{"_id":"60bbc5b18ebc3ed48f18ad2a","slug":"corona-in-sirmaur-nahan-news-sml372675288","type":"story","status":"publish","title_hn":"आसान नहीं तीसरी लहर से निपटना, महज तीन अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आसान नहीं तीसरी लहर से निपटना, महज तीन अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञ
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नाहन (सिरमौर)। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद अब तीसरी लहर की आशंका ने चिंताएं बढ़ा दी है। कोरोना काल में हालांकि, स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से सुधार किया जा रहा है लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण इस घातक संक्रमण से निपटना आसान प्रतीत नहीं हो रहा। तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक मानी जा रही है।
ऐसे में शिशु रोग विशेषज्ञ की कमी जिंदगी दांव पर लगा सकती है। सिरमौर जिले में महज तीन अस्पतालों में ही शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई है मेडिकल कॉलेज नाहन में चार, ददाहू तथा पांवटा साहिब में एक-एक शिशु रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं सबसे अधिक बेहाल हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल, उप स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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तीसरी लहर में बच्चों की तमाम जिम्मेदारी महज तीन अस्पतालों पर निर्भर रहेगी। जिले में पांच सिविल अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 140 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से महज ददाहू और पांवटा साहिब में ही शिशु रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। 140 उप स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सहारे चल रहे हैं। 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कहीं चिकित्सक हैं तो कहीं डेपुटेशन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर से निपटना चुनौती होगा।
उधर, मेडिकल कॉलेज में चार शिशु रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। तीसरी लहर में मेडिकल कॉलेज पर भी अधिक दबाव बढ़ सकता है। सीएमओ डॉ. केके पराशर ने बताया कि जहां भी शिशु रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं वहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। ददाहू में दस बिस्तर तैयार किए गए हैं, पांवटा साहिब में भी अलग से करीब 30 बिस्तर की व्यवस्था की जाएगी।
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बॉक्स के लिए
तीसरी लहर से निपटने की तैयारियां तेज
तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभी से तैयारियां में जुट गया है। मेडिकल कॉलेज नाहन के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल कौशिक ने बताया कि कॉलेज में बच्चों के लिए 30 बिस्तर का अलग से वार्ड बनाया जा रहा है। वेंटिलेटर और अन्य मशीनरियां भी जल्द उपलब्ध हो जाएंगी।
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ऐसे में शिशु रोग विशेषज्ञ की कमी जिंदगी दांव पर लगा सकती है। सिरमौर जिले में महज तीन अस्पतालों में ही शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई है मेडिकल कॉलेज नाहन में चार, ददाहू तथा पांवटा साहिब में एक-एक शिशु रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं सबसे अधिक बेहाल हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल, उप स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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तीसरी लहर में बच्चों की तमाम जिम्मेदारी महज तीन अस्पतालों पर निर्भर रहेगी। जिले में पांच सिविल अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 140 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से महज ददाहू और पांवटा साहिब में ही शिशु रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। 140 उप स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सहारे चल रहे हैं। 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कहीं चिकित्सक हैं तो कहीं डेपुटेशन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर से निपटना चुनौती होगा।
उधर, मेडिकल कॉलेज में चार शिशु रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। तीसरी लहर में मेडिकल कॉलेज पर भी अधिक दबाव बढ़ सकता है। सीएमओ डॉ. केके पराशर ने बताया कि जहां भी शिशु रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं वहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। ददाहू में दस बिस्तर तैयार किए गए हैं, पांवटा साहिब में भी अलग से करीब 30 बिस्तर की व्यवस्था की जाएगी।
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तीसरी लहर से निपटने की तैयारियां तेज
तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभी से तैयारियां में जुट गया है। मेडिकल कॉलेज नाहन के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल कौशिक ने बताया कि कॉलेज में बच्चों के लिए 30 बिस्तर का अलग से वार्ड बनाया जा रहा है। वेंटिलेटर और अन्य मशीनरियां भी जल्द उपलब्ध हो जाएंगी।