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Sirmour News: अदालत में हाजिर नहीं हुई बीमा कंपनी, एफडीआर राशि ब्याज समेत लौटाने के आदेश
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तीन बार पुकार के बावजूद कंपनी का प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, न्यायाधिकरण ने की एकतरफा कार्यवाही
नाबालिग रहते एफडीआर में सुरक्षित थी 62,060 की रकम, बालिग होने पर राशि जारी करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण-1 सिरमौर ने बीमा कंपनी के सुनवाई में उपस्थित न होने पर एकतरफा कार्यवाही करते हुए शारदा धीमान की 62,060 की एफडीआर राशि ब्याज सहित बैंक खाते में जारी करने के आदेश दिए हैं। भुगतान से पहले आवश्यक पहचान और सत्यापन पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी अजय मेहता की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। शारदा धीमान की ओर से अधिवक्ता शकील अहमद पेश हुए। बीमा कंपनी को नोटिस जारी होने के बावजूद उसका कोई प्रतिनिधि या अधिवक्ता अदालत में नहीं पहुंचा। मामले को तीन बार पुकारे जाने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ, जिस पर न्यायाधिकरण ने एकतरफा कार्रवाई की।
रिकॉर्ड के अनुसार, एमएसी याचिका संख्या 48-एन/2 ऑफ 2009 में 22 मार्च 2010 को अवॉर्ड पारित हुआ था। उस समय शारदा धीमान नाबालिग थीं, इसलिए उनके हिस्से की 62,060 की राशि एफडीआर में सुरक्षित रखी गई थी। बालिग होने के बाद उन्होंने राशि जारी करने के लिए आवेदन किया और दसवीं का प्रमाणपत्र व आधार कार्ड पेश कर आयु और पहचान का प्रमाण दिया।
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अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और सिविल नाजिर की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आवेदन मंजूर कर लिया। न्यायाधिकरण ने एफडीआर की पूरी राशि अब तक के अद्यतन ब्याज सहित याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जारी करने के निर्देश दिए। भुगतान से पहले आवश्यक पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
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नाबालिग रहते एफडीआर में सुरक्षित थी 62,060 की रकम, बालिग होने पर राशि जारी करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण-1 सिरमौर ने बीमा कंपनी के सुनवाई में उपस्थित न होने पर एकतरफा कार्यवाही करते हुए शारदा धीमान की 62,060 की एफडीआर राशि ब्याज सहित बैंक खाते में जारी करने के आदेश दिए हैं। भुगतान से पहले आवश्यक पहचान और सत्यापन पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी अजय मेहता की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। शारदा धीमान की ओर से अधिवक्ता शकील अहमद पेश हुए। बीमा कंपनी को नोटिस जारी होने के बावजूद उसका कोई प्रतिनिधि या अधिवक्ता अदालत में नहीं पहुंचा। मामले को तीन बार पुकारे जाने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ, जिस पर न्यायाधिकरण ने एकतरफा कार्रवाई की।
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रिकॉर्ड के अनुसार, एमएसी याचिका संख्या 48-एन/2 ऑफ 2009 में 22 मार्च 2010 को अवॉर्ड पारित हुआ था। उस समय शारदा धीमान नाबालिग थीं, इसलिए उनके हिस्से की 62,060 की राशि एफडीआर में सुरक्षित रखी गई थी। बालिग होने के बाद उन्होंने राशि जारी करने के लिए आवेदन किया और दसवीं का प्रमाणपत्र व आधार कार्ड पेश कर आयु और पहचान का प्रमाण दिया।
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अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और सिविल नाजिर की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आवेदन मंजूर कर लिया। न्यायाधिकरण ने एफडीआर की पूरी राशि अब तक के अद्यतन ब्याज सहित याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जारी करने के निर्देश दिए। भुगतान से पहले आवश्यक पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।