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Sirmour News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में 7वीं बार किंग कोबरा नजर आया
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वन विभाग की टीम द्वारा रेस्क्यू किया गया किंग कोबरा। स्त्रोत विभाग
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में 7वीं बार किंग कोबरा नजर आया
वन विभाग की टीम ने ब्यास गांव में फिर से किया किंग कोबरा का रेस्क्यू
कंकरीट में बदलते जंगल से आबादी क्षेत्र की तरफ कूच कर रहे जंगली जीव
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के कम ही स्थानों पर अब तक किंग कोबरा नजर आया है जिसमे जनपद सिरमौर में 7वीं बार किंग कोबरा नजर आया है। अब तक वन विभाग ब्यास गांव के आसपास से ही दो बार रेस्क्यू कर चुका है। मार्च माह तक किंग कोबरा का प्रजनन काल होने के चलते विभाग बहुत ज्यादा दूर नहीं छोड़ पाता है। इसलिए संभावना है कि पहले रेस्क्यू किया कोबरा ही वापस जंगल से लौट आया हो।
बता दें कि विगत सप्ताह ही पांवटा क्षेत्र के ब्यास गांव में किंग कोबरा नजर आया था। इसके बाद आरओ सिंबलवाड़ा सुरेंद्र शर्मा की टीम ने रेस्क्यू कर करीब तीन किलोमीटर दूर जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया था लेकिन मंगलवार को फिर से ब्यास गांव में किंग कोबरा नजर आने की सूचना विभाग को मिली।
इसके बाद आरओ की टीम ने मौके पर जाकर रेस्क्यू किया। किंग कोबरा करीब दस फुट का था। काफी कुछ पहले रेस्क्यू किए किंग कोबरा की तरह नजर आ रहा था।
वन टीम के विशेषज्ञों ने बताया कि मार्च माह तक किंग कोबरा का प्रजनन काल रहता है। इसलिए नजर आने पर रेस्क्यू कर ज्यादा दूर नहीं छोड़ा जा सकता है। प्रदेश में अब तक पांवटा क्षेत्र में सातवीं बार किंग कोबरा के होने के मामले आए हैं। जबकि रेस्क्यू के पूरे प्रदेश में प्रथम मामला रहा है।
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किंग कोबरा अधिकतर पतझड़ वाले साल या चौड़े पत्ते वाले वनों के आसपास रहता है। सिरमौर में पहले गिरिनगर के जंगलोट, धारटीधार के मालगी मार्ग तथा ब्यास में उपस्थिति पाई गई है। सबसे अलग बात ये है कि किंग कोबरा का 95 फीसदी शिकार अन्य प्रजाति के सांप रहते हैं। केवल 5 फीसदी ही मेंढ़क या चूहा को यह सांप खाता हैं। इसको तंग नहीं किया जाए तो ये डंसता नहीं है। जंगलों के कटान, आसपास खेत व रिहायशी मकान समेत शहरीकरण बढ़ने से किंग कोबरा भी गांव के आसपास नजर आने लगे हैं। विशेषज्ञों का माने तो अप्रैल-मई में किंग कोबरा धीरे-धीर घने साल के जंगलों की तरफ लौट जाते हैं।
डीएफओ पांवटा साहिब एश्वर्य राज ने पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सूचना पर आरओ सिंबलवाड़ा सुरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में वन विभागीय टीम ने रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया है। ग्रामीणों से अपील की है कि जंगली जीव नजर आने पर वन विभाग को सूचना दें। किंग कोबरा नजर आने पर दूर रहें। इसको भगाने य मारने समेत छेड़छाड़ के प्रयास नहीं करें।
संवाद
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वन विभाग की टीम ने ब्यास गांव में फिर से किया किंग कोबरा का रेस्क्यू
कंकरीट में बदलते जंगल से आबादी क्षेत्र की तरफ कूच कर रहे जंगली जीव
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के कम ही स्थानों पर अब तक किंग कोबरा नजर आया है जिसमे जनपद सिरमौर में 7वीं बार किंग कोबरा नजर आया है। अब तक वन विभाग ब्यास गांव के आसपास से ही दो बार रेस्क्यू कर चुका है। मार्च माह तक किंग कोबरा का प्रजनन काल होने के चलते विभाग बहुत ज्यादा दूर नहीं छोड़ पाता है। इसलिए संभावना है कि पहले रेस्क्यू किया कोबरा ही वापस जंगल से लौट आया हो।
बता दें कि विगत सप्ताह ही पांवटा क्षेत्र के ब्यास गांव में किंग कोबरा नजर आया था। इसके बाद आरओ सिंबलवाड़ा सुरेंद्र शर्मा की टीम ने रेस्क्यू कर करीब तीन किलोमीटर दूर जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया था लेकिन मंगलवार को फिर से ब्यास गांव में किंग कोबरा नजर आने की सूचना विभाग को मिली।
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इसके बाद आरओ की टीम ने मौके पर जाकर रेस्क्यू किया। किंग कोबरा करीब दस फुट का था। काफी कुछ पहले रेस्क्यू किए किंग कोबरा की तरह नजर आ रहा था।
वन टीम के विशेषज्ञों ने बताया कि मार्च माह तक किंग कोबरा का प्रजनन काल रहता है। इसलिए नजर आने पर रेस्क्यू कर ज्यादा दूर नहीं छोड़ा जा सकता है। प्रदेश में अब तक पांवटा क्षेत्र में सातवीं बार किंग कोबरा के होने के मामले आए हैं। जबकि रेस्क्यू के पूरे प्रदेश में प्रथम मामला रहा है।
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किंग कोबरा अधिकतर पतझड़ वाले साल या चौड़े पत्ते वाले वनों के आसपास रहता है। सिरमौर में पहले गिरिनगर के जंगलोट, धारटीधार के मालगी मार्ग तथा ब्यास में उपस्थिति पाई गई है। सबसे अलग बात ये है कि किंग कोबरा का 95 फीसदी शिकार अन्य प्रजाति के सांप रहते हैं। केवल 5 फीसदी ही मेंढ़क या चूहा को यह सांप खाता हैं। इसको तंग नहीं किया जाए तो ये डंसता नहीं है। जंगलों के कटान, आसपास खेत व रिहायशी मकान समेत शहरीकरण बढ़ने से किंग कोबरा भी गांव के आसपास नजर आने लगे हैं। विशेषज्ञों का माने तो अप्रैल-मई में किंग कोबरा धीरे-धीर घने साल के जंगलों की तरफ लौट जाते हैं।
डीएफओ पांवटा साहिब एश्वर्य राज ने पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सूचना पर आरओ सिंबलवाड़ा सुरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में वन विभागीय टीम ने रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया है। ग्रामीणों से अपील की है कि जंगली जीव नजर आने पर वन विभाग को सूचना दें। किंग कोबरा नजर आने पर दूर रहें। इसको भगाने य मारने समेत छेड़छाड़ के प्रयास नहीं करें।
संवाद

वन विभाग की टीम द्वारा रेस्क्यू किया गया किंग कोबरा। स्त्रोत विभाग