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बौल के बजाय अब बसाल में शिफ्ट होगी बैंबू नर्सरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। बौल क्षेत्र में प्रस्तावित बैंबू विलेज में बनने वाली बैंबू नर्सरी और ऑक्सीजन पार्क अब बसाल क्षेत्र में बनेगा। विशेषज्ञों की राय पर अब बसाल में इसके लिए भूमि का चयन किया गया है। बता दें कि प्रशासन ने बौल क्षेत्र में एक स्थान पर ही बैंबू विलेज और नर्सरी स्थापित करने के लिए योजना तैयार की थी। योजना को लेकर जब विशेषज्ञों ने उक्त भूमि का दौरा किया तो उन्होंने चयनित भूमि को बैंबू नर्सरी व ऑक्सीजन पार्क के लिए उपयुक्त नहीं माना। इसके चलते अब बैंबू से बनने वाले उत्पादों के उद्योग को तो बौल में ही स्थापित किया जाएगा। जबकि, पार्क और नर्सरी को बसाल में स्थापित करने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है। इसे देखते हुए जिले में स्थापित होने वाने बैंबू विलेज के लिए अभी और समय लग सकता है। इस इस परियोजना पर लगभग एक करोड़ 17 लाख रुपये की धनराशि व्यय की जाएगी।
इस संबंध में परियोजना अधिकारी डीआरडीए संदीव ठाकुर ने कहा कि बैंबू नर्सरी व ऑक्सीजन पार्क के लिए बौल की भूमि पर मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसके के लिए अब बसाल में भूमि का चयन किया गया है। इसके अलावा बांस से बनने वाले उत्पादों व प्रशिक्षण केंद्र को बौल में ही स्थापित करने को लेकर योजना बनाई जा रही है।
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ऊना। बौल क्षेत्र में प्रस्तावित बैंबू विलेज में बनने वाली बैंबू नर्सरी और ऑक्सीजन पार्क अब बसाल क्षेत्र में बनेगा। विशेषज्ञों की राय पर अब बसाल में इसके लिए भूमि का चयन किया गया है। बता दें कि प्रशासन ने बौल क्षेत्र में एक स्थान पर ही बैंबू विलेज और नर्सरी स्थापित करने के लिए योजना तैयार की थी। योजना को लेकर जब विशेषज्ञों ने उक्त भूमि का दौरा किया तो उन्होंने चयनित भूमि को बैंबू नर्सरी व ऑक्सीजन पार्क के लिए उपयुक्त नहीं माना। इसके चलते अब बैंबू से बनने वाले उत्पादों के उद्योग को तो बौल में ही स्थापित किया जाएगा। जबकि, पार्क और नर्सरी को बसाल में स्थापित करने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है। इसे देखते हुए जिले में स्थापित होने वाने बैंबू विलेज के लिए अभी और समय लग सकता है। इस इस परियोजना पर लगभग एक करोड़ 17 लाख रुपये की धनराशि व्यय की जाएगी।
इस संबंध में परियोजना अधिकारी डीआरडीए संदीव ठाकुर ने कहा कि बैंबू नर्सरी व ऑक्सीजन पार्क के लिए बौल की भूमि पर मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसके के लिए अब बसाल में भूमि का चयन किया गया है। इसके अलावा बांस से बनने वाले उत्पादों व प्रशिक्षण केंद्र को बौल में ही स्थापित करने को लेकर योजना बनाई जा रही है।
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