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लद गए पुरानी योजनाओं के दिन, शहर की प्यास बुझाने में नाकाफी पेयजल

Fri, 26 Apr 2019 11:31 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Apr 2019 11:31 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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सोलन। शहर में हजारों की आबादी के गले तर कर रही आईपीएच की बेहद पुरानी योजना के दिन लद चुके हैं। गर्मियों में पानी की कमी हो जाती है तो बरसात में गाद से हफ्तों तक लोगों को प्यासे रहना पड़ता है। आलम यह है कि सोलन शहर में कभी तीसरे दिन तो कभी हफ्ते में एक बार पानी की सप्लाई आती है। लोग पानी को घरों की छतों पर लगी टंकियों में सुरक्षित रखते हैं और इस पानी का इस्तेमाल पीने व अन्य जरूरतों में करते हैं। नगर परिषद सोलन शहर में पेयजल सप्लाई का कार्य कर रही है।

यहां रोजाना करीब बीस लाख गैलन पानी की जरूरत पड़ती है। यह जरूरत पिछले कुछ सालों से लगातार बढ़ रही है। सोलन शहर के लिए बनाई गिरि और अश्वनी खड्ड पेयजल योजनाएं पुरानी हो चुकी हैं। इन योजनाओं से शहर के लोगों की प्यास बुझाना मुमकिन नहीं है।
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योजनाओं की बाट जोह रहे सोलनवासियों के लिए पानी भी चुनावी मुद्दा बन गया है। राजनीतिक दल भरपूर पानी के नाम पर वोट मांगते हैं लेकिन जीतने के बाद शहर को उसी हाल पर छोड़ दिया जाता है। सोलन शहर में पानी की विकराल होती समस्या को समाधान राजनीतिक दल नहीं ढूंढ पाए हैं।
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आलम यह है कि बार-बार चर्चा को आकलन तैयार करते रहने के बावजूद पानी की सप्लाई के लिए बने दो मुख्य टैंकों को ढकने का प्रबंध भी नहीं हो पाया है। दोनों टैंक खुले हैैं और इनमें कोई भी कुछ भी मिला सकता है। बहरहाल, लोकसभा चुनाव में पानी का मुद्दा एक बार फिर गर्माने लगा है।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पहली ही जनसभा में इसका राग छेड़ चुके हैं। उन्होंने भरे मंच से एलान किया है कि सोलन शहर को पानी उनकी देन है। इसके आगे के बंदोबस्त क्यों नहीं हो पाए और आबादी बढ़ने के साथ योजनाओं का विस्तार क्यों नहीं हुआ, यह सवाल लोगों के जहन में उठ रहे हैं।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सोलन शहरशहर की पंजीकृत आबादी करीब 40 हजार थी। इसके लिए आईपीएच विभाग ने स्टोरेज टैंकों का निर्माण करवाया था जिसकी क्षमता 10 हजार से 37 लाख लीटर है। सोलन मंडल में आईपीएच विभाग की 374 स्कीमों पर निर्भर है।

इसमें से 318 स्कीमें पेयजल और 56 स्कीमें सिंचाई की हैं। कुछ स्कीमें हांफ जाती हैं या सूखने की कगार पर पहुंच जाती हैं। अकसर लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ जाती हैं। सोलन मंडल में 450 पानी के स्टोरेज टैंक हैं। शहर में रोजाना 18 से 20 लाख गैलन पानी की जरूरत रहती है जो गर्मियों में घटकर 8 से 10 लाख गैलन ही रह जाती है।

आवश्यकता के अनुसार बढ़ाई जाएगी क्षमता : परिहार
भाजपा मंडल अध्यक्ष रविंद्र परिहार ने बताया कि शहर में जहां-जहां आवश्यकता है, वहां पर पेयजल टैंकों की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं ताकि लोगों को पानी की समस्या से निजात मिल सके।

पेयजल टैंकों की क्षमता काफी : शिव कुमार
कांग्रेस जिला अध्यक्ष शिव कुमार ने कहा कि शहर में पेयजल टैंकों की क्षमता जनसंख्या के हिसाब से ठीक है। कई टैंकों की क्षमता लाखों लीटर है जिससे लोगों को पानी दियसा जा रहा है। शहर की जनसंख्या के हिसाब से काफी है।


20 वर्षों के लिए बनती है पेयजल योजना : सूद
आईपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता सुमित सूद ने बताया कि विभाग किसी नई स्कीम पर कार्य नहीं कर रहा है। पेयजल टैंकों की क्षमता अगले 20 वर्षों की जनसंख्या के आधार पर बनाई है। जनसंख्या बढ़ने के अनुमान पर टैंकों की क्षमता रखी जाती है। सोलन मंडल में 10 हजार से लेकर 37 लाख लीटर की क्षमता वाले टैंक हैं।
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