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जन्म से वृद्धावस्था तक शोषण का शिकार होती हैं महिलाएं : कमला नेगी
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नाहन में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला के दौरान मौजूद जिला प्रशिक्षक। संवाद
- फोटो : NAHAN
नाहन (सिरमौर)। आशा कार्यकर्ताओं के नाहन में प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन महिलाओं पर हिंसा के बारे में बताया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सिरमौर की ओर से आयोजित कार्यशाला में स्वास्थ्य शिक्षिका और जिला प्रशिक्षक कमला नेगी ने महिला के पूरे जीवन चक्र के चरणों में होने वाली हिंसा के स्वरूपों की जानकारी दी।
नेगी ने कहा कि महिला पूरी जिंदगी अपने खिलाफ हिंसा से जूझती है। वह शैशव, बचपन, व्यस्क और वृद्धावस्था में अलग-अलग तरह से हिंसा की शिकार होती है। उन्होंने कहा कि शैशव और बचपन की अवस्था में नवजात लड़की को स्तनपान से वंचित करना, अपर्याप्त और खराब भोजन देना, उसकी देखभाल न करना, बीमार पड़ने पर इलाज न करना, कई बार बच्ची की हत्या तक कर देना.., यह हिंसा का रूप है।
व्यस्क अवस्था में मौखिक उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा, बात-बात पर कमियां निकालना, महिलाओं को अपमानजनक कार्यों के लिए मजबूर करना, लड़की को जन्म देने के लिए दोषी ठहराना, निंदा करना, जबरन गर्भपात, तेजाब से हमला, स्वास्थ्य देखभाल से वंचित, बलात्कार और वैवाहिक बलात्कार करना जैसे कार्य महिला हिंसा में आते हैं।
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कार्यशाला में जिला प्रशिक्षक कुसुम शर्मा ने महिलाओं के साथ वृद्धावस्था में होने वाली हिंसा के बारे में जानकारी दी। कुसुम शर्मा ने कहा कि वृद्धावस्था में महिलाएं कई तरह से हिंसा का शिकार होती हैं। जैसे विधवापन का लांछन, बच्चों द्वारा उपेक्षा, उचित देखभाल न करना, पोषण से वंचित रखना, वित्तीय संसाधनों में कमी, परिवार से बहिष्कृत कर देना शामिल है।
कार्यशाला में आशा कार्यकर्ताओं से ऐसे मामलों में किस तरह से कार्यवाही करनी है इसकी भी विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में नाहन, राजपुरा, धगेड़ा, पच्छाद, शिलाई व राजगढ़ खंड की 36 आशा कार्यकर्ता भाग ले रही हैं।
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नेगी ने कहा कि महिला पूरी जिंदगी अपने खिलाफ हिंसा से जूझती है। वह शैशव, बचपन, व्यस्क और वृद्धावस्था में अलग-अलग तरह से हिंसा की शिकार होती है। उन्होंने कहा कि शैशव और बचपन की अवस्था में नवजात लड़की को स्तनपान से वंचित करना, अपर्याप्त और खराब भोजन देना, उसकी देखभाल न करना, बीमार पड़ने पर इलाज न करना, कई बार बच्ची की हत्या तक कर देना.., यह हिंसा का रूप है।
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व्यस्क अवस्था में मौखिक उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा, बात-बात पर कमियां निकालना, महिलाओं को अपमानजनक कार्यों के लिए मजबूर करना, लड़की को जन्म देने के लिए दोषी ठहराना, निंदा करना, जबरन गर्भपात, तेजाब से हमला, स्वास्थ्य देखभाल से वंचित, बलात्कार और वैवाहिक बलात्कार करना जैसे कार्य महिला हिंसा में आते हैं।
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कार्यशाला में जिला प्रशिक्षक कुसुम शर्मा ने महिलाओं के साथ वृद्धावस्था में होने वाली हिंसा के बारे में जानकारी दी। कुसुम शर्मा ने कहा कि वृद्धावस्था में महिलाएं कई तरह से हिंसा का शिकार होती हैं। जैसे विधवापन का लांछन, बच्चों द्वारा उपेक्षा, उचित देखभाल न करना, पोषण से वंचित रखना, वित्तीय संसाधनों में कमी, परिवार से बहिष्कृत कर देना शामिल है।
कार्यशाला में आशा कार्यकर्ताओं से ऐसे मामलों में किस तरह से कार्यवाही करनी है इसकी भी विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में नाहन, राजपुरा, धगेड़ा, पच्छाद, शिलाई व राजगढ़ खंड की 36 आशा कार्यकर्ता भाग ले रही हैं।