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Sirmour News: प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए, शोध निष्कर्षों और समकालीन मुद्दों पर विचार मंथन
Sun, 18 Oct 2026 01:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Sun, 18 Oct 2026 01:02 AM IST
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बदलते वैश्विक परिदृष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन समापन समार
सम्मेलन के समापन कार्यक्रम की उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह रहीं मुख्य अतिथि
गोंदपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स सभागार में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स, पांवटा साहिब के गोंदपुर सभागार में बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था : अवसर एवं चुनौतियां विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को हो गया। समापन समारोह में उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह मुख्य अतिथि रहीं। इस दौरान प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी राजकीय महाविद्यालय, पांवटा साहिब की ओर से आयोजित सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भारतीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक विकास, जनसंख्या और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर विचार साझा किए। समापन सत्र में डॉ. डीएस तोमर ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, जबकि वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. उत्तमा पांडे ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
डॉ. सुनीता सिंह ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान और आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विचार साझा करने, नए शोध निष्कर्षों से परिचित होने और विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद का अवसर मिलता है।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के जनसंख्या अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. एनएस बिष्ट ने जनसंख्या और विकास के पारस्परिक संबंधों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि जनसंख्या से जुड़े मुद्दों को सामाजिक-आर्थिक विकास की नीतियों और योजनाओं के साथ समन्वित करना आवश्यक है।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामलाल शर्मा ने की, जबकि डॉ. डीडी शर्मा सह-अध्यक्ष रहे। हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान के भूगोल विभाग के डॉ. खयाल चंद ने हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भूस्खलन, बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जोखिमों पर प्रकाश डाला। साथ ही नुकसान कम करने के लिए प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, जनजागरूकता, प्रशासनिक समन्वय और सतत विकास पर जोर दिया।
समापन समारोह में पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रेम भारद्वाज, राजकीय महाविद्यालय कफोटा की प्राचार्या डॉ. सुलक्षना शर्मा, डॉ. ध्यान सिंह तोमर, सह-संयोजक डॉ. स्वामीनाथ, आयोजन सचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर, प्रो. रिंकू अग्रवाल, प्रो. विम्मी रानी, प्रो. मंदीप गांधी, डॉ. दीपाली भंडारी और डॉ. जसवंत सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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गोंदपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स सभागार में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स, पांवटा साहिब के गोंदपुर सभागार में बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था : अवसर एवं चुनौतियां विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को हो गया। समापन समारोह में उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह मुख्य अतिथि रहीं। इस दौरान प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी राजकीय महाविद्यालय, पांवटा साहिब की ओर से आयोजित सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भारतीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक विकास, जनसंख्या और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर विचार साझा किए। समापन सत्र में डॉ. डीएस तोमर ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, जबकि वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. उत्तमा पांडे ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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डॉ. सुनीता सिंह ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान और आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विचार साझा करने, नए शोध निष्कर्षों से परिचित होने और विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद का अवसर मिलता है।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के जनसंख्या अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. एनएस बिष्ट ने जनसंख्या और विकास के पारस्परिक संबंधों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि जनसंख्या से जुड़े मुद्दों को सामाजिक-आर्थिक विकास की नीतियों और योजनाओं के साथ समन्वित करना आवश्यक है।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामलाल शर्मा ने की, जबकि डॉ. डीडी शर्मा सह-अध्यक्ष रहे। हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान के भूगोल विभाग के डॉ. खयाल चंद ने हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भूस्खलन, बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जोखिमों पर प्रकाश डाला। साथ ही नुकसान कम करने के लिए प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, जनजागरूकता, प्रशासनिक समन्वय और सतत विकास पर जोर दिया।
समापन समारोह में पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रेम भारद्वाज, राजकीय महाविद्यालय कफोटा की प्राचार्या डॉ. सुलक्षना शर्मा, डॉ. ध्यान सिंह तोमर, सह-संयोजक डॉ. स्वामीनाथ, आयोजन सचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर, प्रो. रिंकू अग्रवाल, प्रो. विम्मी रानी, प्रो. मंदीप गांधी, डॉ. दीपाली भंडारी और डॉ. जसवंत सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।