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Solan News: जिले के स्कूलों में मिड-डे मील में परोसा जाएगा फोर्टिफाइड चावल
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सोलन में एमडीएम की समीक्षा बैठक में भाग लेते शिक्षा विभाग के अधिकारी व अन्य। संवाद
एडीसी सोलन ने बैठक में जारी किए निर्देश
मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार और मिड-डे-मील का रिकॉर्ड रखना होगा अलग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत सुधारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। अब मिड-डे-मील (एमडीएम) के तहत विद्यार्थियों को केवल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से निर्धारित फोर्टिफाइड चावल ही परोसे जाएंगे। मिड-डे मील चेयरमैन एडीसी सोलन की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी स्कूलों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। जिला नोडल अधिकारी एमडीएम राजकुमार पराशर ने बताया कि फोर्टिफाइड चावल सामान्य चावल की तुलना में अधिक पोषक होते हैं। इसमें आयरन, विटामिन बी-12 और फॉलिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। सरकार का लक्ष्य इन पोषक तत्वों के माध्यम से विद्यार्थियों में कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करना है। विभाग के निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई है कि कई स्कूल मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना और मिड-डे-मील का रिकॉर्ड एक साथ मिला रहे हैं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विभाग ने निर्देश दिए हैं कि दोनों योजनाओं के खर्चे और स्टॉक का रिकॉर्ड अलग-अलग संधारित किया जाए। मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार के तहत दी जाने वाली अतिरिक्त खाद्य सामग्री का स्पष्ट ब्योरा हो।
बुधवार को फल या अंडा देना अनिवार्य
बैठक में बच्चों के आहार की गुणवत्ता पर जोर देते हुए यह भी स्पष्ट किया गया कि सप्ताह में एक दिन यानी बुधवार को सभी बच्चों को फल या अंडा देना अनिवार्य होगा। यदि बुधवार को सरकारी अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस पर बच्चों को यह विशेष आहार प्रदान करना होगा।
कोट
विद्यार्थियों को संतुलित आहार प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। फोर्टिफाइड चावल की न्यूट्रीशनल वैल्यू अधिक है, जो बच्चों के शारीरिक विकास में सहायक होगी। सभी स्कूलों को एमडीएम के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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-मोहिंद्र चंद पिरटा, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा
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मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार और मिड-डे-मील का रिकॉर्ड रखना होगा अलग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत सुधारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। अब मिड-डे-मील (एमडीएम) के तहत विद्यार्थियों को केवल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से निर्धारित फोर्टिफाइड चावल ही परोसे जाएंगे। मिड-डे मील चेयरमैन एडीसी सोलन की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी स्कूलों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। जिला नोडल अधिकारी एमडीएम राजकुमार पराशर ने बताया कि फोर्टिफाइड चावल सामान्य चावल की तुलना में अधिक पोषक होते हैं। इसमें आयरन, विटामिन बी-12 और फॉलिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। सरकार का लक्ष्य इन पोषक तत्वों के माध्यम से विद्यार्थियों में कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करना है। विभाग के निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई है कि कई स्कूल मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना और मिड-डे-मील का रिकॉर्ड एक साथ मिला रहे हैं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विभाग ने निर्देश दिए हैं कि दोनों योजनाओं के खर्चे और स्टॉक का रिकॉर्ड अलग-अलग संधारित किया जाए। मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार के तहत दी जाने वाली अतिरिक्त खाद्य सामग्री का स्पष्ट ब्योरा हो।
बुधवार को फल या अंडा देना अनिवार्य
बैठक में बच्चों के आहार की गुणवत्ता पर जोर देते हुए यह भी स्पष्ट किया गया कि सप्ताह में एक दिन यानी बुधवार को सभी बच्चों को फल या अंडा देना अनिवार्य होगा। यदि बुधवार को सरकारी अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस पर बच्चों को यह विशेष आहार प्रदान करना होगा।
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कोट
विद्यार्थियों को संतुलित आहार प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। फोर्टिफाइड चावल की न्यूट्रीशनल वैल्यू अधिक है, जो बच्चों के शारीरिक विकास में सहायक होगी। सभी स्कूलों को एमडीएम के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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-मोहिंद्र चंद पिरटा, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा