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Sirmour News: पत्नी और चार बच्चों को राहत, पति को 5,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश
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अदालत ने कहा, सक्षम पति पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण से नहीं बच सकता
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा के एक मामले में अदालत ने पत्नी और उसके चार नाबालिग बच्चों को राहत देते हुए पति को कुल 5,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) विकास कपूर की अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि मुख्य याचिका दायर होने की तिथि से देय होगी।
यह मामला रीना देवी एवं अन्य बनाम हुकम सिंह के बीच का है। पीड़ित महिला की शादी हरियाणा के तहसील बिलासपुर में हुई है। पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद पति ने उसके साथ मारपीट की। दहेज को लेकर प्रताड़ित किया और शराब के नशे में घर से निकाल दिया। इसके बाद वह चारों बच्चों के साथ मायके में रहने को मजबूर हो गई। याचिका में पति की आय करीब 30 हजार रुपये प्रतिमाह बताते हुए 10 हजार रुपये मासिक अंतरिम भरण-पोषण की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान पति ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि पत्नी स्वयं उसके साथ नहीं रहना चाहती। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध शिकायत, घरेलू घटना रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया घरेलू हिंसा के आरोप बनते हैं। आदेश में कहा गया कि भले ही पति की नियमित आय का कोई ठोस दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं है, लेकिन वह सक्षम व्यक्ति है और पत्नी व बच्चों का पालन-पोषण करना उसका कानूनी दायित्व है। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी सहित पांचों याचिकाकर्ताओं को प्रत्येक के लिए एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह मासिक अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया।-- -- -- -- -
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा के एक मामले में अदालत ने पत्नी और उसके चार नाबालिग बच्चों को राहत देते हुए पति को कुल 5,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) विकास कपूर की अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि मुख्य याचिका दायर होने की तिथि से देय होगी।
यह मामला रीना देवी एवं अन्य बनाम हुकम सिंह के बीच का है। पीड़ित महिला की शादी हरियाणा के तहसील बिलासपुर में हुई है। पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका में आरोप लगाया था कि विवाह के बाद पति ने उसके साथ मारपीट की। दहेज को लेकर प्रताड़ित किया और शराब के नशे में घर से निकाल दिया। इसके बाद वह चारों बच्चों के साथ मायके में रहने को मजबूर हो गई। याचिका में पति की आय करीब 30 हजार रुपये प्रतिमाह बताते हुए 10 हजार रुपये मासिक अंतरिम भरण-पोषण की मांग की गई थी।
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सुनवाई के दौरान पति ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि पत्नी स्वयं उसके साथ नहीं रहना चाहती। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध शिकायत, घरेलू घटना रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया घरेलू हिंसा के आरोप बनते हैं। आदेश में कहा गया कि भले ही पति की नियमित आय का कोई ठोस दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं है, लेकिन वह सक्षम व्यक्ति है और पत्नी व बच्चों का पालन-पोषण करना उसका कानूनी दायित्व है। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी सहित पांचों याचिकाकर्ताओं को प्रत्येक के लिए एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह मासिक अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया।
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