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साइड स्टोरी हिन्नर हादसा

Tue, 14 Aug 2018 11:36 PM IST
Updated Tue, 14 Aug 2018 11:36 PM IST
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गहरी नींद सोए परिवार को नहीं मिला पलक झपकने का मौका
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कमरे में भर गया मलबा, कुंडी लगी होने की वजह से नहीं मिली किसी को खबर
हादसे के बाद घर पहुंची दादी के शोर मचाने पर एकत्र हुए ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
कंडाघाट (सोलन)। हिन्नर पंचायत में काल का ग्रास बने एक ही परिवार के चारों सदस्यों की चिताएं सोमवार को एक साथ जलीं। चाकल गांव में अश्वनी खड्ड किनारे चारों को अंतिम विदाई देने के लिए समूचे ग्रामीण उमड़ आए। पल भर में हादसे ने चारों में से किसी को पलक झपकने का मौका तक नहीं दिया। गहरी नींच में दो बच्चों के साथ सोए दंपती हमेशा के लिए गहरी नींद में चले गए। घर की पिछली दीवार तोड़कर भारी-भरकम पत्थर और मलबा चारों को रौंदते हुए पूरे कमरे में फैल गया। कुंडी अंदर से बंद होने की वजह से मलबा कमरे में भरता रहा। सुबह करीब पौने चार बजे हुई इस घटना का पता करीब साढ़े छह बजे उस समय लगा। जब दादी कहीं बाहर से घर पहुंची, बार-बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद जब किसी ने नहीं खोला तो उसने पड़ोसियों की मदद मांगी। पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर कमरे में भरा मलबा बाहर बरामदे तक फैल गया। मंजर देखकर दादी लग्गया देवी बेहोश हो गई। ग्रामीण मलबे को साफ करने में जुट गए। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने दंपति को सबसे पहले मलबे से बाहर निकाला और उसके बच्चों को निकाला। आईआरडीपी परिवार से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र के परिवार की त्रासदी पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था। देवेंद्र्र के माता-पिता व एक बच्ची राधिका हादसे के समय घर पर नहीं थे। वे अपनी नानी के घर पट्टाबरौरी गए हुए थे। घटना के बाद उसकी बुआ उसे घर लेकर आई। राधिका को पता नहीं था कि बारिश में उसका सब कुछ बह चुका है। उसने कभी सोचा नहीं होगा कि जो दो भाई-बहन उसके साथ खेलते थे, वो अब सदा के लिए दूर हो चुके हैं। राधिका की दादी लग्गया देवी घटना की खबर मिलते ही बेहोश हो गई। बेसुध हो चुकी लग्ग्या को ग्रामीण होश में लाने का काम करते रहे। हादसे में देविंद्र उसकी पत्नी मीना व बच्चों आदित्य (6) व हर्षिता (3) साल की मौत हुई है।


हादसे की खबर मिलते ही मौके पर पहुंचा प्रशासन : एसडीएम
एसडीएम संजीव धीमान ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन का दल मौके पर रवाना हो गया था। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवार के लोगों को 30 हजार रुपये की फौरी मदद दी गई है। उन्होंने बताया कि हादसा भारी-भरकम मलबा और चट्टानें खिसकने की वजह से हुआ जिसमें एक कमरे में सो रहे परिवार की मौत हो गई है।
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