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Una News: बाग लगवाकर वाहवाही लूटी, अब 75 साल का किसान झोला उठाकर बेच रहा ड्रैगन फ्रूट
Wed, 02 Sep 2026 01:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:05 AM IST
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ऊना। उम्र 75 साल, 20 कनाल जमीन में ड्रैगन फ्रूट का बाग और हर महीने करीब 65 किलो तैयार होने वाली उपज। खेत में फसल खड़ी है लेकिन खरीदार नहीं। लिहाजा अपर बौल निवासी किसान रोशन लाल को अब अपनी उपज बेचने के लिए खेत से निकलकर सरकारी कार्यालयों के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं। उपायुक्त कार्यालय में वह एक-एक दरवाजा खोलकर पूछते हैं, बाबूजी, ड्रैगन फ्रूट तो नहीं लेंगे... दया कर बाबू, एक किलो ले ही लेता। यह सिर्फ एक बुजुर्ग किसान की मजबूरी नहीं बल्कि नई फसल को बढ़ावा देने वाली सरकारी व्यवस्था के उस चेहरे की तस्वीर है, जहां बाग लगवाकर विभाग उत्पादन शुरू होने पर सफलता की कहानी सरकार के सामने पेश कर अपनी पीठ थपथपा लेता है। बाजार की बारी आते ही किसान को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है।
रोशन लाल ने बताया कि करीब एक महीने बाद उनके बगीचे से लगभग 65 किलो ड्रैगन फ्रूट निकलता है। फसल तैयार होने के बाद सबसे बड़ी चिंता उसे बेचने की रहती है। ऊना मंडी में इस फल की मांग अधिक नहीं है। ऐसे में वह 20 किलो तक का झोला उठाकर खुद खरीदार तलाशते हैं। एक-एक किलो करके फल बेचने की कोशिश करते हैं ताकि खेत में तैयार उपज खराब न हो।
रोशन लाल के मुताबिक बागवानी विभाग ने जब ड्रैगन फ्रूट का बगीचा लगवाया था, तब उन्हें इस खेती से बेहतर आमदनी की उम्मीद बंधाई गई थी। करीब 120 रुपये प्रति फल तक का भाव मिलने की बात कही गई थी। किसान ने भरोसा किया और 20 कनाल जमीन पर बगीचा तैयार कर दिया। उत्पादन शुरू हुआ तो ऊना सब्जी मंडी में करीब 60 रुपये प्रति ड्रैगन फ्रूट का भाव मिला। किसान अपने उत्पाद को बेचने के लिए दर-दर भटकता रहता है।
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हम तो बागवान को उसके उत्पाद बेचने को लेकर उसका मार्गदर्शन ही कर सकते हैं। उपज के दाम तय करना हमारे विभाग का काम नहीं है। बागवानों को दाम को लेकर दिक्कत तो पेश आ रही है।
-डॉ. केके भारद्वाज, उपनिदेशक, बागवानी विभाग ऊना
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सब्जी मंडी में ड्रैगन फ्रूट की मांग नहीं होती है। ऐसे में कमीशन एजेंट लोकल किसानों से ड्रैगन फूट नहीं खरीदते हैं। जब उन्हें डिमांड आती है तो ड्रैगन फ्रूट की एक पेटी मंगवा लेते हैं।
-अंजू बाला, सचिव एपीएमसी ऊना
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रोशन लाल ने बताया कि करीब एक महीने बाद उनके बगीचे से लगभग 65 किलो ड्रैगन फ्रूट निकलता है। फसल तैयार होने के बाद सबसे बड़ी चिंता उसे बेचने की रहती है। ऊना मंडी में इस फल की मांग अधिक नहीं है। ऐसे में वह 20 किलो तक का झोला उठाकर खुद खरीदार तलाशते हैं। एक-एक किलो करके फल बेचने की कोशिश करते हैं ताकि खेत में तैयार उपज खराब न हो।
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रोशन लाल के मुताबिक बागवानी विभाग ने जब ड्रैगन फ्रूट का बगीचा लगवाया था, तब उन्हें इस खेती से बेहतर आमदनी की उम्मीद बंधाई गई थी। करीब 120 रुपये प्रति फल तक का भाव मिलने की बात कही गई थी। किसान ने भरोसा किया और 20 कनाल जमीन पर बगीचा तैयार कर दिया। उत्पादन शुरू हुआ तो ऊना सब्जी मंडी में करीब 60 रुपये प्रति ड्रैगन फ्रूट का भाव मिला। किसान अपने उत्पाद को बेचने के लिए दर-दर भटकता रहता है।
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हम तो बागवान को उसके उत्पाद बेचने को लेकर उसका मार्गदर्शन ही कर सकते हैं। उपज के दाम तय करना हमारे विभाग का काम नहीं है। बागवानों को दाम को लेकर दिक्कत तो पेश आ रही है।
-डॉ. केके भारद्वाज, उपनिदेशक, बागवानी विभाग ऊना
सब्जी मंडी में ड्रैगन फ्रूट की मांग नहीं होती है। ऐसे में कमीशन एजेंट लोकल किसानों से ड्रैगन फूट नहीं खरीदते हैं। जब उन्हें डिमांड आती है तो ड्रैगन फ्रूट की एक पेटी मंगवा लेते हैं।
-अंजू बाला, सचिव एपीएमसी ऊना