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सोलन डिपो को रोज लग रही लाखों की चपत
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सोलन। कोरोना कर्फ्यू के बीच हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो को रोजाना लाखों की चपत लग रही है। इसके चलते निगम कर्मचारियों की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो रहा है। बीते साल भी लॉकडाउन लगने के बाद निगम को घाटा पड़ा था।
हालांकि, अनलॉक के बाद केवल सरकारी बसें ही दौड़ने से निगम को घाटे से उभरने की आस जगी थी। अब फिर कोरोना कर्फ्यू के लगने से निगम को घाटा होना शुरू हो गया है। अब निगम सरकार के आगामी आदेशों की राह ताक रहा है। आदेश मिलते ही सोलन डिपो का स्टाफ तैनात हो जाएगा और सेवाएं शुरू कर देगा।
जानकारी के अनुसार हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो के तहत 119 बसें हैं। ये बसें बाहरी राज्यों और लोकल रूटों पर दौड़ती हैं लेकिन जब से प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लगा है, बसों के पहिये थमे हुए हैं। आम दिनों में पथ परिवहन निगम को लगभग नौ से 10 लाख रुपये की आमदनी रोजाना होती थी।
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इनमें से कई ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले रूट अधिक मुनाफे वाले थे लेकिन कोरोना के बाद से इन रूटों पर पेट्रोल का खर्च निकालना मुश्किल हो गया और निगम ने मजबूरी में ये रूट बंद कर दिए। अब फिर प्रदेश सरकार ने कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकारी और निजी बसों पर रोक लगा दी है। प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लागू कर प्रदेश की सीमाओं को सील किया गया है।
बाहरी राज्यों से कम हुई थी आवाजाही
अप्रैल में दिल्ली, पंजाब समेत अन्य जगहों पर कोरोना वायरस के मामले बढ़ने का असर भी डिपो पर पड़ा था। अप्रैल में भी बाहरी राज्यों को जाने वाली कुछ बसों को सवारियां नहीं मिलने से बंद किया गया था। इनमें दिल्ली, लुधियाना और अमृतसर जाने वाली बसें थीं। हालांकि, इस दौरान कुछ बसें केवल चंडीगढ़ तक ही भेजी जा रही थीं।
बसों में सफर नहीं कर रहे अधिक लोग
कोरोना काल के बाद बसों में अधिक लोग सफर नहीं कर रहे थे। इस कारण परिवहन निगम की कई बसें बंद हो गई थीं। वर्तमान में लोगों की मांग पर भी बसों को निगम ने दौड़ाना शुरू किया था।
हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक शूगल सिंह ने बताया कि डिपो को रोजाना लगभग नौ से 10 लाख का घाटा सहना पड़ रहा है। हालांकि एहतियात के तौर पर बसों को बंद किया गया है ताकि कोरोना की चेन को तोड़ा जा सके। निगम कर्मी सरकार के आगामी आदेशों का पालन करने के लिए तैयार हैं।
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हालांकि, अनलॉक के बाद केवल सरकारी बसें ही दौड़ने से निगम को घाटे से उभरने की आस जगी थी। अब फिर कोरोना कर्फ्यू के लगने से निगम को घाटा होना शुरू हो गया है। अब निगम सरकार के आगामी आदेशों की राह ताक रहा है। आदेश मिलते ही सोलन डिपो का स्टाफ तैनात हो जाएगा और सेवाएं शुरू कर देगा।
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जानकारी के अनुसार हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो के तहत 119 बसें हैं। ये बसें बाहरी राज्यों और लोकल रूटों पर दौड़ती हैं लेकिन जब से प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लगा है, बसों के पहिये थमे हुए हैं। आम दिनों में पथ परिवहन निगम को लगभग नौ से 10 लाख रुपये की आमदनी रोजाना होती थी।
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इनमें से कई ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले रूट अधिक मुनाफे वाले थे लेकिन कोरोना के बाद से इन रूटों पर पेट्रोल का खर्च निकालना मुश्किल हो गया और निगम ने मजबूरी में ये रूट बंद कर दिए। अब फिर प्रदेश सरकार ने कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकारी और निजी बसों पर रोक लगा दी है। प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लागू कर प्रदेश की सीमाओं को सील किया गया है।
बाहरी राज्यों से कम हुई थी आवाजाही
अप्रैल में दिल्ली, पंजाब समेत अन्य जगहों पर कोरोना वायरस के मामले बढ़ने का असर भी डिपो पर पड़ा था। अप्रैल में भी बाहरी राज्यों को जाने वाली कुछ बसों को सवारियां नहीं मिलने से बंद किया गया था। इनमें दिल्ली, लुधियाना और अमृतसर जाने वाली बसें थीं। हालांकि, इस दौरान कुछ बसें केवल चंडीगढ़ तक ही भेजी जा रही थीं।
बसों में सफर नहीं कर रहे अधिक लोग
कोरोना काल के बाद बसों में अधिक लोग सफर नहीं कर रहे थे। इस कारण परिवहन निगम की कई बसें बंद हो गई थीं। वर्तमान में लोगों की मांग पर भी बसों को निगम ने दौड़ाना शुरू किया था।
हिमाचल पथ परिवहन निगम सोलन डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक शूगल सिंह ने बताया कि डिपो को रोजाना लगभग नौ से 10 लाख का घाटा सहना पड़ रहा है। हालांकि एहतियात के तौर पर बसों को बंद किया गया है ताकि कोरोना की चेन को तोड़ा जा सके। निगम कर्मी सरकार के आगामी आदेशों का पालन करने के लिए तैयार हैं।