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Sirmour News: बोंगली खेच स्कूल में 25 विद्यार्थी बैठते ही भर जाते हैं डिब्बेनुमा कमरे
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच। संवाद
बोंगली खेच स्कूल में सुविधाओं का अभाव, छोटे कमरे, लैब में धूल फांक रहे उपकरण
अभियान : शिक्षा का सच
जमीन पर बिठाने पड़ रहे कई विद्यार्थी, एक विद्यार्थी उठे तो डिस्टर्ब हो जाती है पूरी क्लास
कंप्यूटर लैब और साइंस लैब तो बनाई लेकिन शिक्षक ने होने से बनी हैं सफेद हाथी
न खेल मैदान और न सुरक्षा दीवार, अभिभावकों की सरकार से सुध लेने की गुहार
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। सरकारें भले ही डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्कूलों के दावे करें, लेकिन जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों में जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है। नारग शिक्षा खंड के अंतर्गत आने वाली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां बुनियादी सुविधाओं का ऐसा टोटा है कि स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों के लिए हर दिन एक नई परीक्षा बन चुका है।
स्कूल में छठी से 12वीं कक्षा तक 110 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सबसे बदतर स्थिति नौवीं और दसवीं कक्षा की है। नौवीं में 25 और दसवीं में 26 छात्र हैं। इन दोनों कक्षाओं के कमरे इतने छोटे हैं कि बच्चों की संख्या 25 पार करते ही तिल धरने की जगह नहीं बचती। आलम यह है कि कई बच्चों को मजबूरन नीचे टाट-पट्टी पर बैठना पड़ रहा है। यदि किसी एक बच्चे को भी क्लास से बाहर जाना पड़े, तो पूरी कक्षा डिस्टर्ब हो जाती है।
डिजिटल इंडिया के दौर में इस स्कूल में बच्चों की सुविधा के लिए साइंस और कंप्यूटर लैब तो बना दी गई हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। लाखों उपकरण कमरों में धूल फांक रहे हैं और नौनिहालों का भविष्य अंधकार में है।
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पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद स्कूल में बच्चों के खेलने के लिए कोई मैदान तक नहीं है। यहां तक कि सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) भी नहीं है। इससे हर समय आवारा पशुओं और अन्य खतरों का डर बना रहता है। खेलकूद गतिविधियों के नाम पर बच्चों का भविष्य पूरी तरह थमा हुआ है।
यही नहीं, संस्थान में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। इसमें प्रधानाचार्य, आईपी प्रवक्ता, नॉन-मेडिकल, मेडिकल, शारीरिक शिक्षक, लिपिक, सीनियर असिस्टेंट जैसे गैर-शिक्षकों के पद भी खाली हैं। इससे कागजी और प्रशासनिक कार्य का बोझ भी मौजूदा शिक्षकों पर ही है।
खंड शिक्षा अधिकारी नारग यशपाल चौहान ने बताया कि रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। कमरों, खेल मैदान व सुरक्षा दीवार के लिए स्कूल प्रबंधन एसएमसी के माध्यम से प्रस्ताव भेजे ताकि आगामी कार्रवाई की जा सके। संवाद
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छात्रों को इस प्रकार झेलनी पड़ रही परेशानी
पूर्व एसएमसी अध्यक्ष प्रवीण ठाकुर ने कहा कि स्कूल में दो बड़े कमरों, खेल मैदान और सुरक्षा दीवार की जरूरत है। इस बारे एसएमसी से प्रस्ताव डलवाकर फिर से विभाग को भेजा जाएगा। अभिभावक राकेश कुमार ने कहा कि खेल मैदान के अभाव में खेलों में करियर बनाने का विद्यार्थियों को सपना धूमिल हो रहा है। शिक्षकों के पद भी कई रिक्त हैं, जिन्हें तत्काल भरा जाना चाहिए। प्रवक्ता इतिहास रोहित ठाकुर ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों, कमरों व खेल मैदान की कमी है, बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन किसी तरह सभी चीजें व्यस्थित किए हुए हैं। दो बड़े कमरे मिल जाएं तो विद्यार्थियों को नीचे नहीं बिठाना पड़ेगा। छात्र नमन शर्मा ने बताया कि कमरा बहुत छोटा है, इस कारण कुछ बच्चे नीचे टाट-पट्टी पर बैठ रहे हैं। कमरे बड़े हों तो सभी बच्चे एक साथ डेस्क पर बैठ पाएंगे।
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अभियान : शिक्षा का सच
जमीन पर बिठाने पड़ रहे कई विद्यार्थी, एक विद्यार्थी उठे तो डिस्टर्ब हो जाती है पूरी क्लास
कंप्यूटर लैब और साइंस लैब तो बनाई लेकिन शिक्षक ने होने से बनी हैं सफेद हाथी
न खेल मैदान और न सुरक्षा दीवार, अभिभावकों की सरकार से सुध लेने की गुहार
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। सरकारें भले ही डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्कूलों के दावे करें, लेकिन जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों में जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है। नारग शिक्षा खंड के अंतर्गत आने वाली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां बुनियादी सुविधाओं का ऐसा टोटा है कि स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों के लिए हर दिन एक नई परीक्षा बन चुका है।
स्कूल में छठी से 12वीं कक्षा तक 110 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सबसे बदतर स्थिति नौवीं और दसवीं कक्षा की है। नौवीं में 25 और दसवीं में 26 छात्र हैं। इन दोनों कक्षाओं के कमरे इतने छोटे हैं कि बच्चों की संख्या 25 पार करते ही तिल धरने की जगह नहीं बचती। आलम यह है कि कई बच्चों को मजबूरन नीचे टाट-पट्टी पर बैठना पड़ रहा है। यदि किसी एक बच्चे को भी क्लास से बाहर जाना पड़े, तो पूरी कक्षा डिस्टर्ब हो जाती है।
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डिजिटल इंडिया के दौर में इस स्कूल में बच्चों की सुविधा के लिए साइंस और कंप्यूटर लैब तो बना दी गई हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। लाखों उपकरण कमरों में धूल फांक रहे हैं और नौनिहालों का भविष्य अंधकार में है।
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पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूद स्कूल में बच्चों के खेलने के लिए कोई मैदान तक नहीं है। यहां तक कि सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) भी नहीं है। इससे हर समय आवारा पशुओं और अन्य खतरों का डर बना रहता है। खेलकूद गतिविधियों के नाम पर बच्चों का भविष्य पूरी तरह थमा हुआ है।
यही नहीं, संस्थान में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। इसमें प्रधानाचार्य, आईपी प्रवक्ता, नॉन-मेडिकल, मेडिकल, शारीरिक शिक्षक, लिपिक, सीनियर असिस्टेंट जैसे गैर-शिक्षकों के पद भी खाली हैं। इससे कागजी और प्रशासनिक कार्य का बोझ भी मौजूदा शिक्षकों पर ही है।
खंड शिक्षा अधिकारी नारग यशपाल चौहान ने बताया कि रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। कमरों, खेल मैदान व सुरक्षा दीवार के लिए स्कूल प्रबंधन एसएमसी के माध्यम से प्रस्ताव भेजे ताकि आगामी कार्रवाई की जा सके। संवाद
छात्रों को इस प्रकार झेलनी पड़ रही परेशानी
पूर्व एसएमसी अध्यक्ष प्रवीण ठाकुर ने कहा कि स्कूल में दो बड़े कमरों, खेल मैदान और सुरक्षा दीवार की जरूरत है। इस बारे एसएमसी से प्रस्ताव डलवाकर फिर से विभाग को भेजा जाएगा। अभिभावक राकेश कुमार ने कहा कि खेल मैदान के अभाव में खेलों में करियर बनाने का विद्यार्थियों को सपना धूमिल हो रहा है। शिक्षकों के पद भी कई रिक्त हैं, जिन्हें तत्काल भरा जाना चाहिए। प्रवक्ता इतिहास रोहित ठाकुर ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों, कमरों व खेल मैदान की कमी है, बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन किसी तरह सभी चीजें व्यस्थित किए हुए हैं। दो बड़े कमरे मिल जाएं तो विद्यार्थियों को नीचे नहीं बिठाना पड़ेगा। छात्र नमन शर्मा ने बताया कि कमरा बहुत छोटा है, इस कारण कुछ बच्चे नीचे टाट-पट्टी पर बैठ रहे हैं। कमरे बड़े हों तो सभी बच्चे एक साथ डेस्क पर बैठ पाएंगे।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच। संवाद

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच। संवाद

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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच। संवाद

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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोंगली खेच। संवाद