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Una News: ऊना के किसानों को लाखों के नुकसान का खतरा, पानी में डूबी आलू की फसल
Thu, 17 Sep 2026 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 17 Sep 2026 11:25 PM IST
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पंडोगा में बारिश के बाद आलू की बिजाई वाले खेतों में हुआ जलभराव। संवाद
ऊना। जिले में आए दिन रुक-रुककर हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वीरवार तड़के हुई बारिश से कई क्षेत्रों में आलू की फसल पानी में डूब गई। खेतों में जलभराव होने से आलू के बीज में सड़न पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में भी बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा तो खेतों में तैयार हो रही फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालात नहीं सुधरे तो कुछ क्षेत्रों में फसल पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है।
जिले में करीब 2000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार की जा रही है। इस समय कई खेतों में फसल अंतिम चरण में पहुंच चुकी है जबकि कुछ किसानों की अंतिम चरण की बिजाई भी बारिश के कारण अटक गई है। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इससे पौधों की जड़ों के आसपास पानी जमा होने से फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
जिले के पंडोगा, पंजावर, ईसपुर, खड्ड, बसाल, घालूवाल, नगनोली समेत कई अन्य गांवों में खेतों में जलभराव की स्थिति बनी है। कुछ स्थानों पर खेतों में पानी इतना जमा हो गया है कि आलू की क्यारियां तक पानी में डूब गई हैं। किसानों को डर है कि लंबे समय तक खेतों में पानी खड़ा रहा तो जमीन के भीतर तैयार हो रहे आलू भी सड़ सकते हैं। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बिजाई के अंतिम चरण पर भी बारिश ने लगाया ब्रेक
बारिश का असर पहले से चल रही आलू की बिजाई पर भी पड़ा है। जिन किसानों ने अंतिम चरण में आलू की बिजाई करनी थी, उनके खेतों में नमी अधिक होने के कारण काम रुक गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में मशीनें ले जाना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं, लगातार बारिश के कारण बिजाई में देरी होने से आगामी उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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टक्का क्षेत्र के किसान नरोत्तम शर्मा ने बताया कि लगातार हो रही बारिश से आलू की फसल को नुकसान पहुंचने लगा है। खेतों में पानी खड़ा होने के कारण आलू के बीज तक पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पा रही है। यदि पानी जल्द नहीं निकला और बारिश का दौर जारी रहा तो जमीन के भीतर आलू सड़ने शुरू हो सकते हैं।
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पंडोगा गांव के किसान प्रेम चंद ने बताया कि इस बार बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है। कई खेतों में पानी जमा होने से आलू की फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अभी फसल की बिजाई की है और ऐसे समय पर ज्यादा पानी फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर किसानों को आवश्यक सलाह और मदद उपलब्ध करवाने की मांग की।
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जिले में करीब 2000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार की जा रही है। इस समय कई खेतों में फसल अंतिम चरण में पहुंच चुकी है जबकि कुछ किसानों की अंतिम चरण की बिजाई भी बारिश के कारण अटक गई है। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इससे पौधों की जड़ों के आसपास पानी जमा होने से फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
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जिले के पंडोगा, पंजावर, ईसपुर, खड्ड, बसाल, घालूवाल, नगनोली समेत कई अन्य गांवों में खेतों में जलभराव की स्थिति बनी है। कुछ स्थानों पर खेतों में पानी इतना जमा हो गया है कि आलू की क्यारियां तक पानी में डूब गई हैं। किसानों को डर है कि लंबे समय तक खेतों में पानी खड़ा रहा तो जमीन के भीतर तैयार हो रहे आलू भी सड़ सकते हैं। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बिजाई के अंतिम चरण पर भी बारिश ने लगाया ब्रेक
बारिश का असर पहले से चल रही आलू की बिजाई पर भी पड़ा है। जिन किसानों ने अंतिम चरण में आलू की बिजाई करनी थी, उनके खेतों में नमी अधिक होने के कारण काम रुक गया है। किसानों का कहना है कि खेतों में मशीनें ले जाना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं, लगातार बारिश के कारण बिजाई में देरी होने से आगामी उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
टक्का क्षेत्र के किसान नरोत्तम शर्मा ने बताया कि लगातार हो रही बारिश से आलू की फसल को नुकसान पहुंचने लगा है। खेतों में पानी खड़ा होने के कारण आलू के बीज तक पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पा रही है। यदि पानी जल्द नहीं निकला और बारिश का दौर जारी रहा तो जमीन के भीतर आलू सड़ने शुरू हो सकते हैं।
पंडोगा गांव के किसान प्रेम चंद ने बताया कि इस बार बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है। कई खेतों में पानी जमा होने से आलू की फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अभी फसल की बिजाई की है और ऐसे समय पर ज्यादा पानी फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर किसानों को आवश्यक सलाह और मदद उपलब्ध करवाने की मांग की।