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Solan News: पांच जिलाें के मशरूम उत्पादकों की उम्मीदों पर फिरा पानी
Sat, 17 Feb 2024 11:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 17 Feb 2024 11:28 PM IST
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बजट से संबंधित............
सोलन में उजड़े कंपोस्ट यूनिट के लिए बजट में नहीं घोषणा
खाद न मिलने से अधिकतर किसान छोड़ चुके मशरूम उगाना
छोटे और बड़े किसानों को इस बजट से यूनिट मिलने की थी आस
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सोलन और अन्य चार जिलों में मशरूम उत्पादन 60 फीसदी तक गिर गया है, मशरूम हब कहे जाने वाले जिले में पांच वर्ष पहले जहां सात-आठ हजार टन उत्पादन होता था, वहीं घटकर अब यह तीन हजार टन रह गया है। इसका प्रमुख कारण है अनुदान पर मशरूम खाद न मिलना और भूसे के दाम बढ़ाना रहा है। इस बजट से प्रदेश के किसान और मशरूम उत्पादकों को बढ़ी उम्मीद थी। जिसमें सोलन के चंबाघाट में फोरलेन से उजड़े कंपोस्ट यूनिट को दोबारा से स्थापित करने की आस थी। लेकिन बजट में इसको लेकर कोई भी घोषणा नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार सात साल पहले सोलन चंबाघाट स्थित कंपोस्ट यूनिट से किसानों को खाद मिल जाती थी। इस दौरान छोटे-बड़े उत्पादकों की संख्या भी काफी थी, लेकिन वर्ष 2017 में कालका-शिमला एनएच पर फोरलेन कार्य के दौरान उद्यान विभाग की 48 वर्ष पुरानी यूनिट इसकी जद में आ गई और खाद बनाने का काम रुक गया। किसान काफी समय से इस यूनिट को दोबारा स्थापित करने की मांग कर रहे थे। वहीं इस बजट से भी सरकार से कई उम्मीदें थीं। लेकिन इस बजट में भी मशरूम उत्पादकों को निराशा ही हुई। निजी यूनिट पर खाद से महंगे दामों पर मिलने से सैकड़ों छोटे किसानों ने मशरूम उगाना छोड़ दिया। हालांकि उद्यान विभाग की ओर से मशरूम कंपोस्ट इकाई को दोबारा स्थापित करने के लिए पिछले पांच वर्षो से जमीन तलाश की जा रही है। लेकिन इसके आगे बात अभी तक बढ़ नहीं सकी।
इनसेट
पांच जिलों के 2,746 किसान परेशान
सोलन और चार जिले सिरमौर, शिमला, किन्नौर और बिलासपुर के 2,746 उत्पादक परेशान हैं। वर्तमान में कुछ बड़े ग्रोवर निजी या फिर रामपुर के दत्तनगर खाद यूनिट से गुजारा कर रहे हैं। यहां से भी सभी उत्पादकों को खाद नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा नौणी विवि, डीएमआर से मशरूम तैयार करने का प्रशिक्षण लेने के बाद भी खाद न मिलने से कई ग्रोवर अपना काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
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सोलन में उजड़े कंपोस्ट यूनिट के लिए बजट में नहीं घोषणा
खाद न मिलने से अधिकतर किसान छोड़ चुके मशरूम उगाना
छोटे और बड़े किसानों को इस बजट से यूनिट मिलने की थी आस
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सोलन और अन्य चार जिलों में मशरूम उत्पादन 60 फीसदी तक गिर गया है, मशरूम हब कहे जाने वाले जिले में पांच वर्ष पहले जहां सात-आठ हजार टन उत्पादन होता था, वहीं घटकर अब यह तीन हजार टन रह गया है। इसका प्रमुख कारण है अनुदान पर मशरूम खाद न मिलना और भूसे के दाम बढ़ाना रहा है। इस बजट से प्रदेश के किसान और मशरूम उत्पादकों को बढ़ी उम्मीद थी। जिसमें सोलन के चंबाघाट में फोरलेन से उजड़े कंपोस्ट यूनिट को दोबारा से स्थापित करने की आस थी। लेकिन बजट में इसको लेकर कोई भी घोषणा नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार सात साल पहले सोलन चंबाघाट स्थित कंपोस्ट यूनिट से किसानों को खाद मिल जाती थी। इस दौरान छोटे-बड़े उत्पादकों की संख्या भी काफी थी, लेकिन वर्ष 2017 में कालका-शिमला एनएच पर फोरलेन कार्य के दौरान उद्यान विभाग की 48 वर्ष पुरानी यूनिट इसकी जद में आ गई और खाद बनाने का काम रुक गया। किसान काफी समय से इस यूनिट को दोबारा स्थापित करने की मांग कर रहे थे। वहीं इस बजट से भी सरकार से कई उम्मीदें थीं। लेकिन इस बजट में भी मशरूम उत्पादकों को निराशा ही हुई। निजी यूनिट पर खाद से महंगे दामों पर मिलने से सैकड़ों छोटे किसानों ने मशरूम उगाना छोड़ दिया। हालांकि उद्यान विभाग की ओर से मशरूम कंपोस्ट इकाई को दोबारा स्थापित करने के लिए पिछले पांच वर्षो से जमीन तलाश की जा रही है। लेकिन इसके आगे बात अभी तक बढ़ नहीं सकी।
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पांच जिलों के 2,746 किसान परेशान
सोलन और चार जिले सिरमौर, शिमला, किन्नौर और बिलासपुर के 2,746 उत्पादक परेशान हैं। वर्तमान में कुछ बड़े ग्रोवर निजी या फिर रामपुर के दत्तनगर खाद यूनिट से गुजारा कर रहे हैं। यहां से भी सभी उत्पादकों को खाद नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा नौणी विवि, डीएमआर से मशरूम तैयार करने का प्रशिक्षण लेने के बाद भी खाद न मिलने से कई ग्रोवर अपना काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
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