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Solan News: दिवाली से पहले रिफाइंड, तेल और दालों के दामों में बढ़ोतरी
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एक माह में 25 से 40 फीसदी तक बढे़ दालों और रिफाइंड के दाम
राजमा, उड़द, काबूली चना के दाम 170 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंचे
पुष्पलता शांडिल्य
सोलन। दिवाली से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों और दालों की आपूर्ति में आई गिरावट के चलते खाद्य वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी हुई है। बाजार में दालों के दामों में अचानक 20 से 25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे गृहिणियों की रसोई का बजट बिगड़ गया है। लोग 100 से 180 रुपये किलोग्राम तक दालें खरीदने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी राजमा, काला चना, काबुली चना, उड़द दाल सहित रिफाइंड तेल, सरसों तेल, पताशे आदि के दामों में हुई है। बीते दिनों जहां राजमा के दाम 120 से 140 रुपये प्रतिकिलो थे, वहीं त्योहारी सीजन में बढ़कर 180 रुपये प्रतिकिलो तक हो गए हैं। दालों के दाम अचानक बढ़ने से लोग कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।
वहीं शहर के बाजारों में वर्तमान में चना दाल के दाम 80 से 100 रुपये, अरहर की दाल 110 से 160 रुपये, काली उड़द दाल 120 से 140 रुपये, धुली उड़द दाल 120 से 150 रुपये, साबुत मूंग 100 से 130 रुपये, धुली मूंग 110 से 150 मसूर दाल 75 से 100, काबुली चना 100 से 140, काला चना 80 से 100, राजमा 120 से 180, सफेद मटर 60 से 90, लोबिया 100 से 130 रुपये प्रतिकिलो तक बने हुए हैं। हालांकि दालों की गुणवत्ता के अनुसार दाम कम ज्यादा हैं। वहीं रिफाइंड तेल के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि होलसेल व्यापारियों का कहना है कि तेल की पैकेजिंग में बदलाव हुए हैं। पहले 700 ग्राम की पैकिंग होती थी लेकिन अब एक लीटर की पैकिंग बाजार में उपलब्ध है। इसकी कीमत बाजार में 160 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। वहीं होलसेल कारोबारी के मैनेजर राजेंद्र सिंह ने बताया कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में दालों का आयात दूसरे देशों से करता है। युद्ध के कारण आयात में कमी और देरी हुई है। इससे दामों में बढ़ोतरी हुई है।
इनसेट
त्योहारी सीजन में बड़ी मांग
त्योहारी सीजन के दौरान दालों के दामों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। दालों की मांग बढ़ी है। खासकर चना दाल की मांग बहुत ज्यादा है। इससे बेसन बनाया जाता है। बेसन कई तरह की मिठाइयां बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। सप्लाई कम होने और मांग ज्यादा होने के कारण दाम बढ़े हैं। -राजीव गुप्ता, कारोबारी
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राजमा, उड़द, काबूली चना के दाम 170 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंचे
पुष्पलता शांडिल्य
सोलन। दिवाली से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों और दालों की आपूर्ति में आई गिरावट के चलते खाद्य वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी हुई है। बाजार में दालों के दामों में अचानक 20 से 25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे गृहिणियों की रसोई का बजट बिगड़ गया है। लोग 100 से 180 रुपये किलोग्राम तक दालें खरीदने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी राजमा, काला चना, काबुली चना, उड़द दाल सहित रिफाइंड तेल, सरसों तेल, पताशे आदि के दामों में हुई है। बीते दिनों जहां राजमा के दाम 120 से 140 रुपये प्रतिकिलो थे, वहीं त्योहारी सीजन में बढ़कर 180 रुपये प्रतिकिलो तक हो गए हैं। दालों के दाम अचानक बढ़ने से लोग कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।
वहीं शहर के बाजारों में वर्तमान में चना दाल के दाम 80 से 100 रुपये, अरहर की दाल 110 से 160 रुपये, काली उड़द दाल 120 से 140 रुपये, धुली उड़द दाल 120 से 150 रुपये, साबुत मूंग 100 से 130 रुपये, धुली मूंग 110 से 150 मसूर दाल 75 से 100, काबुली चना 100 से 140, काला चना 80 से 100, राजमा 120 से 180, सफेद मटर 60 से 90, लोबिया 100 से 130 रुपये प्रतिकिलो तक बने हुए हैं। हालांकि दालों की गुणवत्ता के अनुसार दाम कम ज्यादा हैं। वहीं रिफाइंड तेल के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि होलसेल व्यापारियों का कहना है कि तेल की पैकेजिंग में बदलाव हुए हैं। पहले 700 ग्राम की पैकिंग होती थी लेकिन अब एक लीटर की पैकिंग बाजार में उपलब्ध है। इसकी कीमत बाजार में 160 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। वहीं होलसेल कारोबारी के मैनेजर राजेंद्र सिंह ने बताया कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में दालों का आयात दूसरे देशों से करता है। युद्ध के कारण आयात में कमी और देरी हुई है। इससे दामों में बढ़ोतरी हुई है।
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त्योहारी सीजन में बड़ी मांग
त्योहारी सीजन के दौरान दालों के दामों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। दालों की मांग बढ़ी है। खासकर चना दाल की मांग बहुत ज्यादा है। इससे बेसन बनाया जाता है। बेसन कई तरह की मिठाइयां बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। सप्लाई कम होने और मांग ज्यादा होने के कारण दाम बढ़े हैं। -राजीव गुप्ता, कारोबारी
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