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Sirmour News: अदालत 6
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चेक बाउंस मामले में दोषी को राहत
नहीं, एक साल की सजा बरकरार
- सत्र न्यायालय ने खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
- 26 अक्तूबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 6.60 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के मामले में दोषी यशपाल ठाकुर को सत्र न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी।
मामला वर्ष 2017 को हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक नाहन शाखा से जुड़े चेक का है। तहसील नाहन निवासी यशपाल ठाकुर ने बैंक से 5 लाख रुपये का कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट ऋण लिया था। ऋण की किस्तें समय पर न चुकाने के कारण खाते में 5.65 लाख रुपये बकाया हो गए। बैंक के अनुसार बकाया राशि चुकाने के लिए आरोपी ने एक पोस्ट डेटेड चेक दिया। बाद में बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण दो बार बाउंस हो गया। बैंक के कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
वर्ष 2021 में न्यायालय में शिकायत दायर की गई। 26 अक्तूबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 1 साल के कारावास और 6.60 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने भी आरोपी की अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।
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नहीं, एक साल की सजा बरकरार
- सत्र न्यायालय ने खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
- 26 अक्तूबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 6.60 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के मामले में दोषी यशपाल ठाकुर को सत्र न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी।
मामला वर्ष 2017 को हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक नाहन शाखा से जुड़े चेक का है। तहसील नाहन निवासी यशपाल ठाकुर ने बैंक से 5 लाख रुपये का कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट ऋण लिया था। ऋण की किस्तें समय पर न चुकाने के कारण खाते में 5.65 लाख रुपये बकाया हो गए। बैंक के अनुसार बकाया राशि चुकाने के लिए आरोपी ने एक पोस्ट डेटेड चेक दिया। बाद में बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण दो बार बाउंस हो गया। बैंक के कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
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वर्ष 2021 में न्यायालय में शिकायत दायर की गई। 26 अक्तूबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 1 साल के कारावास और 6.60 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने भी आरोपी की अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा।
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