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Sirmour News: हीमोफीलिया दुर्लभ रक्त विकार, गंभीर चोट पर जा सकती है जान
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डाइट नाहन में हीमोफीलिया दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जानकारी देतीं बीएमओ डॉ. मोनीषा अग्रवाल। स
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आज के कार्यक्रम की खबर
-डाइट नाहन में विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम
-बीएमओ डॉ. मोनिषा अग्रवाल ने प्रशिक्षुओं को बताए लक्षण और बचाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग खंड धगेड़ा की ओर से शुक्रवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) नाहन में विश्व हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनिषा अग्रवाल ने की। इस दौरान प्रशिक्षुओं को हीमोफीलिया जैसे गंभीर और दुर्लभ रक्त विकार के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
डॉ. मोनिषा अग्रवाल ने बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें खून के जमने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। सामान्य व्यक्ति के शरीर में चोट लगने पर रक्त कुछ समय में जमकर बहना बंद हो जाता है, लेकिन हीमोफीलिया से ग्रसित व्यक्ति में रक्त का बहाव लंबे समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि गंभीर चोट लगने की स्थिति में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि यह विकार खून में क्लॉटिंग फैक्टर (रक्त जमाने वाले प्रोटीन) की कमी के कारण होता है। ऐसे मरीजों में खून बहने को रोकने वाले फैक्टर की संख्या कम हो जाती है, जिससे रक्त का थक्का बनने में अधिक समय लगता है। परिणामस्वरूप छोटी चोट भी गंभीर रूप ले सकती है।
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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाई जाती है, क्योंकि यह आनुवंशिक रूप से मां से बेटे में स्थानांतरित होती है। यदि किसी महिला में यह दोष मौजूद है तो उसके पुत्र में हीमोफीलिया होने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को बताया कि बार-बार बिना कारण खून बहना, चोट लगने पर लंबे समय तक रक्तस्राव होना, जोड़ों में दर्द व सूजन जैसे लक्षण हीमोफीलिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी है।
उन्होंने प्रतिभागियों को इस बीमारी से बचाव के लिए सावधानी बरतने, चोट से बचने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर डाइट नाहन का समस्त स्टाफ और प्रशिक्षु उपस्थित रहे। संवाद
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-डाइट नाहन में विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम
-बीएमओ डॉ. मोनिषा अग्रवाल ने प्रशिक्षुओं को बताए लक्षण और बचाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग खंड धगेड़ा की ओर से शुक्रवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) नाहन में विश्व हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनिषा अग्रवाल ने की। इस दौरान प्रशिक्षुओं को हीमोफीलिया जैसे गंभीर और दुर्लभ रक्त विकार के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
डॉ. मोनिषा अग्रवाल ने बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें खून के जमने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। सामान्य व्यक्ति के शरीर में चोट लगने पर रक्त कुछ समय में जमकर बहना बंद हो जाता है, लेकिन हीमोफीलिया से ग्रसित व्यक्ति में रक्त का बहाव लंबे समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि गंभीर चोट लगने की स्थिति में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
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उन्होंने बताया कि यह विकार खून में क्लॉटिंग फैक्टर (रक्त जमाने वाले प्रोटीन) की कमी के कारण होता है। ऐसे मरीजों में खून बहने को रोकने वाले फैक्टर की संख्या कम हो जाती है, जिससे रक्त का थक्का बनने में अधिक समय लगता है। परिणामस्वरूप छोटी चोट भी गंभीर रूप ले सकती है।
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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाई जाती है, क्योंकि यह आनुवंशिक रूप से मां से बेटे में स्थानांतरित होती है। यदि किसी महिला में यह दोष मौजूद है तो उसके पुत्र में हीमोफीलिया होने की संभावना अधिक रहती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को बताया कि बार-बार बिना कारण खून बहना, चोट लगने पर लंबे समय तक रक्तस्राव होना, जोड़ों में दर्द व सूजन जैसे लक्षण हीमोफीलिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी है।
उन्होंने प्रतिभागियों को इस बीमारी से बचाव के लिए सावधानी बरतने, चोट से बचने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर डाइट नाहन का समस्त स्टाफ और प्रशिक्षु उपस्थित रहे। संवाद

डाइट नाहन में हीमोफीलिया दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जानकारी देतीं बीएमओ डॉ. मोनीषा अग्रवाल। स