{"_id":"6693c29319ffc2f6af0c108a","slug":"no-budget-for-yamuna-tattikaran-yojna-nahan-news-c-177-1-ssml1030-128190-2024-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: यमुना नदी तटीकरण योजना को नहीं मिला बजट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: यमुना नदी तटीकरण योजना को नहीं मिला बजट
विज्ञापन
यमुना नदी तटीकरण योजना को नहीं मिला बजट
जलशक्ति विभाग ने तीन वर्ष पहले 251 करोड़ बजट की योजना भेजी थी मंजूरी के लिए
यमुना-सहायक नदी तटीकरण से 480 हेक्टेयर भूमि हो सकेगी सुरक्षित
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। तीन वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग के माध्यम से केंद्र को 251 करोड़ बजट की योजना मंजूरी को भेजी गई है। इसमें यमुना और सहायक नदियों का तटीकरण किया जाना है। योजना बनने से नदी किनारे गांवों के रिहायशी भवन और 480 हेक्टेयर भूमि जमीन सुरक्षित हो सकेगी लेकिन बजट प्रावधान नहीं होने से योजना फाइलों में कैद हो कर रह गई है।
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद जनवरी-2017 में केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधानशाला पुणे टीम ने पांवटा साहिब पहुंच कर निरीक्षण किया था। यमुना नदी के 32 किमी. क्षेत्र में से 22 किमी. क्षेत्र भूमि कटाव के लिए संवेदनशील है। इसके साथ ही सहायक बाता नदी और जंबूखाला के करीब 15 किमी. क्षेत्र को भी तटीकरण की इसी योजना के साथ जोड़ा गया है। इससे बरसात में नदी उफान पर रहने से हर वर्ष जान माल की क्षति की आशंका बनी रहती है।
हिमाचल के पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में 251 करोड़ रुपये लागत से यमुना और सहायक नदियों का तटीकरण योजना तैयार की गई। इससे पांवटा और आसपास के क्षेत्रों की लगभग 25 हजार आबादी को बरसात में होने वाली भूमि कटाव की समस्या से निजात मिलनी है। सीडब्ल्यूपीआरएस पुणे टीम ने निरीक्षण किया।
विज्ञापन
जलशक्ति विभाग के माध्यम से तैयार योजना को राज्य वित्त विभाग से भी मंजूरी मिली। यमुना नदी तटीकरण योजना बनने से उत्तराखंड से हरियाणा की सीमा तक करीब 22 किमी. नदी के तट को बाढ़ से नियंत्रित करने के लिए कार्य होगा। यमुना नदी तट के साथ बाता नदी और जंबूखाला को भी इस योजना में शामिल किया है। इन नदियों के किनारे सैकड़ों रिहायशी मकानों, औद्योगिक इकाइयों, बिजली बोर्ड, जलशक्ति विभाग की योजनाएं, उपजाऊ और व्यावसायिक भूमि को बरसात में क्षति होने से बचाया जा सकेगा।
उधर, जलशक्ति विभाग पांवटा के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता जितेंद्र ठाकुर ने कहा कि यमुना व सहायक नदियों के तटीकरण की योजना क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण है। राज्य वित्त विभाग से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद, केंद्र सरकार को 251 करोड़ बजट की योजना मंजूरी को भेजी गई थी। इस योजना के लिए शीघ्र दिल्ली जाकर बजट के प्रावधान की मांग रखी जाएगी।
बाक्स...
करीब 480 हेक्टेयर भूमि कटाव से बचेगी
- पांवटा साहिब की उत्तराखंड राज्य सीमा के डाक पत्थर बैराज के खोदरी माजरी से हरियाणा सीमा तक यमुना नदी का तटीकरण होगा। इसमें ग्राम पंचायत खोदरी, गोजर अडडेन, सिंघपुरा गुरुवाला, मानपुर देवड़ा, नवादा, कुंजा मतरालियों, पांवटा शहरी क्षेत्र के देवीनगर नदी किनारे और यमुना पुल से मंदिर घाट, भाटांवाली पंचायत से बातामंडी, बहराल पंचायत के यमुना नदी का करीब 22 किमी. क्षेत्र शामिल है।
संवाद
विज्ञापन
जलशक्ति विभाग ने तीन वर्ष पहले 251 करोड़ बजट की योजना भेजी थी मंजूरी के लिए
यमुना-सहायक नदी तटीकरण से 480 हेक्टेयर भूमि हो सकेगी सुरक्षित
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। तीन वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग के माध्यम से केंद्र को 251 करोड़ बजट की योजना मंजूरी को भेजी गई है। इसमें यमुना और सहायक नदियों का तटीकरण किया जाना है। योजना बनने से नदी किनारे गांवों के रिहायशी भवन और 480 हेक्टेयर भूमि जमीन सुरक्षित हो सकेगी लेकिन बजट प्रावधान नहीं होने से योजना फाइलों में कैद हो कर रह गई है।
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद जनवरी-2017 में केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधानशाला पुणे टीम ने पांवटा साहिब पहुंच कर निरीक्षण किया था। यमुना नदी के 32 किमी. क्षेत्र में से 22 किमी. क्षेत्र भूमि कटाव के लिए संवेदनशील है। इसके साथ ही सहायक बाता नदी और जंबूखाला के करीब 15 किमी. क्षेत्र को भी तटीकरण की इसी योजना के साथ जोड़ा गया है। इससे बरसात में नदी उफान पर रहने से हर वर्ष जान माल की क्षति की आशंका बनी रहती है।
विज्ञापन
हिमाचल के पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में 251 करोड़ रुपये लागत से यमुना और सहायक नदियों का तटीकरण योजना तैयार की गई। इससे पांवटा और आसपास के क्षेत्रों की लगभग 25 हजार आबादी को बरसात में होने वाली भूमि कटाव की समस्या से निजात मिलनी है। सीडब्ल्यूपीआरएस पुणे टीम ने निरीक्षण किया।
विज्ञापन
जलशक्ति विभाग के माध्यम से तैयार योजना को राज्य वित्त विभाग से भी मंजूरी मिली। यमुना नदी तटीकरण योजना बनने से उत्तराखंड से हरियाणा की सीमा तक करीब 22 किमी. नदी के तट को बाढ़ से नियंत्रित करने के लिए कार्य होगा। यमुना नदी तट के साथ बाता नदी और जंबूखाला को भी इस योजना में शामिल किया है। इन नदियों के किनारे सैकड़ों रिहायशी मकानों, औद्योगिक इकाइयों, बिजली बोर्ड, जलशक्ति विभाग की योजनाएं, उपजाऊ और व्यावसायिक भूमि को बरसात में क्षति होने से बचाया जा सकेगा।
उधर, जलशक्ति विभाग पांवटा के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता जितेंद्र ठाकुर ने कहा कि यमुना व सहायक नदियों के तटीकरण की योजना क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण है। राज्य वित्त विभाग से परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद, केंद्र सरकार को 251 करोड़ बजट की योजना मंजूरी को भेजी गई थी। इस योजना के लिए शीघ्र दिल्ली जाकर बजट के प्रावधान की मांग रखी जाएगी।
बाक्स...
करीब 480 हेक्टेयर भूमि कटाव से बचेगी
- पांवटा साहिब की उत्तराखंड राज्य सीमा के डाक पत्थर बैराज के खोदरी माजरी से हरियाणा सीमा तक यमुना नदी का तटीकरण होगा। इसमें ग्राम पंचायत खोदरी, गोजर अडडेन, सिंघपुरा गुरुवाला, मानपुर देवड़ा, नवादा, कुंजा मतरालियों, पांवटा शहरी क्षेत्र के देवीनगर नदी किनारे और यमुना पुल से मंदिर घाट, भाटांवाली पंचायत से बातामंडी, बहराल पंचायत के यमुना नदी का करीब 22 किमी. क्षेत्र शामिल है।
संवाद