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दुर्गम क्षेत्रों के स्कूल बंद किए तो होगा जन आंदोलन
Updated Fri, 23 Feb 2018 11:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)।
जिले के 106 स्कूलों को बंद करने की कवायद के चलते विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने स्कूलों को बंद करने का कड़ा विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
समिति ने कहा कि स्कूलों का बंद होना जहां बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है, वहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भी अवहेलना है। स्कूल बंद करके सरकार व विभाग बच्चों के हितों से खिलवाड़ कर रही है। समिति की राज्य अध्यक्ष संतोष कपूर ने यहां जारी बयान में कहा कि जंगलोट, डडवा कायला व कांडो मेशनल जैसे सरकारी स्कूल दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं जहां बच्चों को वास्तव में शिक्षा की जरूरत है। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों को बंद किया गया तो यह बच्चों के भविष्य को चौपट कर रख देगा।
संतोष कपूर ने कहा कि सरकार व विभाग इन स्कूलों को बंद करता है तो इसको लेकर जन आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने वार्षिक परीक्षा के दौरान सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को मतदाता सूचियां तैयार करने के कार्य में लगाए जाने का भी विरोध किया है।
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उन्होंने कहा कि वार्षिक परीक्षाएं सिर पर होने के बावजूद भी सभी शिक्षकों से मतदाता सूचियां तैयार करने में लगाया गया है। पढ़ाई के दिनों में अधिकतर स्कूल शिक्षकों से खाली पड़े हैं। इससे परीक्षा की तैयारियां करने में ग्रामीण बच्चों को भी ट्यूशन का सहारा लेना पड़ रहा है लेकिन सरकार को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता तक नहीं है।
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ददाहू (सिरमौर)।
जिले के 106 स्कूलों को बंद करने की कवायद के चलते विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने स्कूलों को बंद करने का कड़ा विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
समिति ने कहा कि स्कूलों का बंद होना जहां बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है, वहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भी अवहेलना है। स्कूल बंद करके सरकार व विभाग बच्चों के हितों से खिलवाड़ कर रही है। समिति की राज्य अध्यक्ष संतोष कपूर ने यहां जारी बयान में कहा कि जंगलोट, डडवा कायला व कांडो मेशनल जैसे सरकारी स्कूल दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं जहां बच्चों को वास्तव में शिक्षा की जरूरत है। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों को बंद किया गया तो यह बच्चों के भविष्य को चौपट कर रख देगा।
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संतोष कपूर ने कहा कि सरकार व विभाग इन स्कूलों को बंद करता है तो इसको लेकर जन आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने वार्षिक परीक्षा के दौरान सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को मतदाता सूचियां तैयार करने के कार्य में लगाए जाने का भी विरोध किया है।
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उन्होंने कहा कि वार्षिक परीक्षाएं सिर पर होने के बावजूद भी सभी शिक्षकों से मतदाता सूचियां तैयार करने में लगाया गया है। पढ़ाई के दिनों में अधिकतर स्कूल शिक्षकों से खाली पड़े हैं। इससे परीक्षा की तैयारियां करने में ग्रामीण बच्चों को भी ट्यूशन का सहारा लेना पड़ रहा है लेकिन सरकार को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता तक नहीं है।
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