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Sirmour News: शहरी गंदे नालों को सीवरेज योजना से जोड़ने को नहीं मिली मंजूरी

Mon, 08 Sep 2025 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 11:58 PM IST
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sewage treatment plant and five nala scheme
योजना के प्रारंभिक सर्वे की रिपोर्ट केंद्र सरकार और विभाग को भेजी
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केंद्र से मंजूरी मिलने पर ही अमृत योजना 2.0 में शामिल हो सकेगी

सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। शहरी क्षेत्र के पांच गंदे नाले पवित्र यमुना नदी को पिछले कई दशकों से प्रदूषित कर रहे हैं। करीब साढ़े तीन वर्ष पहले यमुना नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए एक योजना प्रस्तावित रही। ठोस और अपशिष्ट पदार्थ को नदी में जाने से रोकने को इन नालों को सीवरेज ट्रीटमेंट योजना से जोड़ने की कवायद शुरू भी हुई। प्राथमिक सर्वे के बाद जलशक्ति विभाग ने केंद्र सरकार और विभाग के प्रदेश मुख्य कार्यालय को शहरी नालों के ग्रे-वाटर को शामिल करने के बारे में प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट भेजी है, लेकिन अब तक इस प्रस्तावित योजना में कोई प्रगति नहीं हुई है।
बता दें कि पांवटा साहिब शहरी क्षेत्र में व्यापारिक संस्थानों, लघु इकाइयों तथा रिहायशी घरों के किचन, शौचालयों तथा अन्य गंदे पानी की निकासी पिछले कई दशकों से शहर के पांच नाले जंबूखाला, अनाज मंडी, मुख्य बाजार का शहरी गंदा नाला, यमुना नदी पुल के साथ गोविंदघाट के समीप नाला और देवीनगर कृपाल शीला के समीप से गुजरते हुए गंदगी यमुना नदी में पहुंच जाती रही है।
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नगर परिषद के कुल 13 वार्डों में 18 हजार से अधिक मकान, 45 से 50 हजार तक जनसंख्या पहुंच चुकी है। औद्योगिकीकरण, पर्यटन, व्यापार और धार्मिक महत्व के चलते पांवटा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। पवित्र यमुना नदी को गंदगी से बचाने के लिए नई योजना प्रस्तावित रही।
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पांवटा साहिब शहरी क्षेत्र के पांच गंदे नाले सीवरेज प्लांट से जोड़ने की कवायद भी शुरू की गई। जलशक्ति विभाग के तत्कालीन सहायक अभियंता (अब अधिशाषी अभियंता) एसएस पुंडीर की टीम ने इसका प्राथमिक सर्वे भी किया। इस प्रस्तावित योजना का प्रारंभिक सर्वे की रिपोर्ट केंद्र सरकार और विभाग को भेजी है। इस प्रस्तावित योजना के सिरे चढ़ने पर शहरी क्षेत्र से निकलने वाले ठोस और अपशिष्ट पदार्थ को नदी में जाने से रोका जा सकेगा। योजना को केंद्र सरकार की अमृत योजना 2.0 से जोड़ा जाना प्रस्तावित रहा है। इसमें पांचों शहरी नाले, तीन एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट) प्लांट से जुड़ने पर नदी काफी हद तक प्रदूषित होने से बच सकेगी।




जलशक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता पांवटा साहिब जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि प्रस्तावित योजना को अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है। मंजूरी के बाद ही केंद्र सरकार की अमृत योजना 2.0 से बजट प्रावधान होगा।
संवाद
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