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घोटालों पर कार्रवाई करे या इच्छा मृत्यु की अनुमति दे सरकार : चतर सिंह
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बोले, करोड़ों के घोटाले उजागर करने पर भी नहीं हो रही कार्रवाई
कहा-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों से कर चुके शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सालों से सूचना का अधिकार अधिनियम से जानकारी एकत्रित कर करोड़ों रुपये के घोटालों को उजागर किया जा रहा है। समय-समय पर मामलों में कार्रवाई को लेकर विभागों सहित सरकार के संज्ञान में भी लाया जा रहा है, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यह आरोप नाहन में पत्रकार वार्ता में आरटीआई कार्यकर्ता चतर सिंह ने लगाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 से आरटीआई से जानकारी जुटाकर भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, सभी के कार्यकाल के दौरान उन्होंने घोटालों को उजागर किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कि यदि सरकार भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं कर सकती तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे, क्योंकि वे समाज में फैल रहे भ्रष्टाचार को नहीं देख सकते।
चतर सिंह ने कहा कि आज आलम यह है कि प्रदेश घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों में बिहार से भी आगे निकल रहा है। भ्रष्टाचार और घोटालों पर कार्रवाई को लेकर सरकार कहती है कि नंबर जारी किए गए हैं, उन पर शिकायत करें, लेकिन शिकायत करने पर उचित कार्रवाई ही नहीं होती। ऐसे में नंबर जारी करने का क्या फायदा।
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उन्होंने कहा कि कई मामलों में मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी, लेकिन जवाब नहीं मिला। फिर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी। उनकी तरफ से मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा गया। इसके बावजूद अभी तक भी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कालाअंब और बद्दी की दो औद्योगिक इकाइयों से ही करोड़ों के घोटाले को उन्होंने आरटीआई से उजागर किया। उसे भी दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विद्युत बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य अभियंता विमल नेगी मौत मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां ईमानदार लोगों के साथ ऐसा किया जाता है।
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कहा-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों से कर चुके शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सालों से सूचना का अधिकार अधिनियम से जानकारी एकत्रित कर करोड़ों रुपये के घोटालों को उजागर किया जा रहा है। समय-समय पर मामलों में कार्रवाई को लेकर विभागों सहित सरकार के संज्ञान में भी लाया जा रहा है, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यह आरोप नाहन में पत्रकार वार्ता में आरटीआई कार्यकर्ता चतर सिंह ने लगाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 से आरटीआई से जानकारी जुटाकर भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, सभी के कार्यकाल के दौरान उन्होंने घोटालों को उजागर किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कि यदि सरकार भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं कर सकती तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे, क्योंकि वे समाज में फैल रहे भ्रष्टाचार को नहीं देख सकते।
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चतर सिंह ने कहा कि आज आलम यह है कि प्रदेश घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों में बिहार से भी आगे निकल रहा है। भ्रष्टाचार और घोटालों पर कार्रवाई को लेकर सरकार कहती है कि नंबर जारी किए गए हैं, उन पर शिकायत करें, लेकिन शिकायत करने पर उचित कार्रवाई ही नहीं होती। ऐसे में नंबर जारी करने का क्या फायदा।
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उन्होंने कहा कि कई मामलों में मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी, लेकिन जवाब नहीं मिला। फिर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी। उनकी तरफ से मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा गया। इसके बावजूद अभी तक भी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कालाअंब और बद्दी की दो औद्योगिक इकाइयों से ही करोड़ों के घोटाले को उन्होंने आरटीआई से उजागर किया। उसे भी दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विद्युत बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य अभियंता विमल नेगी मौत मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां ईमानदार लोगों के साथ ऐसा किया जाता है।