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Sirmour News: अदालत
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पत्नी का तलाक साबित नहीं कर पाए पति-ससुर
फिर भी स्कूल संपत्ति पर मिला कब्जे का अधिकार
- नाहन में स्कूल और संपत्ति विवाद में कोर्ट का फैसला, जमीन का मालिकाना हक पति-ससुर के पक्ष में माना
- विवाह के बाद पत्नी को सौंपा था स्कूल प्रबंधन, पति-ससुर तलाक को कानूनी रूप से नहीं कर पाए सिद्ध
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)।
शहर के एक निजी स्कूल और उससे जुड़ी संपत्ति को लेकर चल रहे लंबे पारिवारिक विवाद में सिविल कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने जमीन और भवन का मालिकाना हक (स्वामित्व) पति और ससुर के पक्ष में मानते हुए उन्हें संपत्ति पर कब्जा पाने का अधिकार दिया है। सुनवाई के दौरान पति पक्ष ने यह भी कहा कि उन्होंने पत्नी को इस्लामिक प्रक्रिया के अनुसार तलाक दिया था। हालांकि अदालत ने पाया कि तलाक की प्रक्रिया और उसकी सूचना के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इसलिए इसे कानूनी रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
यह मामला नया बाजार क्षेत्र में स्थित स्कूल और उससे संबंधित भवन व जमीन के स्वामित्व को लेकर था। वादी पक्ष ने अदालत में दावा किया था कि उक्त जमीन उनके स्वामित्व में है और करीब 23 लाख रुपये बैंक से ऋण लेकर तीन मंजिला भवन बनाया गया था। इसमें स्कूल संचालित किया जा रहा है।
वादी पक्ष के अनुसार विवाह के बाद प्रतिवादी को स्कूल का संचालन सौंपा गया था और बाद में उन्हें स्कूल की प्रिंसिपल भी बनाया गया, लेकिन कुछ समय बाद पारिवारिक मतभेद बढ़ने पर उन्हें पद से हटा दिया गया। आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद वह स्कूल और भवन पर कब्जा बनाए हुई थीं और स्कूल की फीस का संचालन खुद कर रही थीं।
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प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में कहा कि वह कई वर्षों से स्कूल चला रही हैं और स्कूल के विकास में उनका भी आर्थिक योगदान है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूल का संचालन एक अन्य सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है और वह उसकी जिम्मेदार पदाधिकारी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेज, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद माना कि विवादित भूमि का स्वामित्व वादी पक्ष के पास है। इसी आधार पर अदालत ने संपत्ति से जुड़े अधिकारों को स्वीकार करते हुए वादियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
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फिर भी स्कूल संपत्ति पर मिला कब्जे का अधिकार
- नाहन में स्कूल और संपत्ति विवाद में कोर्ट का फैसला, जमीन का मालिकाना हक पति-ससुर के पक्ष में माना
- विवाह के बाद पत्नी को सौंपा था स्कूल प्रबंधन, पति-ससुर तलाक को कानूनी रूप से नहीं कर पाए सिद्ध
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)।
शहर के एक निजी स्कूल और उससे जुड़ी संपत्ति को लेकर चल रहे लंबे पारिवारिक विवाद में सिविल कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने जमीन और भवन का मालिकाना हक (स्वामित्व) पति और ससुर के पक्ष में मानते हुए उन्हें संपत्ति पर कब्जा पाने का अधिकार दिया है। सुनवाई के दौरान पति पक्ष ने यह भी कहा कि उन्होंने पत्नी को इस्लामिक प्रक्रिया के अनुसार तलाक दिया था। हालांकि अदालत ने पाया कि तलाक की प्रक्रिया और उसकी सूचना के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इसलिए इसे कानूनी रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
यह मामला नया बाजार क्षेत्र में स्थित स्कूल और उससे संबंधित भवन व जमीन के स्वामित्व को लेकर था। वादी पक्ष ने अदालत में दावा किया था कि उक्त जमीन उनके स्वामित्व में है और करीब 23 लाख रुपये बैंक से ऋण लेकर तीन मंजिला भवन बनाया गया था। इसमें स्कूल संचालित किया जा रहा है।
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वादी पक्ष के अनुसार विवाह के बाद प्रतिवादी को स्कूल का संचालन सौंपा गया था और बाद में उन्हें स्कूल की प्रिंसिपल भी बनाया गया, लेकिन कुछ समय बाद पारिवारिक मतभेद बढ़ने पर उन्हें पद से हटा दिया गया। आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद वह स्कूल और भवन पर कब्जा बनाए हुई थीं और स्कूल की फीस का संचालन खुद कर रही थीं।
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प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में कहा कि वह कई वर्षों से स्कूल चला रही हैं और स्कूल के विकास में उनका भी आर्थिक योगदान है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूल का संचालन एक अन्य सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है और वह उसकी जिम्मेदार पदाधिकारी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेज, गवाहों के बयान और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद माना कि विवादित भूमि का स्वामित्व वादी पक्ष के पास है। इसी आधार पर अदालत ने संपत्ति से जुड़े अधिकारों को स्वीकार करते हुए वादियों के पक्ष में फैसला सुनाया।