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कोरोना काल में बच्चों का सहारा बने शिक्षित युवा
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जिला सिरमौर के टटियाना गांव में बच्चों को पढ़ाते क्षेत्र के शिक्षित युवा।
- फोटो : NAHAN
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सतौन (सिरमौर)। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई हर विद्यार्थी तक नहीं पहुंच पा रही है। कई मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत है तो कहीं अभिभावक एंड्रॉयड फोन नहीं ले सकते। ऐसे में गांवों के शिक्षित युवा बच्चों को सहारा बन गए हैं। टटियाना गांव के शिक्षित युवाओं ने गांव के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है। गांव के लगभग 20 शिक्षित युवक-युवतियां कक्षा एक से जमा दो तक के छात्रों को पड़ा रहे हैं।
शिक्षा विभाग में बीआरसी और गांव के माया राम शर्मा ने गांव के शिक्षित युवक युवतियों को बच्चों का भविष्य संवारने के लिए प्रेरित किया है। माया राम शर्मा ने बताया कि गांवों के लगभग 100 बच्चों को इस कोरोना काल में घरद्वार शिक्षा दी जा रही हैं। शहरों में जहां ट्यूशन का सिलसिला चला हुआ है वहीं गांव में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। युवक -युवतियां पांच-पांच बच्चों के समूह बना कर पढ़ाई करवा रहे हैं। कोरोना के नियमों का पालन करते हुए यह कार्य किया जा रहा है। इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है जिससे वह गांवों के हर शिक्षित युवा से जुड़े हुए हैं और गांवों में बच्चों की पढ़ाई की रोजाना जानकारी ले रहे हैं। स्कूल से दिए जा रहे कार्य को भी बच्चों को समझा कर करवाया जा रहा है।
माया राम शर्मा ने बताया कि कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी तक स्कूल को देखा भी नहीं है। उन्हें बेसिक पढ़ाई करवाई जा रही है। उन्हें स्कूल का माहौल दिया जा रहा है। माया राम शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार को गांवों में इस प्रकार की सेवा देने वाले युवाओं को प्रोत्साहन भत्ता अलग से देना चाहिए।
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यह युवा करा रहे पढ़ाई
कुमारी पूजा शर्मा, कुमारी दीपिका शर्मा, नीटु रमोल शास्त्री, राकेश शर्मा शास्त्री, अनिल मानलिया, देवेंद्र शास्त्री, परवेश शर्मा, कमलेश शास्त्री, सुनील शास्त्री, प्रदीप शर्मा शास्त्री, कुमारी सरोज, कुमारी शालू शर्मा, कुमारी करिश्मा शर्मा, दीपिका शर्मा, गीटु शास्त्री, रविंद्र शर्मा शास्त्री, कविता शर्मा, बीना शर्मा, मनीषा शर्मा और रवीना शर्मा।
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शिक्षा विभाग में बीआरसी और गांव के माया राम शर्मा ने गांव के शिक्षित युवक युवतियों को बच्चों का भविष्य संवारने के लिए प्रेरित किया है। माया राम शर्मा ने बताया कि गांवों के लगभग 100 बच्चों को इस कोरोना काल में घरद्वार शिक्षा दी जा रही हैं। शहरों में जहां ट्यूशन का सिलसिला चला हुआ है वहीं गांव में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। युवक -युवतियां पांच-पांच बच्चों के समूह बना कर पढ़ाई करवा रहे हैं। कोरोना के नियमों का पालन करते हुए यह कार्य किया जा रहा है। इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है जिससे वह गांवों के हर शिक्षित युवा से जुड़े हुए हैं और गांवों में बच्चों की पढ़ाई की रोजाना जानकारी ले रहे हैं। स्कूल से दिए जा रहे कार्य को भी बच्चों को समझा कर करवाया जा रहा है।
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माया राम शर्मा ने बताया कि कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी तक स्कूल को देखा भी नहीं है। उन्हें बेसिक पढ़ाई करवाई जा रही है। उन्हें स्कूल का माहौल दिया जा रहा है। माया राम शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार को गांवों में इस प्रकार की सेवा देने वाले युवाओं को प्रोत्साहन भत्ता अलग से देना चाहिए।
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यह युवा करा रहे पढ़ाई
कुमारी पूजा शर्मा, कुमारी दीपिका शर्मा, नीटु रमोल शास्त्री, राकेश शर्मा शास्त्री, अनिल मानलिया, देवेंद्र शास्त्री, परवेश शर्मा, कमलेश शास्त्री, सुनील शास्त्री, प्रदीप शर्मा शास्त्री, कुमारी सरोज, कुमारी शालू शर्मा, कुमारी करिश्मा शर्मा, दीपिका शर्मा, गीटु शास्त्री, रविंद्र शर्मा शास्त्री, कविता शर्मा, बीना शर्मा, मनीषा शर्मा और रवीना शर्मा।