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सरकारी कार्यों में इस्तेमाल हो रही अवैध खनन सामग्री
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शिलाई (सिरमौर)। उपमंडल शिलाई की रोनहाट उपतहसील में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। हैरानी की बात है कि सरकारी कामकाज के लिए भी अवैध खनन जारी है। हर रोज अवैध खनन सामग्री लेकर जाते दर्जनों वाहन लाधी महल क्षेत्र में देखे जा सकते हैं।
नदी किनारे रेत और बजरी के अवैध खनन का काम जोरों पर है। वहीं, सड़क किनारे भी खुदाई करके खनन सामग्री एकत्रित की जा रही है। लोक निर्माण विभाग और पंचायतीराज विभाग द्वारा क्षेत्र में करवाए जा रहे विकास कार्यों के लिए इसी अवैध खनन सामग्री का इस्तेेमाल हो रहा है।
क्षेत्र की आधा दर्जन सड़कों पर गटका बिछाने और उनको पक्का करने के काम में भी ठेकेदार यही सामग्री लगा रहे हैं। ऐसे में सरकारी राजस्व को चूना लग रहा है। अवैध खनन से नदी और पहाड़ भी खोखले हो रहे हैं।
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शिलाई विकास खंड की प्रत्येक पंचायत में सभी मदों को मिलाकर औसतन पांच करोड़ की धनराशि सरकार द्वारा खर्च की जा रही है। इसमें मुख्यतया निर्माण सामग्री जैसे रेत और बजरी का प्रयोग हो रहा है। लेकिन, अधिकतर खनन सामग्री के बिलों में माइनिंग विभाग के एम फार्म गायब रहते हैं। इसी तरह लोक निर्माण विभाग के अधीन चल रहे अधिकतर कार्यों में भी अवैध खनन की सामग्री ही इस्तेमाल हो रही है। सड़क में गटका बिछाने से लेकर सड़क किनारे बनाए जाने वाले डंगों और पैरापिट और भवन निर्माण में भी यही सामग्री प्रयोग की जा रही है। जबकि, बिल क्रशर के दिखाए जा रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा को विभाजित करने वाली टोंस नदी का जोंग, मीनस क्षेत्र और रोनहाट का भंगाल खड्ड, सियासु, शिलाई का नेड़ा खड्ड और सतौन की गिरि नदी खनन माफियों की जन्नत बना हुआ है। कई जगह खनन के बाद पूरी पहाड़ी ही सड़क पर दरक रही है। रोनहाट के समीप गुमराह में अवैध खनन के चलते हुआ भूस्खलन भी इसका ताजा उदाहरण है।
उधर, एसडीएम योगेश चौहान ने बताया कि अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए प्रशासन की तरफ से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग, खनन विभाग और पुलिस को अवैध खनन को लेकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी कार्यों में भी अगर अवैध खनन सामग्री प्रयोग की जा रही है तो यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी जांच की जाएगी।
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नदी किनारे रेत और बजरी के अवैध खनन का काम जोरों पर है। वहीं, सड़क किनारे भी खुदाई करके खनन सामग्री एकत्रित की जा रही है। लोक निर्माण विभाग और पंचायतीराज विभाग द्वारा क्षेत्र में करवाए जा रहे विकास कार्यों के लिए इसी अवैध खनन सामग्री का इस्तेेमाल हो रहा है।
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क्षेत्र की आधा दर्जन सड़कों पर गटका बिछाने और उनको पक्का करने के काम में भी ठेकेदार यही सामग्री लगा रहे हैं। ऐसे में सरकारी राजस्व को चूना लग रहा है। अवैध खनन से नदी और पहाड़ भी खोखले हो रहे हैं।
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शिलाई विकास खंड की प्रत्येक पंचायत में सभी मदों को मिलाकर औसतन पांच करोड़ की धनराशि सरकार द्वारा खर्च की जा रही है। इसमें मुख्यतया निर्माण सामग्री जैसे रेत और बजरी का प्रयोग हो रहा है। लेकिन, अधिकतर खनन सामग्री के बिलों में माइनिंग विभाग के एम फार्म गायब रहते हैं। इसी तरह लोक निर्माण विभाग के अधीन चल रहे अधिकतर कार्यों में भी अवैध खनन की सामग्री ही इस्तेमाल हो रही है। सड़क में गटका बिछाने से लेकर सड़क किनारे बनाए जाने वाले डंगों और पैरापिट और भवन निर्माण में भी यही सामग्री प्रयोग की जा रही है। जबकि, बिल क्रशर के दिखाए जा रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा को विभाजित करने वाली टोंस नदी का जोंग, मीनस क्षेत्र और रोनहाट का भंगाल खड्ड, सियासु, शिलाई का नेड़ा खड्ड और सतौन की गिरि नदी खनन माफियों की जन्नत बना हुआ है। कई जगह खनन के बाद पूरी पहाड़ी ही सड़क पर दरक रही है। रोनहाट के समीप गुमराह में अवैध खनन के चलते हुआ भूस्खलन भी इसका ताजा उदाहरण है।
उधर, एसडीएम योगेश चौहान ने बताया कि अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए प्रशासन की तरफ से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग, खनन विभाग और पुलिस को अवैध खनन को लेकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी कार्यों में भी अगर अवैध खनन सामग्री प्रयोग की जा रही है तो यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी जांच की जाएगी।