{"_id":"6ab2cae99b38c968580d0904","slug":"neha-became-self-reliant-thanks-to-her-mother-in-laws-encouragement-una-news-c-93-1-una1026-206927-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: सासू मां के हौसले से नेहा बनीं आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: सासू मां के हौसले से नेहा बनीं आत्मनिर्भर
Wed, 23 Sep 2026 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:07 AM IST
विज्ञापन
सिलाई का काम करती हुई मैहतपुर की नेहा देवी। संवाद
दो साल पहले घर से शुरू किया सिलाई का काम, एक अन्य महिला को भी दिया रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। मैहतपुर की नेहा देवी ने अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की राह बनाई है। करीब दो वर्ष पहले घर से सिलाई का काम शुरू करने वाली नेहा आज हर माह करीब 12 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने अपने काम से एक अन्य महिला को भी रोजगार दिया है।
नेहा ने बताया कि आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा उन्हें अपनी सासू मां से मिली। उन्होंने नेहा को अपने हुनर को रोजगार का साधन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद नेहा ने घर से सिलाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे काम बढ़ता गया। अब वह महिलाओं के सलवार सूट, प्लाजो सूट और बच्चों के कपड़े सिल रही हैं। क्षेत्र के लोग अपनी पसंद के अनुसार कपड़े सिलवाने के लिए उनके पास पहुंचते हैं।
नेहा के पति दिहाड़ी-मजदूरी करते हैं। ऐसे में सिलाई से होने वाली आय से वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। नेहा का कहना है कि मेहनत और लगन से महिलाएं घर से ही अपने हुनर को रोजगार का जरिया बना सकती हैं। उनका कहना है कि इच्छाशक्ति और परिवार का सहयोग मिले तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। मैहतपुर की नेहा देवी ने अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की राह बनाई है। करीब दो वर्ष पहले घर से सिलाई का काम शुरू करने वाली नेहा आज हर माह करीब 12 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने अपने काम से एक अन्य महिला को भी रोजगार दिया है।
नेहा ने बताया कि आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा उन्हें अपनी सासू मां से मिली। उन्होंने नेहा को अपने हुनर को रोजगार का साधन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद नेहा ने घर से सिलाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे काम बढ़ता गया। अब वह महिलाओं के सलवार सूट, प्लाजो सूट और बच्चों के कपड़े सिल रही हैं। क्षेत्र के लोग अपनी पसंद के अनुसार कपड़े सिलवाने के लिए उनके पास पहुंचते हैं।
विज्ञापन
नेहा के पति दिहाड़ी-मजदूरी करते हैं। ऐसे में सिलाई से होने वाली आय से वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। नेहा का कहना है कि मेहनत और लगन से महिलाएं घर से ही अपने हुनर को रोजगार का जरिया बना सकती हैं। उनका कहना है कि इच्छाशक्ति और परिवार का सहयोग मिले तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।
विज्ञापन