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मुझे संसारिक चीजें अच्छी नहीं लगती, छात्र की उतर पुस्तिका में पहेली बनी यह लाइन

Fri, 22 Dec 2017 09:54 PM IST
Updated Fri, 22 Dec 2017 09:54 PM IST
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मुझे संसारिक चीजें अच्छी नहीं लगती, छात्र की उतरपुस्तिका में पहेली बनी यह लाइन
दसवीं के छात्र ने मरने से पहले 60 प्रतिशत पेपर किया हल - फोटो : अमर उजाला

राकेश शर्मा

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सोलन।
मुझे सांसारिक चीजें अच्छी नहीं लगती, जिंदगी में बोर हो गया हूं, इसलिए अब जाना चाहता हूं। मम्मी-पापा का आदर करता हूं। मम्मी-पापा और अनु मैम मुझे माफ कर दें। महज चंद लाइनों का यह वो संदेश है जो दसवीं का छात्र अपने पीछे छोड़ गया है।

उत्तर पुस्तिका में लिखी ये लाइनें अब परिजन, पुलिस और खुद स्कूल के लिए भी पहेली बन गई है। साथ ही सवाल भी उठने लगा है कि परीक्षा देते वक्त आखिर किसी छात्र को मरने का ख्याल कैसे आ गया। स्कूल प्रबंधन छात्र को अव्वल होने का प्रमाण मौत के बाद से लगातार दे रहा है। छात्र कितना होशियार था इसका अंदाजा उसकी उत्तर पुस्तिका से भी झलक रहा है। महज एक घंटे की परीक्षा में छात्र ने 60 प्रतिशत पेपर हल कर दिया था। यानी मरने से पहले छात्र पूरी दिलचस्पी के साथ परीक्षा दे रहा था। फिर अचानक उसका मूड बदला और उलटी का बहाना बनाकर परीक्षा भवन से निकला तो फिर कभी वापस नहीं लौटा।
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प्रबंधन ने पूरे स्कूल भवन में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इसमें छात्र अकेला परीक्षा भवन से निकलकर हॉस्टल की तरफ जाता नजर आ रहा है। हॉस्टल के कमरे में पहुंचकर उसने बिजली बंद की। जब दोबारा बिजली जली तो छात्र फंदे से लटका हुआ था। अब सवाल स्कूल प्रबंधन से भी बनता है कि परीक्षा भवन से किसी छात्र को अकेले कैसे बाहर जाने दिया गया। छात्र तबीयत खराब होने की बात कर रहा था तो स्कूल प्रबंधन ने इसकी जांच क्यों नहीं की। साथ ही सीसीटीवी में जब वो परीक्षा छोड़कर हॉस्टल की तरफ जाता नजर आया तो आनन-फानन में कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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इस सबसे हटकर सुसाइड नोट की शब्दावली है जिसमें बोर्डिंग स्कूल में रहने वाला बच्चा जिसकी जिंदगी अभी अच्छे से शुरू भी नहीं हुई वो सांसारिक चीजें अच्छी न लगने की बात लिख गया। बहरहाल, छात्र की मौत हो चुकी है। हालात का जायजा और साक्ष्य पुलिस जुटा रही है। लेकिन भविष्य में ऐसी घटना न हो इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। छात्र की मौत से अब बोर्डिंग स्कूल के शिक्षा तंत्र में दबाव की समीक्षा करने की भी जरूरत महसूस हो रही है।

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