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Solan News: एकल शिक्षक के प्रयास से बदला सरकारी स्कूल का मंजर, 2 से 25 पहुंची छात्रों की संख्या
Sat, 05 Sep 2026 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 05 Sep 2026 12:46 AM IST
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सुरेंद्र सिंह, स्कूल प्रभारी, राजकीय प्राथमिक पाठशाला घरोटी, नालागढ़ सोलन।
शिक्षक सुरेंद्र सिंह के नवाचार और समर्पण ने लिखी बदलाव की नई इबारत
2024 में घरोटी प्राथमिक पाठशाला थी बंद होने के कगार पर, सिर्फ थे दो बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। अगर इरादे बुलंद हों और काम करने का जुनून हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सोलन जिले के शिक्षा खंड नालागढ़ के तहत आने वाले छोटे से गांव घरोटी से सामने आया है। यहां स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला घरोटी जो कभी बच्चों की कमी के चलते बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी थी, आज एक आदर्श शिक्षण केंद्र बनकर उभर रही है। इस शानदार कायाकल्प का श्रेय विद्यालय के प्रभारी एवं एकल शिक्षक सुरेंद्र सिंह को जाता है।
वर्ष 1996 में स्थापित हुए इस विद्यालय की स्थिति मार्च 2024 तक काफी दयनीय हो चुकी थी और यहां महज 2 बच्चे ही पढ़ाई कर रहे थे। स्कूल लगभग बंद होने के मुहाने पर था। 13 मार्च 2024 को जब सुरेंद्र सिंह ने विद्यालय के प्रभारी के रूप में कार्यभार संभाला, तो उन्होंने हार मानने के बजाय इसे एक चुनौती के रूप में लिया। शिक्षक सुरेंद्र सिंह ने पढ़ाई को दिलचस्प बनाने के लिए कई नवाचारी और लर्निंग बाय प्ले के तरीके अपनाए। उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई का स्तर सुधारा, बल्कि बच्चों की मूलभूत सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा।
शिक्षण की बेहतरीन गुणवत्ता और शिक्षक के समर्पण को देखकर ग्रामीण बेहद प्रभावित हुए। देखते ही देखते अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूल पर बढ़ा और उन्होंने अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों से हटाकर घरोटी पाठशाला में दाखिल करवाना शुरू कर दिया। आज विद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़कर 25 हो चुकी है। एकल शिक्षक विद्यालय होने के कारण सुरेंद्र सिंह पर न सिर्फ पढ़ाने की, बल्कि प्रशासनिक काम संभालने की भी जिम्मेदारी है। स्कूल में पार्ट-टाइम मल्टी-टास्क वर्कर या वाटर कैरियर जैसे सहायक कर्मचारियों का अभाव है, लेकिन इन तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
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2024 में घरोटी प्राथमिक पाठशाला थी बंद होने के कगार पर, सिर्फ थे दो बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। अगर इरादे बुलंद हों और काम करने का जुनून हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सोलन जिले के शिक्षा खंड नालागढ़ के तहत आने वाले छोटे से गांव घरोटी से सामने आया है। यहां स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला घरोटी जो कभी बच्चों की कमी के चलते बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी थी, आज एक आदर्श शिक्षण केंद्र बनकर उभर रही है। इस शानदार कायाकल्प का श्रेय विद्यालय के प्रभारी एवं एकल शिक्षक सुरेंद्र सिंह को जाता है।
वर्ष 1996 में स्थापित हुए इस विद्यालय की स्थिति मार्च 2024 तक काफी दयनीय हो चुकी थी और यहां महज 2 बच्चे ही पढ़ाई कर रहे थे। स्कूल लगभग बंद होने के मुहाने पर था। 13 मार्च 2024 को जब सुरेंद्र सिंह ने विद्यालय के प्रभारी के रूप में कार्यभार संभाला, तो उन्होंने हार मानने के बजाय इसे एक चुनौती के रूप में लिया। शिक्षक सुरेंद्र सिंह ने पढ़ाई को दिलचस्प बनाने के लिए कई नवाचारी और लर्निंग बाय प्ले के तरीके अपनाए। उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई का स्तर सुधारा, बल्कि बच्चों की मूलभूत सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा।
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शिक्षण की बेहतरीन गुणवत्ता और शिक्षक के समर्पण को देखकर ग्रामीण बेहद प्रभावित हुए। देखते ही देखते अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूल पर बढ़ा और उन्होंने अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों से हटाकर घरोटी पाठशाला में दाखिल करवाना शुरू कर दिया। आज विद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़कर 25 हो चुकी है। एकल शिक्षक विद्यालय होने के कारण सुरेंद्र सिंह पर न सिर्फ पढ़ाने की, बल्कि प्रशासनिक काम संभालने की भी जिम्मेदारी है। स्कूल में पार्ट-टाइम मल्टी-टास्क वर्कर या वाटर कैरियर जैसे सहायक कर्मचारियों का अभाव है, लेकिन इन तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
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