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सोलन: एक किताब के लिए पूरा सेट खरीदने को मजबूर अभिभावक
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सोलन। जिले में किताबों की खरीद को लेकर अभिभावक परेशान हैं। आलम यह है कि कुछ स्कूलों की पुस्तकें चुनिंदा बुक सेलरों के पास ही मिल रही हैं। यहां पर भी अभिभावकों को एक किताब चाहिए तो नहीं दी जाती, बल्कि पूरा सेट ही लेना पड़ रहा है। इसके अलावा कॉपियों में भी परेशान किया जा रहा है। किताबों के साथ पूरे वर्ष की कॉपियां भी अभिभावकों चिपकाई जा रही हैं।छोटी-छोटी कक्षाओं की पुस्तकों के सेट ही 1200-3300 रुपये तक में मिल रहा है। अधिकतर स्कूलों की ओर से किसी निश्चित दुकान पर पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों को पुस्तक उसी दुकान से खरीदना मजबूरी बन गई है। इसका कारण यह है कि हर दुकान पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रहीं। इसका फायदा पुस्तक विक्रेता भी उठा रहे हैं। स्कूल की ओर से चलाई जा रहे प्रकाशक की सभी किताबें एक ही दुकान पर मिल जाएं, ऐसा संभव नहीं होता। स्कूल जिस पुस्तक विक्रेता से साठगांठ कर रहे हैं। उसी जगह पर सभी किताबें उपलब्ध होती हैं। यह विक्रेता पूरा सेट तैयार करके रखते हैं। अगर किसी छात्र को एक या दो किताबों की आवश्यकता होती है। तब भी दुकानदार पूरा सेट देने की बात करता है, जबकि शहर की अन्य दुकानों पर वह किताब मिलना मुश्किल है। अभिभावक अर्चना शर्मा, रमेश कश्यप, कांति अत्रि, संजीव भारद्वाज, रणजीत ठाकुर, अतुल शर्मा सहित अन्य अभिभावकों का कहना है कि अगर हमने किताबों के सेट में कोई किताब पुराने विद्यार्थियों से ले ली है, बावजूद इसके किताबों का पूरा सेट खरीदना पड़ता है। किताबों का पूरा सेट दुकानदार खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
इनसेट
अभिभावक मजबूर
कई अभिभावक इस समस्या से अवगत तो कराते हैं। लेकिन खुले रूप से कुछ कहने में अपने आपको असहज महसूस करते हैं। उनके अनुसार स्कूल प्रबंधक उनके बच्चे के साथ भेदभाव कर सकता है या उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकता है। इसलिए जेब पर बोझ बढ़ने के बाद भी अभिभावक मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
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अभिभावक मजबूर
कई अभिभावक इस समस्या से अवगत तो कराते हैं। लेकिन खुले रूप से कुछ कहने में अपने आपको असहज महसूस करते हैं। उनके अनुसार स्कूल प्रबंधक उनके बच्चे के साथ भेदभाव कर सकता है या उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकता है। इसलिए जेब पर बोझ बढ़ने के बाद भी अभिभावक मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
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