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Solan News: दूसरे दिन भी ठप रही क्रस्ना लैब, टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब का सहारा
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- ग्राउंड रिपोर्ट-
सरकारी लैब में भी आधे-अधूरे टेस्ट होने से मरीजों की बढ़ी परेशानी
बिना टेस्ट रिपोर्ट के डॉक्टरों के लिए दवाएं लिखना भी हो रहा मुश्किल
क्रस्ना लैब कर्मियों की हड़ताल मरीजों के लिए बन रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सरकार व क्रस्ना लैब प्रबंधकों की आपसी लड़ाई का खामियाजा अब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही है। क्रस्ना लैब कर्मियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। जरूरी टेस्ट करवाने के लिए मरीज भटकते रहे। हालांकि दोपहर 12 बजे तक सरकारी लैब में टेस्ट हुए, लेकिन मरीजों की संख्या इतनी थी कि वहां पर नंबर लगवाने के लिए भी मरीज घंटों बैठे रहे। दूसरी ओर सरकारी लैब में विटामिन समेत कई जरूरी टेस्ट नहीं होते। सरकारी लैब में सैंपल लेना दोपहर 12 बजे बंद कर दिया, उसके बाद मरीजों को निजी लैब में भटकना पड़ा।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों को निर्देश दिए थे कि उन्हीं मरीजों को टेस्ट लिखे जाएं, जिनके जरूरी हों, लेकिन इन दिनों वायरल के चलते ज्यादातर मरीज ऐसे थे, जिनके टेस्ट करवाना जरूरी था। बिना टेस्ट रिपोर्ट के डॉक्टरों के लिए दवाएं लिखना भी मुश्किल हो गया। अस्पताल में क्रस्ना लैब कर्मियों की हड़ताल को दो दिन हो गए हैं। क्रस्ना लैब में बैठे कर्मचारियों के पास जब मरीज पहुंच रहे थे तो वह मरीजों को तीन से चार दिन बाद आने की सलाह दे रहे थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों को अभी कई दिनों तक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। मंगलवार को भी मरीज टेस्ट होने के इंतजार में सरकारी लैब के बाहर बैठे रहे, लेकिन वहां भी उन्हें केवल कुछ ब्लड टेस्ट की ही सुविधा मिल पाई। अन्य टेस्ट करवाने के लिए उन्हें निजी क्लीनिक में भेजा गया। जो टेस्ट अस्पताल की क्रस्ना लैब में निशुल्क होते हैं, उनके लिए मरीजों को 500 से 1,000 रुपये तक खर्च करने पड़े।
इनसेट
बिना टेस्ट कैसे करवाएं उपचार
अस्पताल के चक्कर काटते-काटते दो दिन हो गए हैं। तीन टेस्ट अब भी नहीं हुए हैं। बिना टेस्ट करवाए डॉक्टर भी उपचार कैसे करेंगे। सरकारी लैब में टेस्ट हो नहीं रहे हैं और क्रस्ना लैब कर्मी हड़ताल पर हैं। निजी लैब में टेस्ट करवाने में बहुत अधिक खर्च आ रहा है। वहीं निजी लैब में ब्लड टेस्ट करवाने के पैसे भी नहीं है। ऐसे में अब परेशानी और अधिक बढ़ गई है। -कांशी राम, मतियाना
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इनसेट
तीन से चार दिन बाद आने के लिए कहा जा रहा
क्रस्ना लैब की ओर से टेस्ट करवाने के लिए तीन से चार दिनों के बाद आने के लिए कहा जा रहा है। सरकारी लैब में टेस्ट नहीं हो रहे हैं। तीन टेस्ट करवाने के लिए दो दिन से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर से आना पड़ता है। अब निजी क्लीनिक में ही जाना पड़ेगा। -बाबू राम, मरीज
कोट
कंपनी के निर्देश पर ही हड़ताल को रोका जाएगा। आपातकालीन स्थिति में मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। वहीं पुराने ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट भी मरीजों को दी जा रही है। -पमिता शर्मा, प्रभारी, क्रस्ना लैब, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
कोट
अस्पताल प्रशासन की ओर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को अभी जरूरी टेस्ट लिखने के लिए ही कहा गया है। वहीं अधिकतर टेस्ट सरकारी लैब में हो रहे हैं। - डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
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सरकारी लैब में भी आधे-अधूरे टेस्ट होने से मरीजों की बढ़ी परेशानी
बिना टेस्ट रिपोर्ट के डॉक्टरों के लिए दवाएं लिखना भी हो रहा मुश्किल
क्रस्ना लैब कर्मियों की हड़ताल मरीजों के लिए बन रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सरकार व क्रस्ना लैब प्रबंधकों की आपसी लड़ाई का खामियाजा अब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही है। क्रस्ना लैब कर्मियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। जरूरी टेस्ट करवाने के लिए मरीज भटकते रहे। हालांकि दोपहर 12 बजे तक सरकारी लैब में टेस्ट हुए, लेकिन मरीजों की संख्या इतनी थी कि वहां पर नंबर लगवाने के लिए भी मरीज घंटों बैठे रहे। दूसरी ओर सरकारी लैब में विटामिन समेत कई जरूरी टेस्ट नहीं होते। सरकारी लैब में सैंपल लेना दोपहर 12 बजे बंद कर दिया, उसके बाद मरीजों को निजी लैब में भटकना पड़ा।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों को निर्देश दिए थे कि उन्हीं मरीजों को टेस्ट लिखे जाएं, जिनके जरूरी हों, लेकिन इन दिनों वायरल के चलते ज्यादातर मरीज ऐसे थे, जिनके टेस्ट करवाना जरूरी था। बिना टेस्ट रिपोर्ट के डॉक्टरों के लिए दवाएं लिखना भी मुश्किल हो गया। अस्पताल में क्रस्ना लैब कर्मियों की हड़ताल को दो दिन हो गए हैं। क्रस्ना लैब में बैठे कर्मचारियों के पास जब मरीज पहुंच रहे थे तो वह मरीजों को तीन से चार दिन बाद आने की सलाह दे रहे थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों को अभी कई दिनों तक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। मंगलवार को भी मरीज टेस्ट होने के इंतजार में सरकारी लैब के बाहर बैठे रहे, लेकिन वहां भी उन्हें केवल कुछ ब्लड टेस्ट की ही सुविधा मिल पाई। अन्य टेस्ट करवाने के लिए उन्हें निजी क्लीनिक में भेजा गया। जो टेस्ट अस्पताल की क्रस्ना लैब में निशुल्क होते हैं, उनके लिए मरीजों को 500 से 1,000 रुपये तक खर्च करने पड़े।
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बिना टेस्ट कैसे करवाएं उपचार
अस्पताल के चक्कर काटते-काटते दो दिन हो गए हैं। तीन टेस्ट अब भी नहीं हुए हैं। बिना टेस्ट करवाए डॉक्टर भी उपचार कैसे करेंगे। सरकारी लैब में टेस्ट हो नहीं रहे हैं और क्रस्ना लैब कर्मी हड़ताल पर हैं। निजी लैब में टेस्ट करवाने में बहुत अधिक खर्च आ रहा है। वहीं निजी लैब में ब्लड टेस्ट करवाने के पैसे भी नहीं है। ऐसे में अब परेशानी और अधिक बढ़ गई है। -कांशी राम, मतियाना
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तीन से चार दिन बाद आने के लिए कहा जा रहा
क्रस्ना लैब की ओर से टेस्ट करवाने के लिए तीन से चार दिनों के बाद आने के लिए कहा जा रहा है। सरकारी लैब में टेस्ट नहीं हो रहे हैं। तीन टेस्ट करवाने के लिए दो दिन से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर से आना पड़ता है। अब निजी क्लीनिक में ही जाना पड़ेगा। -बाबू राम, मरीज
कोट
कंपनी के निर्देश पर ही हड़ताल को रोका जाएगा। आपातकालीन स्थिति में मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। वहीं पुराने ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट भी मरीजों को दी जा रही है। -पमिता शर्मा, प्रभारी, क्रस्ना लैब, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
कोट
अस्पताल प्रशासन की ओर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को अभी जरूरी टेस्ट लिखने के लिए ही कहा गया है। वहीं अधिकतर टेस्ट सरकारी लैब में हो रहे हैं। - डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन