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कोरोना काल के बीच जिले में बढ़े कैंसर के मरीज
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नाहन (सिरमौर)। वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ। मेडिकल कॉलेज में औसतन 500 के करीब मरीज हर वर्ष इलाज के लिए आ रहे हैं, लेकिन कोरोना काल की पहली लहर के दौरान इन मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ।
वर्ष 2020 में यहां 800 के करीब मरीज एक वर्ष में इलाज के लिए पहुंचे। इसका कारण लॉकडाउन के चलते मरीज अपना इलाज करवाने चंडीगढ़, आईजीएमसी शिमला और बाहरी राज्यों में नहीं जा पाए। लॉकडाउन के समय जिले में केवल आपातकालीन सेवाएं चल रहीं थीं। ऐसे में लोग इलाज के लिए नहीं जा पाए और मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचे। हालांकि, यहां पर कैंसर मरीज के लिए पूरी सुविधाएं नहीं हैं लेकिन फिर भी कैंसर के मरीजों का इलाज और उन्हें उचित परामर्श दिया गया।
ज्यादातर मामले पुरुषों में फेफड़े का कैंसर और महिलाओं में छाती कैंसर के हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में दो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। यहां पर मरीजों की कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरी, हार्मोनल थेरेपी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और जो मरीज खाना नहीं खा पाते उनके लिए पिलेटिव सर्विस आदि उपचार दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 में 455, वर्ष 2021 में 476 और वर्ष 2022 में अभी तक 150 कैंसर के मरीज मेडिकल कॉलेज नाहन में इलाज करवाने पहुंचे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपिस्ट डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि सिरमौर जिले में वर्ष में औसतन 450 से 500 कैंसर के मरीज उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि इनमें अधिकतर फेफड़े और छाती कैंसर के मरीज हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर कैंसर के मरीजों का कीमोथेरेपी सहित अन्य इलाज किया जा रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीआर धीमान ने बताया कि जिले में कैंसर के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में उपचार दिया जा रहा है। उन्होंने माना कि कुछ सुविधाएं यहां नहीं हैं, जिसके लिए मरीजों को आईजीएमसी शिमला भेजा जाता है।
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वर्ष 2020 में यहां 800 के करीब मरीज एक वर्ष में इलाज के लिए पहुंचे। इसका कारण लॉकडाउन के चलते मरीज अपना इलाज करवाने चंडीगढ़, आईजीएमसी शिमला और बाहरी राज्यों में नहीं जा पाए। लॉकडाउन के समय जिले में केवल आपातकालीन सेवाएं चल रहीं थीं। ऐसे में लोग इलाज के लिए नहीं जा पाए और मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचे। हालांकि, यहां पर कैंसर मरीज के लिए पूरी सुविधाएं नहीं हैं लेकिन फिर भी कैंसर के मरीजों का इलाज और उन्हें उचित परामर्श दिया गया।
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ज्यादातर मामले पुरुषों में फेफड़े का कैंसर और महिलाओं में छाती कैंसर के हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में दो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। यहां पर मरीजों की कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरी, हार्मोनल थेरेपी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और जो मरीज खाना नहीं खा पाते उनके लिए पिलेटिव सर्विस आदि उपचार दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 में 455, वर्ष 2021 में 476 और वर्ष 2022 में अभी तक 150 कैंसर के मरीज मेडिकल कॉलेज नाहन में इलाज करवाने पहुंचे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपिस्ट डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि सिरमौर जिले में वर्ष में औसतन 450 से 500 कैंसर के मरीज उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि इनमें अधिकतर फेफड़े और छाती कैंसर के मरीज हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर कैंसर के मरीजों का कीमोथेरेपी सहित अन्य इलाज किया जा रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीआर धीमान ने बताया कि जिले में कैंसर के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में उपचार दिया जा रहा है। उन्होंने माना कि कुछ सुविधाएं यहां नहीं हैं, जिसके लिए मरीजों को आईजीएमसी शिमला भेजा जाता है।
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