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Sirmour News: मंडेरवा गांव में पिछले करीब एक माह से पेयजल संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालाअंब (सिरमौर)। नाहन विकास खंड की ग्राम पंचायत बिक्रमबाग के अंतर्गत मंडेरवा गांव में पिछले करीब एक माह से पेयजल संकट बना हुआ है। पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए मारकंडा नदी से पानी लाना पड़ रहा है। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने क्षेत्र में बोरवेल मशीन भेजकर नया बोर करवाया और हैंडपंप स्थापित किया है।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि नया बोर रिहायशी क्षेत्र से करीब आधा से एक किलोमीटर की दूरी पर किया गया है। ऐसे में वहां से पानी ढोकर घरों तक पहुंचाना उनके लिए मुश्किल है। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप लगाने से तत्काल कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इससे गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
ग्रामीणों सोमनाथ, मंजीत कश्यप, सुरेश कुमार, प्रदीप कुमार, बलबीर सिंह, बलजीत और रामकुमार ने बताया कि मंडेरवा गांव में करीब 70 घर हैं और आबादी लगभग 300 है। इतनी आबादी के लिए लगाया गया हैंडपंप पर्याप्त नहीं है।
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उन्होंने कहा कि गांव की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी है। ग्रामीणों ने कहा कि वे इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर दोबारा जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को नदी या दूर स्थित हैंडपंप से पानी लाने के लिए मजबूर न होना पड़े।
इस संबंध में जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता रोशन कुमार ने बताया कि जहां भू-जल स्तर ठीक था, वहीं बोर किया गया है। उन्होंने बताया कि मंडेरवा गांव की पेयजल आपूर्ति आमवाला पेयजल आपूर्ति योजना से भी बहाल कर दी गई है। इसके अलावा अतिरिक्त पेयजल जरूरत को ग्रामीण हैंडपंप के माध्यम से भी पूरा कर सकते हैं।-- -- --
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कालाअंब (सिरमौर)। नाहन विकास खंड की ग्राम पंचायत बिक्रमबाग के अंतर्गत मंडेरवा गांव में पिछले करीब एक माह से पेयजल संकट बना हुआ है। पानी की पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए मारकंडा नदी से पानी लाना पड़ रहा है। समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने क्षेत्र में बोरवेल मशीन भेजकर नया बोर करवाया और हैंडपंप स्थापित किया है।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि नया बोर रिहायशी क्षेत्र से करीब आधा से एक किलोमीटर की दूरी पर किया गया है। ऐसे में वहां से पानी ढोकर घरों तक पहुंचाना उनके लिए मुश्किल है। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप लगाने से तत्काल कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इससे गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
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ग्रामीणों सोमनाथ, मंजीत कश्यप, सुरेश कुमार, प्रदीप कुमार, बलबीर सिंह, बलजीत और रामकुमार ने बताया कि मंडेरवा गांव में करीब 70 घर हैं और आबादी लगभग 300 है। इतनी आबादी के लिए लगाया गया हैंडपंप पर्याप्त नहीं है।
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उन्होंने कहा कि गांव की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाना जरूरी है। ग्रामीणों ने कहा कि वे इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर दोबारा जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को नदी या दूर स्थित हैंडपंप से पानी लाने के लिए मजबूर न होना पड़े।
इस संबंध में जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता रोशन कुमार ने बताया कि जहां भू-जल स्तर ठीक था, वहीं बोर किया गया है। उन्होंने बताया कि मंडेरवा गांव की पेयजल आपूर्ति आमवाला पेयजल आपूर्ति योजना से भी बहाल कर दी गई है। इसके अलावा अतिरिक्त पेयजल जरूरत को ग्रामीण हैंडपंप के माध्यम से भी पूरा कर सकते हैं।