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एनएचएच कर्मचारियों के लिए बनाई जाए स्थायी पॉलिसी
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Permanent policy should be made for NHH employees
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ऊना। जिला ऊना बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता व पर्यवेक्षक महासंघ ने राज्य स्वास्थ्य समिति (नेशनल हेल्थ मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ के पक्ष में आवाज बुलंद की है। संगठन ने एनएचएम कर्मचारियों के लिए स्थायी पॉलिसी बनाने की पैरवी की है।
बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता व पर्यवेक्षक महासंघ के जिलाध्यक्ष हरगोविंद सिंह, महासचिव विपिन कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्वास्थ्य समिति (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत यह कर्मचारी 23 वर्षों से अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। कहा कि अन्य विभागों के कर्मचारियों की तर्ज पर इन कर्मचारियों के लिए भी सरकार को जल्द कोई स्थायी नीति बना देनी चाहिए। इन कर्मचारियों द्वारा क्षय रोग, एचआईवी एड्स, शिशु स्वास्थ्य, कोविड-19 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के तहत अपना योगदान दिया जा रहा है। इन कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग जायज है। कहा कि हरियाणा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने अपने इन कर्मचारियों के लिए स्थायी पॉलिसी बनाई है।
हरगोविंद ने बताया कि बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक महासंघ और अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ पहले भी इन कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की सरकार से गुुहार लगा चुके हैं। मार्च 2016 में प्रदेश सरकार ने एक अधिसूचना तक जारी कर दी थी, परंतु आईजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों को तो लाभ दे दिया, परंतु इन कर्मचारियों को आज दिन तक लाभ नहीं मिल पाया।
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बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता व पर्यवेक्षक महासंघ के जिलाध्यक्ष हरगोविंद सिंह, महासचिव विपिन कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्वास्थ्य समिति (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत यह कर्मचारी 23 वर्षों से अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। कहा कि अन्य विभागों के कर्मचारियों की तर्ज पर इन कर्मचारियों के लिए भी सरकार को जल्द कोई स्थायी नीति बना देनी चाहिए। इन कर्मचारियों द्वारा क्षय रोग, एचआईवी एड्स, शिशु स्वास्थ्य, कोविड-19 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के तहत अपना योगदान दिया जा रहा है। इन कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग जायज है। कहा कि हरियाणा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने अपने इन कर्मचारियों के लिए स्थायी पॉलिसी बनाई है।
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हरगोविंद ने बताया कि बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक महासंघ और अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ पहले भी इन कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की सरकार से गुुहार लगा चुके हैं। मार्च 2016 में प्रदेश सरकार ने एक अधिसूचना तक जारी कर दी थी, परंतु आईजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों को तो लाभ दे दिया, परंतु इन कर्मचारियों को आज दिन तक लाभ नहीं मिल पाया।
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