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उद्योग में बाहर निकलने के लिए नहीं था आपात द्वार
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ओमपाल सिंह
बद्दी (सोलन)। काठा स्थित पंखा बनाने वाले कंपनी में बाहर निकलने के लिए कोई आपात द्वार नहीं था। इसके चलते अग्निकांड के बाद कामगारों को सुरक्षित निकालना बहुत मुश्किल भरा रहा। कंपनी के बाहर गेट पर लोग अपनों को खोजते रहे। उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी विमल अपनी मां के इंतजार में सुबह से शाम तक कंपनी गेट पर खड़ा रहा। सभी से गुहरा लगा रहा था कि उसकी माता सर्वेश शर्मा को बाहर निकाल लो लेकिन न उसकी मां बाहर आई और न ही उनका पता चला।
यूपी के रमेश का कहना था कि उसके पिता भृगुनाथ का भी कोई पता नहीं चल रहा है। सूचना मिलते ही कंपनी के बाहर लोगों को जमघट लग गया और कामगार अन्य कंपनियों से भाग कर अपनों की तलाश में जुट गए। इस कंपनी में कोई भी ऐसा गेट नहीं था जिसमें आपात समय उसकी सेवाएं ली जा सके। एकमात्र गेट होने से कंपनी चारों ओर से बंद थी। एक साथ कंपनी में करीब 200 कामगार ड्यूटी पर तैनात थे जिनके बाहर निकलने के लिए एक ही रास्ता था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस समय आग लगी, कामगार इतने डरे हुए थे कि परिसर में भी नहीं रुके और सीधे अपनी जान बचाते हुए घरों को भाग गए। आग को बुझाने के लिए पर्याप्त फायर टेंडर नहीं थे। आग के ऊपर गाड़ियों से जो पानी डाला, वह नाकाफी मालूम हो रहा था। कंपनी चारों ओर से टीन की चदरों से ढकी होने से आग के ऊपर पानी ही नहीं गिर रहा था। केवल चदरों पर पानी जा रहा था जिससे आग नहीं बुझ रही थी।
लोगों के पास दुआ करने के अलावा कुछ नहीं था
बाहर खड़े लोग कंपनी के अंदर कामगार होने की बात तो सभी कर रहे थे लेकिन कहां से जाएं और कैसे जाएं इसके लिए भी प्रबंध नहीं था। लोग बस अंदर फंसे लोगों के जिंदा रहने की दुआएं कर रहे थे। अभी तक दो लोगों के लापता होने की सूचना है। ये दो वही लोग हैं जिनके परिजन बाहर हैं। जो अकेले रहते हैंए उनका अभी कोई पता नहीं है। घायल अरविंद का कहना है कि मलबे में कई लोग दबे हैं लेकिन आग पूरी तरह से नहीं बुझी है।
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उधर, कंपनी के प्रबंधकों को कहना है कि उनकी शिफ्ट 8:00 बजे से शुरू होती थी और नए कामगार अभी तक आए नहीं थे और पुराने चले गए थे। थोड़े बहुत लोग थे जो बाहर निकल चुके थे। उधर, एएसपी नरेंद्र सिंह ने एक और महिला कामगार सर्वेश शर्मा के लापता होने की बात कही है।
आग लगते ही कैलाश विहार खाली करवाया
जैसे ही आग लगी पुलिस प्रशासन ने कंपनी के साथ लगती कंपनियों और कैलाश विहार को खाली करा दिया। पार्षद तरसेम चौधरी और इंटक के बीबीएन अध्यक्ष गुरमेल चौधरी ने बताया कि कैलाश विहार में जाकर उन्होंने खुद लोगों को बाहर निकाला। इनमें भारी संख्या में महिला और छोटे बच्चे थे। इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
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बद्दी (सोलन)। काठा स्थित पंखा बनाने वाले कंपनी में बाहर निकलने के लिए कोई आपात द्वार नहीं था। इसके चलते अग्निकांड के बाद कामगारों को सुरक्षित निकालना बहुत मुश्किल भरा रहा। कंपनी के बाहर गेट पर लोग अपनों को खोजते रहे। उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी विमल अपनी मां के इंतजार में सुबह से शाम तक कंपनी गेट पर खड़ा रहा। सभी से गुहरा लगा रहा था कि उसकी माता सर्वेश शर्मा को बाहर निकाल लो लेकिन न उसकी मां बाहर आई और न ही उनका पता चला।
यूपी के रमेश का कहना था कि उसके पिता भृगुनाथ का भी कोई पता नहीं चल रहा है। सूचना मिलते ही कंपनी के बाहर लोगों को जमघट लग गया और कामगार अन्य कंपनियों से भाग कर अपनों की तलाश में जुट गए। इस कंपनी में कोई भी ऐसा गेट नहीं था जिसमें आपात समय उसकी सेवाएं ली जा सके। एकमात्र गेट होने से कंपनी चारों ओर से बंद थी। एक साथ कंपनी में करीब 200 कामगार ड्यूटी पर तैनात थे जिनके बाहर निकलने के लिए एक ही रास्ता था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस समय आग लगी, कामगार इतने डरे हुए थे कि परिसर में भी नहीं रुके और सीधे अपनी जान बचाते हुए घरों को भाग गए। आग को बुझाने के लिए पर्याप्त फायर टेंडर नहीं थे। आग के ऊपर गाड़ियों से जो पानी डाला, वह नाकाफी मालूम हो रहा था। कंपनी चारों ओर से टीन की चदरों से ढकी होने से आग के ऊपर पानी ही नहीं गिर रहा था। केवल चदरों पर पानी जा रहा था जिससे आग नहीं बुझ रही थी।
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लोगों के पास दुआ करने के अलावा कुछ नहीं था
बाहर खड़े लोग कंपनी के अंदर कामगार होने की बात तो सभी कर रहे थे लेकिन कहां से जाएं और कैसे जाएं इसके लिए भी प्रबंध नहीं था। लोग बस अंदर फंसे लोगों के जिंदा रहने की दुआएं कर रहे थे। अभी तक दो लोगों के लापता होने की सूचना है। ये दो वही लोग हैं जिनके परिजन बाहर हैं। जो अकेले रहते हैंए उनका अभी कोई पता नहीं है। घायल अरविंद का कहना है कि मलबे में कई लोग दबे हैं लेकिन आग पूरी तरह से नहीं बुझी है।
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उधर, कंपनी के प्रबंधकों को कहना है कि उनकी शिफ्ट 8:00 बजे से शुरू होती थी और नए कामगार अभी तक आए नहीं थे और पुराने चले गए थे। थोड़े बहुत लोग थे जो बाहर निकल चुके थे। उधर, एएसपी नरेंद्र सिंह ने एक और महिला कामगार सर्वेश शर्मा के लापता होने की बात कही है।
आग लगते ही कैलाश विहार खाली करवाया
जैसे ही आग लगी पुलिस प्रशासन ने कंपनी के साथ लगती कंपनियों और कैलाश विहार को खाली करा दिया। पार्षद तरसेम चौधरी और इंटक के बीबीएन अध्यक्ष गुरमेल चौधरी ने बताया कि कैलाश विहार में जाकर उन्होंने खुद लोगों को बाहर निकाला। इनमें भारी संख्या में महिला और छोटे बच्चे थे। इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।