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निर्यात परमिट और बीमा का झांसा देकर फार्मा उद्यमी से 12.45 लाख रुपये ठगे
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय के सुबाथू मार्ग पर घट्टी स्थित फार्मा कंपनी ने एक व्यक्ति के खिलाफ न्यायालय में धोखाधड़ी की शिकायत दी। इस शिकायत पर न्यायालय ने जांच के लिए पुलिस को आदेश जारी कर दिए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसमें बीमा के नाम पर कंपनी से 12.45 लाख की ठगी हुई है।
पुलिस के अनुसार राम लाल गर्ग ने शिकायत दी है कि मई 2019 में उसकी मुलाकात आलोक रंजन से हुई। आलोक रंजन ने शिकायतकर्ता को कहा कि वह एक निर्यात सलाहकार है और तजाकिस्तान सरकार के साथ उसकी कंपनी के उत्पादों, दवाओं का पंजीकरण और बीमा करेगा। साथ ही आश्वासन दिया कि उक्त देश से तैयार माल और दवाओं के निर्यात के परमिट दिलवाएगा।
आरोपी ने 12.45 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने आलोक रंजन की सलाह को सही मान उसके खाते में राशि जमा कर दी। 18 महीने से अधिक का समय बीतने के बाद भी न तो पंजीकरण किया गया और न ही आरोपी आलोक रंजन ने कोई निर्यात आदेश दिलवाया।
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दिसंबर 2020 में शिकायतकर्ता को पता चला कि न तो पंजीकरण के लिए कोई फॉर्म जमा किया गया है और न ही अधिकारियों ने कोई दस्तावेज प्राप्त किया है। इससे स्पष्ट है कि आरोपी आलोक रंजन ने धोखाधड़ी से उसके 12.45 लाख रुपये की ठगी की है। उसके बाद उसने इसकी शिकायत कोर्ट में दी। उधर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सोलन अशोक वर्मा ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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सोलन। जिला मुख्यालय के सुबाथू मार्ग पर घट्टी स्थित फार्मा कंपनी ने एक व्यक्ति के खिलाफ न्यायालय में धोखाधड़ी की शिकायत दी। इस शिकायत पर न्यायालय ने जांच के लिए पुलिस को आदेश जारी कर दिए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसमें बीमा के नाम पर कंपनी से 12.45 लाख की ठगी हुई है।
पुलिस के अनुसार राम लाल गर्ग ने शिकायत दी है कि मई 2019 में उसकी मुलाकात आलोक रंजन से हुई। आलोक रंजन ने शिकायतकर्ता को कहा कि वह एक निर्यात सलाहकार है और तजाकिस्तान सरकार के साथ उसकी कंपनी के उत्पादों, दवाओं का पंजीकरण और बीमा करेगा। साथ ही आश्वासन दिया कि उक्त देश से तैयार माल और दवाओं के निर्यात के परमिट दिलवाएगा।
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आरोपी ने 12.45 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने आलोक रंजन की सलाह को सही मान उसके खाते में राशि जमा कर दी। 18 महीने से अधिक का समय बीतने के बाद भी न तो पंजीकरण किया गया और न ही आरोपी आलोक रंजन ने कोई निर्यात आदेश दिलवाया।
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दिसंबर 2020 में शिकायतकर्ता को पता चला कि न तो पंजीकरण के लिए कोई फॉर्म जमा किया गया है और न ही अधिकारियों ने कोई दस्तावेज प्राप्त किया है। इससे स्पष्ट है कि आरोपी आलोक रंजन ने धोखाधड़ी से उसके 12.45 लाख रुपये की ठगी की है। उसके बाद उसने इसकी शिकायत कोर्ट में दी। उधर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सोलन अशोक वर्मा ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।