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Solan News: गाजर घास फूल आने से पहले उखाड़ें
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खुंब अनुसंधान निदेशालय में जागरूकता सप्ताह संपन्न
त्वचा में जलन और एलर्जी का कारण बनती है गाजर घास
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। खुंब अनुसंधान निदेशालय में आयोजित गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मियों ने निदेशालय सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों को गाजर घास से होने वाले गंभीर नुकसान और बीमारियों के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को सलाह दी गई कि गाजर घास से स्थायी छुटकारा पाने के लिए पौधे में फूल आने से पहले ही इसे उखाड़कर नष्ट कर दें। विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जड़ों वाली गाजर घास सड़क किनारे, रेलवे ट्रैक, घास के मैदानों और मध्य पहाड़ियों के गैर-कृषि योग्य क्षेत्रों में तेजी से फैलती है। इसके सफेद फूलों में मौजूद परागकण (पोलन ग्रेंस) हवा में फैलकर लोगों में एलर्जी और त्वचा की जलन (स्किन इरिटेशन) जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
सप्ताह के समापन पर कार्यवाहक निदेशक डॉ. बीएल अत्री ने कर्मचारियों व अधिकारियों से अपील की कि वे संस्थान परिसर, आवासीय कॉलोनी और निकटवर्ती गांवों में जाकर लगातार जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि गाजर घास के खात्मे से न केवल इंसानों और मवेशियों के स्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि फसलों की पैदावार बढ़ेगी और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बनी रहेगी।
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त्वचा में जलन और एलर्जी का कारण बनती है गाजर घास
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। खुंब अनुसंधान निदेशालय में आयोजित गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मियों ने निदेशालय सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों को गाजर घास से होने वाले गंभीर नुकसान और बीमारियों के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को सलाह दी गई कि गाजर घास से स्थायी छुटकारा पाने के लिए पौधे में फूल आने से पहले ही इसे उखाड़कर नष्ट कर दें। विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जड़ों वाली गाजर घास सड़क किनारे, रेलवे ट्रैक, घास के मैदानों और मध्य पहाड़ियों के गैर-कृषि योग्य क्षेत्रों में तेजी से फैलती है। इसके सफेद फूलों में मौजूद परागकण (पोलन ग्रेंस) हवा में फैलकर लोगों में एलर्जी और त्वचा की जलन (स्किन इरिटेशन) जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
सप्ताह के समापन पर कार्यवाहक निदेशक डॉ. बीएल अत्री ने कर्मचारियों व अधिकारियों से अपील की कि वे संस्थान परिसर, आवासीय कॉलोनी और निकटवर्ती गांवों में जाकर लगातार जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि गाजर घास के खात्मे से न केवल इंसानों और मवेशियों के स्वास्थ्य की रक्षा होगी, बल्कि फसलों की पैदावार बढ़ेगी और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बनी रहेगी।
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