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Sirmour News: राष्ट्रहित में दी जमीन, अब कृषक प्रमाण पत्र के लिए दफ्तरों में भटक रहे विस्थापित
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संशोधित --
-ऑनलाइन सत्यापन में अटक रहे आवेदन, लोकमित्र केंद्र से तहसील कार्यालय तक काटने पड़ रहे चक्कर
-2008-09 में भूमि अधिग्रहण के बाद से बनी समस्या, श्री रेणुका बांध जनसंघर्ष समिति ने उठाई सरल व्यवस्था की मांग
योगेंद्र कपिला
संगड़ाह (सिरमौर)। रेणुका जी बांध परियोजना के लिए राष्ट्रहित में अपनी बेशकीमती जमीन देने वाले प्रभावित एवं विस्थापित परिवार आज कृषक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया इन परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। हालात यह हैं कि लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन करने के बावजूद कई विस्थापितों के कृषक प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। अपनी जमीन परियोजना के लिए देने वाले परिवार अब उसी जमीन के आधार पर कृषक प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रहे हैं।
दरअसल, कृषक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदक को सबसे पहले लोकमित्र केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद आवेदन तहसील कार्यालय के पोर्टल पर पहुंचता है और वहां से संबंधित पटवारी को सत्यापन के लिए भेजा जाता है, लेकिन रेणुका बांध विस्थापितों के मामलों में पटवारी स्तर पर यह कहकर सत्यापन में दिक्कत बताई जा रही है कि संबंधित आवेदक की जमीन बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। इसी कारण आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
विस्थापित परिवारों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2008-09 में बांध परियोजना के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 17(4) लागू की गई थी। इसके बाद किसानों का अधिग्रहित जमीन पर मालिकाना हक समाप्त हो गया था। तभी से कृषक प्रमाण पत्र बनवाने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रभावित परिवारों के अनुसार पहले कृषक प्रमाण पत्र मैनुअल तरीके से भी बनाए जाते थे, जिससे इतनी परेशानी नहीं होती थी लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद समस्या और गंभीर हो गई है। लोकमित्र केंद्र में आवेदन करने के बाद जब आवेदक इसकी स्थिति जानने पहुंचते हैं तो उन्हें आवेदन तहसील कार्यालय में लंबित होने की जानकारी दी जाती है। इसके बाद उन्हें तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं मिल पा रहा है।
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जनसंघर्ष समिति ने उठाई सरल व्यवस्था की मांग
श्री रेणुका बांध जनसंघर्ष समिति ने भी इस समस्या पर कड़ी आपत्ति जताई है। समिति के संयोजक प्रताप सिंह तोमर, महासचिव संजय चौहान, मुख्य सलाहकार धर्म चंद शर्मा, हरिचंद शर्मा, सुभाष चंद, टिकमा राम शर्मा और प्रेम दंत शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि बांध परियोजना के कारण विस्थापित परिवार पहले ही कई तरह की परेशानियों और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। एक तरफ उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक कृषक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि जिन परिवारों ने राष्ट्रहित में अपनी जमीन परियोजना के लिए दी, उन्हें आज एक आवश्यक प्रमाण पत्र हासिल करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को विस्थापित परिवारों की परिस्थितियों को समझते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बांध प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों के कृषक प्रमाण पत्र बनाने के लिए विशेष और सरल प्रक्रिया निर्धारित की जाए, ताकि भूमि अधिग्रहण के कारण ऑनलाइन सत्यापन में आ रही बाधा को दूर किया जा सके।
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उपायुक्त कार्यालय भेजा मामला
उधर, इस संबंध में तहसीलदार अतर सिंह ने बताया कि संबंधित मामला उपायुक्त कार्यालय को भेजा गया है। वहां से जवाब मिलने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।-- -- -- -
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-ऑनलाइन सत्यापन में अटक रहे आवेदन, लोकमित्र केंद्र से तहसील कार्यालय तक काटने पड़ रहे चक्कर
-2008-09 में भूमि अधिग्रहण के बाद से बनी समस्या, श्री रेणुका बांध जनसंघर्ष समिति ने उठाई सरल व्यवस्था की मांग
योगेंद्र कपिला
संगड़ाह (सिरमौर)। रेणुका जी बांध परियोजना के लिए राष्ट्रहित में अपनी बेशकीमती जमीन देने वाले प्रभावित एवं विस्थापित परिवार आज कृषक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया इन परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। हालात यह हैं कि लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन करने के बावजूद कई विस्थापितों के कृषक प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। अपनी जमीन परियोजना के लिए देने वाले परिवार अब उसी जमीन के आधार पर कृषक प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रहे हैं।
दरअसल, कृषक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदक को सबसे पहले लोकमित्र केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद आवेदन तहसील कार्यालय के पोर्टल पर पहुंचता है और वहां से संबंधित पटवारी को सत्यापन के लिए भेजा जाता है, लेकिन रेणुका बांध विस्थापितों के मामलों में पटवारी स्तर पर यह कहकर सत्यापन में दिक्कत बताई जा रही है कि संबंधित आवेदक की जमीन बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। इसी कारण आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
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विस्थापित परिवारों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2008-09 में बांध परियोजना के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 17(4) लागू की गई थी। इसके बाद किसानों का अधिग्रहित जमीन पर मालिकाना हक समाप्त हो गया था। तभी से कृषक प्रमाण पत्र बनवाने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रभावित परिवारों के अनुसार पहले कृषक प्रमाण पत्र मैनुअल तरीके से भी बनाए जाते थे, जिससे इतनी परेशानी नहीं होती थी लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद समस्या और गंभीर हो गई है। लोकमित्र केंद्र में आवेदन करने के बाद जब आवेदक इसकी स्थिति जानने पहुंचते हैं तो उन्हें आवेदन तहसील कार्यालय में लंबित होने की जानकारी दी जाती है। इसके बाद उन्हें तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं मिल पा रहा है।
जनसंघर्ष समिति ने उठाई सरल व्यवस्था की मांग
श्री रेणुका बांध जनसंघर्ष समिति ने भी इस समस्या पर कड़ी आपत्ति जताई है। समिति के संयोजक प्रताप सिंह तोमर, महासचिव संजय चौहान, मुख्य सलाहकार धर्म चंद शर्मा, हरिचंद शर्मा, सुभाष चंद, टिकमा राम शर्मा और प्रेम दंत शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि बांध परियोजना के कारण विस्थापित परिवार पहले ही कई तरह की परेशानियों और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। एक तरफ उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक कृषक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि जिन परिवारों ने राष्ट्रहित में अपनी जमीन परियोजना के लिए दी, उन्हें आज एक आवश्यक प्रमाण पत्र हासिल करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को विस्थापित परिवारों की परिस्थितियों को समझते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बांध प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों के कृषक प्रमाण पत्र बनाने के लिए विशेष और सरल प्रक्रिया निर्धारित की जाए, ताकि भूमि अधिग्रहण के कारण ऑनलाइन सत्यापन में आ रही बाधा को दूर किया जा सके।
उपायुक्त कार्यालय भेजा मामला
उधर, इस संबंध में तहसीलदार अतर सिंह ने बताया कि संबंधित मामला उपायुक्त कार्यालय को भेजा गया है। वहां से जवाब मिलने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।