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Sirmour News: आजादी के 77 साल बाद भी सड़क की आस में डाहर गांव
Thu, 02 Jan 2025 11:18 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Thu, 02 Jan 2025 11:18 PM IST
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संगडाह के डाहर गांव में गिरे डंगे को उठाकर बच्चों को रास्ता पार कराते ग्रामीण। संवाद
सचित्र--
सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं को ले जाना पड़ता है चारपाई पर
योगेंद्र कपिला
संगड़ाह (सिरमौर)। रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत संगड़ाह के डाहर गांव के लोग आजादी के 77 वर्ष बीतने के बाद भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। लोग आज भी सड़क बनने की आस लगाए बैठे हैं। सड़क न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह गांव उपमंडल मुख्यालय संगड़ाह से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लेकिन सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भवन निर्माण सामग्री के अलावा अन्य आवश्यक वस्तुओं को सड़क से गांव तक पीठ पर उठा कर ले जाना पड़ता है। गांव में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे भी सड़क तक पीठ पर उठा कर लाना पड़ता है।
सर्वाधिक परेशानी का सामना तो उस समय करना पड़ता है जब प्रसव पीड़ा वाली महिला को गांव से मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है, जिसमें सभी ग्रामीण एकत्रित हो कर पीड़ित महिला को चारपाई पर या फिर किलटे में उठा कर स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाते हैं।
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गांव के मुखिया अमरनाथ, कमल देव, रोहिताश, सुभाष शर्मा महिला मंडल प्रधान रीता शर्मा, विद्या देवी आदि ने बताया कि गांव के लिए बना रास्ता संकरा और पथरीला होने के कारण इस रास्ते से हाल ही में एक युवक की गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। आधा दर्जन के करीब स्कूल जाने वाले बच्चे व अन्य लोग इस मार्ग से खाई में गिर चुके हैं।
बताते चलें कि बरसात के दिनों में यह पगडंडी कई स्थानों पर ध्वस्त हो जाती है, जिस कारण लोगों को अपनी जान पर खेलकर इस मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को स्कूल भेजने में आती है। रास्ते की खस्ता हालत के चलते प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को बच्चों को लाने ले जाने के लिए अलग से रखना पड़ता है।
भाजपा और कांग्रेस नेता चुनाव के दौरान गांव का रुख करते हैं और उसी दौरान वोट लेने के लिए लोगों को मार्ग बनाने का प्रलोभन देकर चले जाते हैं। चुनाव के बाद सारे वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।
इसी प्रकार पंचायत द्वारा इस मार्ग की अनदेखी करना पंचायती राज प्रणाली की पोल खोल रहा है। गांव के लिए सही सड़क और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण 400 की आबादी वाले इस गांव के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस बारे विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार से संपर्क किया गया तो उनके व्यस्त होने के कारण बात नहीं हो पाई। वहीं भाजपा नेता नारायण सिंह ने बताया कि हमारी सरकार सत्ता में आते ही डाहर गांव के लिए मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा। दूसरे संपर्क मार्ग भी निर्मित किए जाएंगे।
-- -संवाद
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सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं को ले जाना पड़ता है चारपाई पर
योगेंद्र कपिला
संगड़ाह (सिरमौर)। रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत संगड़ाह के डाहर गांव के लोग आजादी के 77 वर्ष बीतने के बाद भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। लोग आज भी सड़क बनने की आस लगाए बैठे हैं। सड़क न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह गांव उपमंडल मुख्यालय संगड़ाह से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लेकिन सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भवन निर्माण सामग्री के अलावा अन्य आवश्यक वस्तुओं को सड़क से गांव तक पीठ पर उठा कर ले जाना पड़ता है। गांव में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे भी सड़क तक पीठ पर उठा कर लाना पड़ता है।
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सर्वाधिक परेशानी का सामना तो उस समय करना पड़ता है जब प्रसव पीड़ा वाली महिला को गांव से मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है, जिसमें सभी ग्रामीण एकत्रित हो कर पीड़ित महिला को चारपाई पर या फिर किलटे में उठा कर स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाते हैं।
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गांव के मुखिया अमरनाथ, कमल देव, रोहिताश, सुभाष शर्मा महिला मंडल प्रधान रीता शर्मा, विद्या देवी आदि ने बताया कि गांव के लिए बना रास्ता संकरा और पथरीला होने के कारण इस रास्ते से हाल ही में एक युवक की गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। आधा दर्जन के करीब स्कूल जाने वाले बच्चे व अन्य लोग इस मार्ग से खाई में गिर चुके हैं।
बताते चलें कि बरसात के दिनों में यह पगडंडी कई स्थानों पर ध्वस्त हो जाती है, जिस कारण लोगों को अपनी जान पर खेलकर इस मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को स्कूल भेजने में आती है। रास्ते की खस्ता हालत के चलते प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को बच्चों को लाने ले जाने के लिए अलग से रखना पड़ता है।
भाजपा और कांग्रेस नेता चुनाव के दौरान गांव का रुख करते हैं और उसी दौरान वोट लेने के लिए लोगों को मार्ग बनाने का प्रलोभन देकर चले जाते हैं। चुनाव के बाद सारे वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।
इसी प्रकार पंचायत द्वारा इस मार्ग की अनदेखी करना पंचायती राज प्रणाली की पोल खोल रहा है। गांव के लिए सही सड़क और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण 400 की आबादी वाले इस गांव के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस बारे विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार से संपर्क किया गया तो उनके व्यस्त होने के कारण बात नहीं हो पाई। वहीं भाजपा नेता नारायण सिंह ने बताया कि हमारी सरकार सत्ता में आते ही डाहर गांव के लिए मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा। दूसरे संपर्क मार्ग भी निर्मित किए जाएंगे।