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तीन साल के बच्चों का प्री-प्राइमरी में दाखिले का विरोध
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अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन ने प्राइमरी स्कूलों में तीन साल आयु वर्ग के बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में दाखिल करने का कड़ा विरोध किया है। यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष नीलम जसवाल और जिलाध्यक्ष नरेश शर्मा ने सरकार के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सोची-समझी साजिश के तहत बेरोजगार करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मामूली से मानदेय पर काम करते हुए सरकार की हर योजना को मूर्त रूप देने में हर समय तत्पर रहती हैं। यहां तक कि अपने विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों की योजनाओं को भी साकार करने में योगदान देती हैं। ऐसे में सरकार उनकी भलाई की सोचने की बजाय आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर हजारों कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बेरोजगारी के कुएं भी धकेल रही है।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन ने प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी या प्री नर्सरी शुरू करने का पहले भी विरोध किया था। अब फिर से विरोध करती हैं। सरकार को सोचना चाहिए कि यदि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे ही नहीं आएंगे तो यह केंद्र किस काम के रह जाएंगे। उन्होंने मांग की कि प्राइमरी स्कूलों में 3 साल के बच्चों को भेजने के फैसले को फौरन वापस लेते हुए उन्हें पूर्व की तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा जाए। उन्होंने पोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जा रहे मोबाइल फोन का भी विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि इस योजना में पहले की तरह रजिस्टर ही दिए जाएं।
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ऊना। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन ने प्राइमरी स्कूलों में तीन साल आयु वर्ग के बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में दाखिल करने का कड़ा विरोध किया है। यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष नीलम जसवाल और जिलाध्यक्ष नरेश शर्मा ने सरकार के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सोची-समझी साजिश के तहत बेरोजगार करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मामूली से मानदेय पर काम करते हुए सरकार की हर योजना को मूर्त रूप देने में हर समय तत्पर रहती हैं। यहां तक कि अपने विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों की योजनाओं को भी साकार करने में योगदान देती हैं। ऐसे में सरकार उनकी भलाई की सोचने की बजाय आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर हजारों कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बेरोजगारी के कुएं भी धकेल रही है।
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उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन ने प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी या प्री नर्सरी शुरू करने का पहले भी विरोध किया था। अब फिर से विरोध करती हैं। सरकार को सोचना चाहिए कि यदि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे ही नहीं आएंगे तो यह केंद्र किस काम के रह जाएंगे। उन्होंने मांग की कि प्राइमरी स्कूलों में 3 साल के बच्चों को भेजने के फैसले को फौरन वापस लेते हुए उन्हें पूर्व की तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा जाए। उन्होंने पोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जा रहे मोबाइल फोन का भी विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि इस योजना में पहले की तरह रजिस्टर ही दिए जाएं।
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