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नालागढ़ नप अध्यक्ष ने छोड़ी कुर्सी, सौंपा इस्तीफा
सोलन, नालागढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Mar 2017 10:28 PM IST
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नालागढ़ में एसडीएम को त्यागपत्र सौंपते नप अध्यक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
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नप अध्यक्ष नालागढ़ ने बहुमत साबित करने के दो दिन पहले ही अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया। उपमंडल प्रशासन के माध्यम से डीसी सोलन को भेजे त्यागपत्र में निजी कारणों का हवाला दिया है। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अध्यक्ष को अपना बहुमत साबित करने के लिए प्रशासन ने 20 मार्च तक का समय दिया था। लिहाजा अब नए अध्यक्ष की ताजपोशी तय है। शनिवार को अध्यक्ष महेश गौतम अपने समर्थकों सहित एसडीएम नालागढ़ के पास पहुंचे जहां उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपा।
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नगर परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से विकास कार्य करवाए हैं और शहर के विकास में सहयोग देने के लिए वह पूरी तरह से वचनबद्ध है। उन्होंने नए चुने जाने वाले अध्यक्ष से भी उम्मीद जताई कि वह शहर के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे ताकि शहर का विकास हो सके। इस मौके पर पार्षद नीरू शर्मा, मनोनीत पार्षद अमित जैन, पूर्व पार्षद मोहम्मद रफी, एडवोकेट कर्मचंद गौतम, शिव द्विवेदी, बलराज चोपड़ा, राजेश रामा, इंद्रजीत सिंह, ताज मोहम्मद और असलम चौधरी आदि मौजूद रहे।
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कार्रवाई के लिए डीसी को भेजा इस्तीफा
एसडीएम नालागढ़ आशुतोष गर्ग ने कहा कि अध्यक्ष का त्यागपत्र मिल चुका है। इसे आगामी कार्रवाई के लिए जिलाधीश को प्रेषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आयोजित बैठक को रद्द कर दिया गया और नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए जल्द ही तिथि घोषित कर दी जाएगी।
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बागी पार्षदों का अध्यक्ष को
पद हटाने का मकसद पूरा
नालागढ़/सोलन। नालागढ़ नगर परिषद के अध्यक्ष ने अग्नि परीक्षा से पहले ही हार मान ली है। 20 मार्च को बहुमत साबित करने वाली तिथि से दो दिन पूर्व ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों का अध्यक्ष को उनकी कुर्सी से हटाने का मकसद भी पूरा हो गया। नालागढ़ परिषद के तहत नौ वार्ड आते हैं जिसमें से 5 पार्षदों ने नो कांफिडेंस मोशन अध्यक्ष के खिलाफ लाया है और 27 फरवरी को डीसी सोलन से भेंट की थी। पार्षदों में वार्ड दो से पार्षद धर्मेंद्र राणा, वार्ड तीन से पवन कुमार, वार्ड पांच से अल्का वर्मा, वार्ड सात की पार्षद और मौजूदा उपाध्यक्ष सरोज शर्मा तथा वार्ड नौ से पार्षद मनोज वर्मा शामिल हैं जो अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद शहर से ही गुल थे।
किस पार्षद की लगेगी लॉटरी
वर्ष 1951 की नालागढ़ परिषद में कई उथल-पुथल देखने को मिले हैं लेकिन यह पहली मर्तबा हुआ है कि एक अध्यक्ष के खिलाफ पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया है। इस सियासी गरमाहट की लोगों में खूब चर्चाएं रहीं। अब चर्चाओं का यह दौर शुरू हो गया है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों में से कोई एक पार्षद अध्यक्ष पद पर आसीन होगा।
यह है इस्तीफा देने की प्रक्रिया
नगर निकाय में इस्तीफा देने का क्रम अध्यक्ष उपाध्यक्ष और उपाध्यक्ष अध्यक्ष को त्यागपत्र सौंपता है। यदि कारणवश सीट खाली हो तो जिला प्रशासन को त्यागपत्र सौंपा जाता है। सीट खाली होने की सूरत में उस इस्तीफे को स्वीकार किया जाता है। नप नालागढ़ के अध्यक्ष महेश गौतम ने त्यागपत्र उपाध्यक्ष को सौंपना था लेकिन बागी हुए पार्षदों में उपाध्यक्ष भी शामिल हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद पांचों पार्षद शहर से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष द्वारा एसडीएम को त्यागपत्र सौंपा गया कारण जिलाधीश भी मौजूद नहीं थे। अब एसडीएम इस इस्तीफे को जिलाधीश को आगामी कार्रवाई के लिए भेजेंगे। ऐसे में अध्यक्ष का इस्तीफा स्वीकार्य होना तय बताया जाता है और नए अध्यक्ष की भी ताजपोशी जल्द ही होगी।
पूर्ण बहुमत नहीं, मिली जुली फिर चलेगी परिषद
नालागढ़ परिषद में अधिकांश समय कांग्रेस का दबदबा रहा है लेकिन इस बार नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के बावजूद भी भाजपा और आजाद पार्षदों के सहारे ही अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का चयन होगा। नए अध्यक्ष चुनने के बाद मात्र एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान ही कुछ पार्षदों को अध्यक्ष के कामकाज से संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव डीसी को सौंप दिया। अध्यक्ष के त्यागपत्र देने के बाद भी नए चुने जाने वाले अध्यक्ष को भी मिलाजुला समर्थन लेकर परिषद चलानी होगी क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों में दो कांग्रेस समर्थित, दो भाजपा समर्थित और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं।