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Solan News: सोलन में सूखे की मार, रबी की फसलें मुरझाईं
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नौणी विवि से खरीदे एक लाख पौधों पर मंडराया खतरा, मटर और लहसुन की ग्रोथ थमी
पीले पड़ने लगे गेहूं के खेत
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन में मौसम की बेरुखी ने किसान-बागवानों की रातों की नींद उड़ा दी है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण जहां रबी की फसलें तबाही की कगार पर हैं। वहीं बागवानी क्षेत्र को भी भारी झटका लगा है। नौणी विश्वविद्यालय और केवीके से खरीदे गए लाखों रुपये के फलदार पौधे बगीचों में लगने के बजाय मिट्टी के ढेरों में दबे पड़े हैं। बागवानों को डर है कि यदि बिना नमी के रोपाई की गई, तो पौधे सूख जाएंगे। नौणी विश्वविद्यालय ने दिसंबर माह से अब तक करीब एक लाख से अधिक फलदार पौधों की बिक्री की है। इसमें सेब, नाशपाती, कीवी, प्लम और खुमानी की उन्नत किस्में शामिल हैं। बागवानों ने हजारों-लाखों रुपये खर्च कर ये पौधे खरीदे तो थे, लेकिन आसमान से बरसती आग और खेतों में नमी की कमी के कारण रोपाई का कार्य पूरी तरह लटक गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पौधों को लगाने के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होना अनिवार्य है, अन्यथा निवेश बेकार जा सकता है। बारिश की कमी का सबसे बुरा असर जिला की मुख्य नकदी फसलों पर पड़ रहा है। इसमें मटर व लहसुन में नमी न होने से पौधों की ग्रोथ रुक गई है। गेहूं की इस प्रमुख फसल भी पीली पड़ने लगी हैं। साग-सब्जियों का उत्पादन घटने से किसानों को आर्थिक चपत लग रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी एक सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं होती है, तो फसलों का नुकसान 50 से 70 फीसदी तक बढ़ सकता है। सूखे के कारण फसलों में कीटों का हमला होने का खतरा भी बढ़ गया है।
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पीले पड़ने लगे गेहूं के खेत
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन में मौसम की बेरुखी ने किसान-बागवानों की रातों की नींद उड़ा दी है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण जहां रबी की फसलें तबाही की कगार पर हैं। वहीं बागवानी क्षेत्र को भी भारी झटका लगा है। नौणी विश्वविद्यालय और केवीके से खरीदे गए लाखों रुपये के फलदार पौधे बगीचों में लगने के बजाय मिट्टी के ढेरों में दबे पड़े हैं। बागवानों को डर है कि यदि बिना नमी के रोपाई की गई, तो पौधे सूख जाएंगे। नौणी विश्वविद्यालय ने दिसंबर माह से अब तक करीब एक लाख से अधिक फलदार पौधों की बिक्री की है। इसमें सेब, नाशपाती, कीवी, प्लम और खुमानी की उन्नत किस्में शामिल हैं। बागवानों ने हजारों-लाखों रुपये खर्च कर ये पौधे खरीदे तो थे, लेकिन आसमान से बरसती आग और खेतों में नमी की कमी के कारण रोपाई का कार्य पूरी तरह लटक गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पौधों को लगाने के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होना अनिवार्य है, अन्यथा निवेश बेकार जा सकता है। बारिश की कमी का सबसे बुरा असर जिला की मुख्य नकदी फसलों पर पड़ रहा है। इसमें मटर व लहसुन में नमी न होने से पौधों की ग्रोथ रुक गई है। गेहूं की इस प्रमुख फसल भी पीली पड़ने लगी हैं। साग-सब्जियों का उत्पादन घटने से किसानों को आर्थिक चपत लग रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी एक सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं होती है, तो फसलों का नुकसान 50 से 70 फीसदी तक बढ़ सकता है। सूखे के कारण फसलों में कीटों का हमला होने का खतरा भी बढ़ गया है।