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Sirmour News: हाटी जनजातीय दर्जे पर बवाल जारी, गुर्जर समुदाय ने तैयार की रणनीति
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कालाअंब में गुर्जर समुदाय की बैठक में मौजूद पदाधिकारी। स्रोत: गुर्जर परिषद
हाटी जनजातीय दर्जे पर बवाल जारी, गुर्जर समुदाय ने तैयार की रणनीति
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में हुई बैठक में पुनर्विचार करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर के ट्रांसगिरि इलाके के हाटी को मिले जनजातीय दर्जे पर गुर्जर समुदाय का विरोध लगातार जारी है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैठकें करने के बाद रविवार को गुर्जर समाज के लोगों ने कालाअंब में रणनीति तैयार की। साथ ही अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
इस मौके पर गुर्जर कल्याण परिषद सिरमौर के अध्यक्ष हेमराज पोसवाल, महासचिव सोमनाथ भाटिया, उपाध्यक्ष सुभाष और हेमराज आदि ने कहा कि गिरिपार के हाटी समुदाय को दिया एसटी आरक्षण सही नहीं है। इसमें बहुत सारी खामियां हैं, जिसको लेकर राज्य सरकार के केंद्र से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला बिलकुल सही है।
महासचिव सोमनाथ भाटिया ने कहा कि केंद्रीय हाटी समिति और स्थानीय नेता भ्रामक बातें कर रहे हैं लेकिन वह इस समुदाय के अस्तित्व को लेकर कोई ठोस दलील नहीं दे पाए और अब मनुस्मृति और खश इतिहास के आधार पर हाटी समुदाय के होने का दावा कर रहे हैं। वे ये जवाब नहीं दे पा रहे कि गिरिपार के खश, कनैत और राजपूत बाकी प्रदेश से अलग कैसे हैं।
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यही नहीं राजस्व रिकॉर्ड को बदलने की बात न केवल निराधार है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के भी खिलाफ है।
गुर्जर समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण की ये व्यवस्था सवर्ण जातियों के आर्थिक और सामाजिक तौर पर विकसित लोगों की बैकडोर एंट्री है। लोकुर कमेटी के मापदंडों को तथाकथित हाटी समुदाय पूरा नहीं करता। मापदंडों को दरकिनार कर राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें एसटी बनाया जा रहा है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि हिमाचल की जनजातियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए हाटी आरक्षण से जुड़े इस पहलू पर गौर कर पुनर्विचार किया जाए।
...
ये रखी मांगें
- रेवेन्यू रिकॉर्ड में कोई बदलाव नहीं किया जाए।
-एथनोग्राफिक डाटा में मौजूद खामियों का पुन: अवलोकन कर वास्तविक तथ्य पेश किए जाएं।
- सरकार इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को मापने के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेष कमीशन या कमेटी बनाए।
- एसटी के वर्तमान कोटे में कोई छेड़छाड़ न की जाए।
- सवर्ण और रसूखदार जातियों को घुमंतू जनजातियों के साथ एक ही श्रेणी में न रखा जाए।
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औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में हुई बैठक में पुनर्विचार करने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर के ट्रांसगिरि इलाके के हाटी को मिले जनजातीय दर्जे पर गुर्जर समुदाय का विरोध लगातार जारी है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैठकें करने के बाद रविवार को गुर्जर समाज के लोगों ने कालाअंब में रणनीति तैयार की। साथ ही अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
इस मौके पर गुर्जर कल्याण परिषद सिरमौर के अध्यक्ष हेमराज पोसवाल, महासचिव सोमनाथ भाटिया, उपाध्यक्ष सुभाष और हेमराज आदि ने कहा कि गिरिपार के हाटी समुदाय को दिया एसटी आरक्षण सही नहीं है। इसमें बहुत सारी खामियां हैं, जिसको लेकर राज्य सरकार के केंद्र से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला बिलकुल सही है।
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महासचिव सोमनाथ भाटिया ने कहा कि केंद्रीय हाटी समिति और स्थानीय नेता भ्रामक बातें कर रहे हैं लेकिन वह इस समुदाय के अस्तित्व को लेकर कोई ठोस दलील नहीं दे पाए और अब मनुस्मृति और खश इतिहास के आधार पर हाटी समुदाय के होने का दावा कर रहे हैं। वे ये जवाब नहीं दे पा रहे कि गिरिपार के खश, कनैत और राजपूत बाकी प्रदेश से अलग कैसे हैं।
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यही नहीं राजस्व रिकॉर्ड को बदलने की बात न केवल निराधार है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के भी खिलाफ है।
गुर्जर समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण की ये व्यवस्था सवर्ण जातियों के आर्थिक और सामाजिक तौर पर विकसित लोगों की बैकडोर एंट्री है। लोकुर कमेटी के मापदंडों को तथाकथित हाटी समुदाय पूरा नहीं करता। मापदंडों को दरकिनार कर राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें एसटी बनाया जा रहा है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि हिमाचल की जनजातियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए हाटी आरक्षण से जुड़े इस पहलू पर गौर कर पुनर्विचार किया जाए।
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ये रखी मांगें
- रेवेन्यू रिकॉर्ड में कोई बदलाव नहीं किया जाए।
-एथनोग्राफिक डाटा में मौजूद खामियों का पुन: अवलोकन कर वास्तविक तथ्य पेश किए जाएं।
- सरकार इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को मापने के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेष कमीशन या कमेटी बनाए।
- एसटी के वर्तमान कोटे में कोई छेड़छाड़ न की जाए।
- सवर्ण और रसूखदार जातियों को घुमंतू जनजातियों के साथ एक ही श्रेणी में न रखा जाए।