जी से कहीं भी बैठ रहे हैं। शुक्रवार को छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने जा रही बस में बच्चे स्कूल बस के शीशे के बिल्कुल पास बैठे नजर आए। चालक की सीट भी उनसे पीछे नजर आ रही थी। बच्चे बस के बोनट के बिल्कुल करीब थे, जबकि कायदे से उन्हें सीटों पर सुरक्षित तरीके से बैठाया जाना चाहिए। इसके अलावा बस में विद्यार्थी ठूस-ठूस कर भरे जा रहे हैं।
विज्ञापन

इस तरह हरोली क्षेत्र के पंडोगा गांव में स्थित प्रसिद्ध निजी संस्थान की स्कूल बस में लापरवाही इस कदर है कि मानिए नियम उसके लिए बने ही नहीं। हैरानी की बात है कि इस स्कूल की बस की इंश्योरेंस पांच साल पहले यानी साल 2019 में खत्म हो चुकी है और अब तक इसे बच्चों को लाने और छोड़ने के लिए खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बस प्रतिदिन 100 से अधिक बच्चों को स्कूल पहुंचाती है, जबकि इसके दस्तावेज कई साल पहले खत्म हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

निरीक्षणों से मात्र खानापूर्ति
उधर शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर निजी स्कूलों में जाकर मानकों की जांच की जाती है, लेकिन हैरत है कि पांच साल से बिना इंश्योरेंस चल रही बस पर किसी का ध्यान नहीं गया। वहीं, हादसों के कुछ दिन बाद से वैसे भी स्कूली वाहनों पर कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आती। वहीं, निजी स्कूलों की मोटी फीस चुकाने वाले अभिभावक भी इन अनियमितताओं का विरोध नहीं करते। बता दें कि कुछ माह पहले बंगाणा क्षेत्र में स्कूली वाहन से गिरकर एक छात्रा की मौत हो गई थी। वहीं, पंजावर गांव में भी निजी बस से उतरते समय एक छात्र की मौत हो गई थी।


Iनिजी स्कूलों के निरीक्षण को लेकर जल्द अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, बीते कुछ समय से सरकारी स्कूलों में निरीक्षण का क्रम लगातार जारी रहा था। अगर स्कूली वाहनों में नियमों से जुड़ा कोई उल्लंघन होता है, तो निश्चित तौर पर उसके खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। इस बारे में परिवहन अधिकारियों के साथ भी चर्चा की जाएगी। I
राजेंद्र कौशल, उपनिदेशक, जिला उच्च शिक्षा विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article