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आलू की पक्की फसल के बीज की कटाई शुरू

Sat, 18 Dec 2021 12:06 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Dec 2021 12:06 AM IST
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farmers ready to sow potato in Una distt
ऊना। जिला के किसान आलू की पक्की फसल बीजने की तैयारी में जुट गए हैं। इसके लिए किसानों ने आलू के अंकुरित बीज की खरीद कर ली है और 20 दिसंबर से बिजाई शुरू हो जाएगी। खास बात यह है कि इस फसल में अंकुरित बीज को तीन से चार हिस्सों में काटकर लगाया जाता है। इसमें यह खास ध्यान रखा जाता है कि काटे गए बीज के हर हिस्से में अकुंर हो।
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इस बीज को बिजाई से चार से पांच दिन पहले ही काट लिया जाता है, ताकि बिजाई के दौरान बीज काटने में अतिरिक्त समय न लगे। जब तक बिजाई न हो, तब तक काटे गए बीज को लगातार बदलते रहने पड़ता है ताकि बीज में सड़न पैदा न हो। गांव पंडोगा के किसान रोहित कुमार ने बताया कि उन्होंने आलू की चार महीने वाली फसल (पक्की फसल) के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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उन्होंने बीच की खरीद जालंधर से की है। अब इस बीच की कटाई चल रही है। बीज की कटाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती बीज को लगातार बदलते रहने की है। बीज को हवा न लगने से इसमें सड़न पैदा होने लगती है। ऐसे में जब तक बिजाई शुरू न हो, बीज को लगातार बदलते रहने पड़ता है। उन्होंने बताया कि वह करीब 300 कनाल जमीन पर आलू की पक्की फसल लगाएंगे और एक कनाल जमीन पर एक क्विंटल आलू का बीज लगता है।
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इस हिसाब से उन्होंने तीन सौ क्विंटल बीज की खरीद की हुई है। अब इस बीज को अंकुर को ध्यान में रखते हुए काटा जा रहा है। साथ ही काटे गए बीज को सड़न से बचाव के लिए कार्य किया जा रहा है। वहीं, किसान विनोद कुमार ने बताया कि पहले मुश्किल से खाद का बंदोबस्त हो सका और उसके अब बीज की कटाई का काम शुरू हो चुका है। उन्होंने 21 दिसंबर को करीब 35 कनाल जमीन पर आलू की बिजाई शुरू करनी है।
बिजाई की सारी प्रक्रिया आलू लगाने वाली प्लांटर मशीन की मदद से होगी। फिलहाल बीज का रखरखाव चुनौती बना हुआ है। इसके लिए पर्याप्त जगह की आवश्यकता रहती है। अगर मौसम अनुकूल रहा तो बिजाई का काम समय से शुरू हो जाएगा और बीज के रखरखाव की चुनौती से उन्हें राहत मिल पाएगी। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉक्टर अतुल डोगरा ने बताया कि जिला में लगभग 500 हेक्टेयर जमीन पर आलू की फसल लगाई जाती है।

चार महीने वाली यह फसल ज्यादातर बड़े किसान ही लगाते हैं। इसमें मेहनत तो अधिक होती है, लेकिन पैदावार भी दो महीने वाली फसल से अधिक रहती है। दिसंबर माह के अंतिम दिन इस फसल की बिजाई के लिए अनुकूल रहते हैं।
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