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Solan News: आधुनिक तकनीकों के जरिए बटन और ढींगरी मशरूम उगाएंगी महिलाएं
Thu, 10 Sep 2026 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:58 AM IST
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यूको आरसेटी की नई पहल : महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिया जाएगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक सामग्री, रखरखाव और बाजार प्रबंधन की दी जाएगी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यूको आरसेटी ने एक और नई पहल की है। इसके तहत अब ग्रामीण महिलाओं को बटन और ढींगरी मशरूम उगाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुरुषों की भी भागीदारी रहेगी, लेकिन प्राथमिकता महिलाओं को दी जाएगी। शिविर में 30 से 35 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया जाएगा। इसमें मशरूम की किस्म का चयन, कंपोस्ट तैयार करने का सही तरीका, उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्री, फसल का रखरखाव, साफ-सफाई और सही तरीके से तोड़ाई (हार्वेस्टिंग) से जुड़ी तमाम जानकारियां दी जाएंगी।
संस्थान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मशरूम उत्पादन के जरिए आय का एक स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। इससे महिला-पुरुष कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकेंगे। शिविर में न केवल व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि तैयार उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने, उत्पादन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने के गुर भी सिखाए जाएंगे।
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80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिकता है मशरूम
ढींगरी और बटन मशरूम का उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक बेहतरीन और किफायती जरिया है। कम लागत में शुरू होने वाले इस व्यवसाय से लोग अपनी आय बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में बाजार में इन मशरूम की कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक है, जबकि 200 ग्राम के पैकेट की कीमत 20 से 25 रुपये तक रहती है।
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प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक सामग्री, रखरखाव और बाजार प्रबंधन की दी जाएगी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यूको आरसेटी ने एक और नई पहल की है। इसके तहत अब ग्रामीण महिलाओं को बटन और ढींगरी मशरूम उगाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुरुषों की भी भागीदारी रहेगी, लेकिन प्राथमिकता महिलाओं को दी जाएगी। शिविर में 30 से 35 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया जाएगा। इसमें मशरूम की किस्म का चयन, कंपोस्ट तैयार करने का सही तरीका, उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्री, फसल का रखरखाव, साफ-सफाई और सही तरीके से तोड़ाई (हार्वेस्टिंग) से जुड़ी तमाम जानकारियां दी जाएंगी।
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संस्थान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मशरूम उत्पादन के जरिए आय का एक स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। इससे महिला-पुरुष कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकेंगे। शिविर में न केवल व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि तैयार उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने, उत्पादन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने के गुर भी सिखाए जाएंगे।
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80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिकता है मशरूम
ढींगरी और बटन मशरूम का उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक बेहतरीन और किफायती जरिया है। कम लागत में शुरू होने वाले इस व्यवसाय से लोग अपनी आय बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में बाजार में इन मशरूम की कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक है, जबकि 200 ग्राम के पैकेट की कीमत 20 से 25 रुपये तक रहती है।